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छात्रों का संघर्ष: प्राइवेट सेक्टर के पैकेज छोड़कर पास की सरकारी परीक्षा, चयन के बाद भी नहीं मिली ज्वाइनिंग

छात्रों का संघर्ष: प्राइवेट सेक्टर के पैकेज छोड़कर पास की सरकारी परीक्षा, चयन के बाद भी नहीं मिली ज्वाइनिंग

मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के चयनित उम्मीदवारों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। सभी अभ्यर्थी अलग-अलग स्तर पर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कोई धरने-प्रदर्शन कर रहा है तो कोई सरकारी विभागों के दरवाजे खटखटा रहा है। इन युवाओं का आरोप है कि कड़ी परीक्षा पास करने और चयन सूची में नाम आने के बावजूद बिजली कंपनी प्रबंधन इन्हें ज्वाइनिंग नहीं दे रहा है। पीड़ित अभ्यर्थी नियुक्ति पत्र पाने की उम्मीद में एक साल से लगातार सरकारी दफ्तरों और अधिकारियों की चौखट के चक्कर काट रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि भर्ती की सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अब अचानक बिजली कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी यह दलील दे रहे हैं कि उनके पास इन पदों पर नियुक्ति के लिए रिक्तियां ही नहीं बची हैं।




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रविवार से गुरुवार तक अभ्यर्थियों ने इंदौर में बिजली कंपनी के कार्यालय पर धरना दिया
– फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर


भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी 350 से अधिक युवा भटकने को मजबूर

पूरे घटनाक्रम के अनुसार मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा साल 2024 में वर्ग-3 के कुल 818 रिक्त पदों को भरने के लिए विज्ञापन निकाला गया था। परीक्षा का आयोजन होने के बाद परिणाम भी आ गया और सभी सफल परीक्षार्थियों के दस्तावेजों की जांच यानी वेरिफिकेशन का काम भी पूरा कर लिया गया। इस बीच मामला कोर्ट में जाने के बाद माननीय हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से करीब 250 अभ्यर्थियों को तो नौकरी पर रख लिया गया, लेकिन 350 से ज्यादा चयनित अभ्यर्थी आज भी अधर में लटके हुए हैं। इन युवाओं के सामने अब दोहरी मुसीबत आ खड़ी हुई है क्योंकि इस प्रक्रिया में उलझे रहने के कारण उन्हें न तो कोई नया रोजगार मिल पा रहा है और न ही वे पुरानी जगह काम कर पा रहे हैं। युवाओं ने प्रबंधन पर तीखा सवाल दागते हुए पूछा है कि अगर विभाग के पास बजट या खाली पद नहीं थे, तो इतनी बड़ी भर्ती प्रक्रिया का आयोजन ही क्यों किया गया था।


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5 दिन तक सभी ने दिन-रात यहीं पर संघर्ष किया।
– फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर


न्यायालय के आदेश और संशोधित नतीजों के फेर में उलझी ज्वाइनिंग

इस पूरी भर्ती का इतिहास देखा जाए तो मार्च 2025 में इसकी लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी और इसी साल 28 मई को पहला रिजल्ट घोषित हुआ था। लेकिन एक अजीब वाकये के तहत महज दो घंटे के भीतर ही इस रिजल्ट को वेबसाइट से हटा दिया गया, जिसकी विभाग ने कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई। इसके बाद 30 मई को एक संशोधित परिणाम जारी हुआ और इसी के आधार पर 23 व 24 जून 2025 को चयनित लोगों के डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी की गई। अमूमन इस प्रक्रिया के बाद सीधे ज्वाइनिंग लेटर मिलता है, इसलिए सभी आश्वस्त थे। मगर मॉडल उत्तर कुंजी के दो विवादित सवालों को लेकर कुछ छात्र हाईकोर्ट चले गए। अदालत के अंतिम दिशा-निर्देशों के पालन में 5 जनवरी 2026 को एक बार फिर संशोधित नतीजा जारी करना पड़ा। इस नए परिणाम के बाद करीब 250 लोगों को तो विभाग ने आनन-फानन में ज्वाइनिंग दे दी, लेकिन बचे हुए 350 से ज्यादा लोगों को यह कहकर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया कि अब कंपनी में पद समाप्त हो चुके हैं।

पुरानी नौकरियां छोड़ने से अभ्यर्थियों के सामने गहराया आर्थिक संकट

इस लचर प्रशासनिक व्यवस्था का सबसे दुखद पहलू यह है कि इस परीक्षा में चयनित होने वाले कई युवा पहले से ही कहीं न कहीं रोजगार में लगे हुए थे। किसी अभ्यर्थी ने प्राइवेट सेक्टर की अच्छी-खासी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था, तो किसी ने दूसरे सरकारी विभाग में मिले मौके को सिर्फ इसलिए छोड़ दिया क्योंकि उन्हें बिजली कंपनी में स्थायी और बेहतर भविष्य की उम्मीद दिख रही थी। अब स्थिति यह हो चुकी है कि बिजली कंपनी उन्हें रख नहीं रही है और पुरानी कंपनियां उन्हें वापस लेने को तैयार नहीं हैं। आंदोलन कर रहे युवाओं का साफ कहना है कि पूरी चयन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पास कर लेने के बाद मैनेजमेंट का यह मनमाना फैसला उनके पूरे भविष्य, करियर और आर्थिक स्थिति को पूरी तरह तबाह करने वाला है।

प्रबंधन का आश्वासन, जल्द हल निकलेगा

इस पूरे गंभीर मामले पर मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक प्रकाश चौहान ने विभाग का पक्ष रखते हुए कहा है कि भर्ती प्रक्रिया के बीच में ही मामला माननीय उच्च न्यायालय में चले जाने की वजह से कानूनी पेचीदगियों के कारण नियुक्तियां देने में थोड़ी देरी अवश्य हुई है। उन्होंने आगे जानकारी देते हुए बताया कि कुल चयनित उम्मीदवारों में से 250 अभ्यर्थियों को पहले ही ज्वाइनिंग दी जा चुकी है और वे अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मुख्य महाप्रबंधक ने आंदोलनकारी युवाओं को भरोसा दिलाते हुए दावा किया है कि बचे हुए शेष सभी चयनित अभ्यर्थियों के मामले में भी विभाग पूरी संवेदनशीलता से विचार कर रहा है और बहुत जल्द इसका सकारात्मक समाधान निकालकर सबको नियुक्ति पत्र सौंप दिए जाएंगे।

क्या बोले अभ्यर्थी…

मानसिक, आर्थिक और  पारिवारिक तनाव से जूझ रहे 

अभिनेश चौहान ने कहा कि मैं, पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से बिजली विभाग में ऑफिस असिस्टेंट ग्रेड-3 भर्ती के कारण मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक परेशानियों का सामना कर रहा हूं। इसी भर्ती के भरोसे मैंने (UPASI) की नौकरी जॉइन नहीं की और एमपीएएसआई (MPASI) की टाइपिंग परीक्षा भी नहीं दी, क्योंकि मुझे विश्वास था कि बिजली विभाग की भर्ती प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाएगी। भर्ती में लगातार देरी होने से मेरे दोनों अवसर हाथ से निकल गए। आज न बिजली विभाग में नियुक्ति मिली और न ही वे अन्य अवसर बचे। इस स्थिति ने मेरे करियर और भविष्य पर गहरा प्रभाव डाला है। मैं शासन और संबंधित विभाग से कहना चाहता हूं कि भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण कर योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान की जाए, ताकि किसी अन्य युवा को भी ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

विभाग ने आश्वासन दिया था पर हम इंतजार ही करते रहे

रागिनी चौरे ने कहा कि 29 मई 2026 को ऑफिस असिस्टेंट ग्रेड-3 के 250 अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान की गई थी। किंतु जिन अभ्यर्थियों ने नियुक्ति ग्रहण नहीं की, उनके रिक्त पदों पर आज तक वेटिंग लिस्ट जारी नहीं की गई है। जबकि विभाग द्वारा जून माह में यह आश्वासन दिया गया था कि वेटिंग प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कर दी जाएगी। इसके बावजूद अब तक न तो वेटिंग लिस्ट जारी की गई है और न ही शेष पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर दिया गया है। हम सभी प्रतीक्षारत अभ्यर्थी लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। हम विभाग से कहना चाहते हैं कि रिक्त पदों के विरुद्ध शीघ्र वेटिंग लिस्ट जारी कर पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान की जाए, ताकि उन्हें और कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। 

राजधानी से लेकर इंदौर तक संघर्ष चल रहा

काजोल मिश्रा ने कहा कि अपनी जायज मांगों को लेकर हम पिछले एक साल से लगातार शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन चला रहे हैं। अपनी आवाज बुलंद करने के लिए हमने पहले प्रदेश की राजधानी भोपाल में लंबा धरना प्रदर्शन किया था और अब इंदौर में स्थित बिजली कंपनी के कॉर्पोरेट मुख्यालय के ठीक बाहर रात-दिन आंदोलन किया। अधिकांश अभ्यर्थी बेहद गरीब पृष्ठभूमि से आते हैं और उनके माता-पिता मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं। परीक्षा में चयन होने पर हमारे परिवार की आंखों में खुशियों के सपने तैरने लगे थे, लेकिन सरकारी लापरवाही के कारण आज हम सड़क पर बैठने को मजबूर हैं।

 


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