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जबलपुर को झटका… डामर की कमी से थमी देश की दूसरी सबसे लंबी रिंग रोड की रफ्तार, अक्टूबर 2027 तक बढ़ा समय

जबलपुर को झटका… डामर की कमी से थमी देश की दूसरी सबसे लंबी रिंग रोड की रफ्तार, अक्टूबर 2027 तक बढ़ा समय

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। जबलपुर की बहुप्रतीक्षित रिंग रोड परियोजना एक बार फिर समय-सीमा से पीछे खिसकती नजर आ रही है। करीब 114 किलोमीटर लंबी और लगभग 4,500 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन यह परियोजना देश की दूसरी सबसे लंबी रिंग रोड मानी जाती है। निर्माण की धीमी रफ्तार, बिटुमेन की कमी और प्रशासनिक स्तर पर निर्णयों में देरी के कारण अब इसके तय समय में पूरा होने की संभावना कमजोर पड़ गई है।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) के अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण होर्मुज मार्ग प्रभावित होने से पेट्रोलियम आधारित उत्पादों की आपूर्ति बाधित हुई है, जिसका सीधा असर सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले बिटुमेन और डामर की उपलब्धता पर पड़ा है।

रिंग रोड परियोजना को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। प्रारंभिक लक्ष्य के अनुसार इसके पहले दो पैकेज जनवरी 2026 तक पूरे हो जाने थे, जबकि संपूर्ण परियोजना जून 2026 तक पूरी करने की योजना थी। बाद में समय-सीमा बढ़ाकर अक्टूबर 2027 निर्धारित की गई, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए अब इस लक्ष्य पर भी संशय गहरा गया है। अधिकारियों का मानना है कि सामग्री की आपूर्ति सामान्य होने के बाद ही निर्माण कार्य दोबारा पूरी गति से आगे बढ़ सकेगा।

सूत्रों के अनुसार रिंग रोड का लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन कई महत्वपूर्ण हिस्सों में अभी भी निर्माण जारी है। निर्माण एजेंसियों का कहना है कि डामर की सीमित उपलब्धता के कारण सड़क की अंतिम परत बिछाने का काम प्रभावित हुआ है। दूसरी ओर, कुछ ठेकेदारों का आरोप है कि विभिन्न स्तरों पर निर्णय लेने में हो रही देरी और विभागीय समन्वय की कमी से भी परियोजना की रफ्तार प्रभावित हुई है।

क्या है बिटुमेन और क्यों पड़ा असर

बिटुमेन पेट्रोलियम रिफाइनिंग से प्राप्त होने वाला गाढ़ा बाइंडिंग एजेंट है, जिसका उपयोग सड़क निर्माण में विभिन्न परतों को मजबूती से जोड़ने के लिए किया जाता है। इसी बिटुमेन को पत्थर और अन्य निर्माण सामग्री के साथ मिलाकर एस्फाल्ट अथवा डामर तैयार किया जाता है। यही मिश्रण सड़क निर्माण का प्रमुख आधार होता है। अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखला प्रभावित होने से बिटुमेन की उपलब्धता कम हुई है, जिससे सड़क निर्माण की गति सीधे प्रभावित हुई है।

हर महीने हो रही केंद्रीय स्तर पर समीक्षा

रिंग रोड परियोजना की प्रगति की समीक्षा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय प्रत्येक माह ऑनलाइन कर रहा है। मंत्रालय ने निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि सामग्री की उपलब्धता में आई कठिनाइयों के बावजूद अन्य निर्माण कार्यों की गति बनाए रखी जाए। अधिकारियों का कहना है कि आपूर्ति सामान्य होते ही परियोजना को तेज गति से आगे बढ़ाने की रणनीति तैयार की गई है।

डामर की सड़क, प्लास्टिक से बनेगी सर्विस रोड

पूरी रिंग रोड डामर तकनीक से तैयार की जा रही है। मुख्य मार्ग के साथ लगभग 150 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड भी विकसित की जा रही है। सर्विस रोड के निर्माण में नगर निगम द्वारा जब्त किए गए सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथिन का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए एनएचएआइ ने नगर निगम से बड़ी मात्रा में जब्त प्लास्टिक उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।

पहला पैकेज अंतिम दौर में

बरेला स्थित शारदा मंदिर से चूल्हा गोलाई तक करीब 16 किलोमीटर लंबे पहले पैकेज का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है। केवल भटौली में नर्मदा नदी पर बन रहे एक्स्ट्राडोज पुल का निर्माण तथा सड़क की मार्किंग, पेंटिंग और कुछ फिनिशिंग कार्य शेष हैं। अन्य पैकेजों में भी अलग-अलग स्तर पर निर्माण जारी है।

परियोजना एक नजर में (फैक्ट फाइल)

  • कुल लंबाई: 114 किलोमीटर
  • अनुमानित लागत: करीब 4,500 करोड़ रुपये
  • निर्माण: पांच पैकेज में
  • वर्तमान प्रगति: करीब 70 प्रतिशत
  • संशोधित लक्ष्य: अक्टूबर 2027
  • मुख्य बाधा: बिटुमेन और डामर की आपूर्ति प्रभावित

पांच हिस्सों में बन रही रिंग रोड

  • बरेला शारदा मंदिर से चूल्हा गोलाई
  • चूल्हा गोलाई से भेड़ाघाट रेलवे स्टेशन
  • भेड़ाघाट रेलवे स्टेशन से कुशनेर (पनागर)
  • कुशनेर (पनागर) से कुण्डम-अमझर घाटी
  • कुण्डम-अमझर घाटी से बरेला शारदा मंदिर

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