सर्वे बताता है कि जहां-जहां बोरिंगों में रिचार्जिंग की व्यवस्था कर वर्षाजल जमीन में उतारने का प्रयास हुआ वहां-वहां बोरिंग भीषण गर्मी में भी लोगों को त …और पढ़ें
HighLights
- शहर के सवा लाख से ज्यादा बोरिंग में से 20 प्रतिशत में भी रिचार्जिंग की व्यवस्था नहीं
- लगातार धंस रहे भू-जल स्तर सुधारने पर किसी का ध्यान नहीं है
- शहर में लगभग हर दूसरा बोरिंग या तो सूख चुका है या अंतिम सांसे गिन रहा है
कुलदीप भावसार, नईदुनिया, इंदौर। इंदौर अपनी प्यास खुद बढ़ा रहा है। जमीन का सीना छलनी कर हम बेहिसाब पानी तो उलीच रहे हैं, लेकिन इसे लौटाने की जिम्मेदारी निभाने को तैयार नहीं हैं। हालत यह है कि शहर के सवा लाख से ज्यादा बोरिंग में से 20 प्रतिशत में भी रिचार्जिंग की व्यवस्था नहीं है।
शहर में हर साल नई कॉलोनियां, टाउनशिप बस रही हैं, कंक्रीट का जंगल लगातार फैल रहा है, लेकिन लगातार धंस रहे भू-जल स्तर सुधारने पर किसी का ध्यान नहीं है। निगम के आंकड़ों की बात करें तो शहर में लगभग हर दूसरा बोरिंग या तो सूख चुका है या अंतिम सांसे गिन रहा है। बावजूद इसके कहीं रिचार्जिंग को लेकर कोई गंभीर प्रयास नजर नहीं आ रहा।
सर्वे बताता है कि शहर में जहां-जहां बोरिंगों में रिचार्जिंग की व्यवस्था करते हुए वर्षा जल जमीन में उतारने का प्रयास हुआ वहां-वहां बोरिंग तपती धूप में भी लोगों को तृप्त कर रहे हैं, लेकिन जहां रिचार्जिंग की व्यवस्था नहीं हुई उन क्षेत्रों के बोरिंग मार्च में ही हांफने लगे थे। अप्रैल आते-आते तो उन्होंने दम तोड़ दिया।
इंदौर का 20 प्रतिशत हिस्सा आज भी ऐसा है जहां नर्मदा लाइन ही नहीं है। यह क्षेत्र पूरी तरह से भू-जल पर आश्रित हैं, बावजूद इसके इन क्षेत्रों में वर्षाजल को जमीन में सहेजकर रखने के प्रति गंभीरता नहीं है। आंकड़े बताते हैं कि नर्मदा विहिन क्षेत्रों में ऐसे बोरिंग जिनमें रिचार्ज सिस्टम लगा है 20 प्रतिशत से भी कम हैं।
मतलब यह हुआ कि ऐसे क्षेत्रों में हर पांच में से सिर्फ एक में ही रिचार्जिंग की व्यवस्था है। यही वजह है कि ये बोरिंग धूप का प्रकोप नहीं झेल नहीं पाए और सूख गए। नगर निगम ने तीन वर्ष पहले वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर अभियान चलाया था। इसके तहत एक लाख से ज्यादा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए, लेकिन इनमें से आधे से ज्यादा रखरखाव के अभाव में बंद हो गए। कागजों पर भले ही ये सिस्टम चालू हों, लेकिन मौके पर इनके सिर्फ अवशेष नजर आ रहे हैं।
जहां रिचार्जिंग की वहां आज भी दे रहे हैं पानी
निपानिया, बांगड़दा, पालदा, लसुडिया जैसे कई क्षेत्र हैं जहां कई बोरिंग अाज भी पानी दे रहे हैं। वजह है कि इन बोरिंग में वाटर रिचार्जिंग की व्यवस्था की गई है। इनका नियमित रखरखाव किया जा रहा है। विशेषज्ञों का भी कहना है कि ऐसे बोरिंग जिनमें वाटर रिचार्जिंग लगा है और सिस्टम का रखरखाव किया जा रहा है वहां के बोरिंग नियमित पानी देते हैं। वर्षा का जल जमीन में उतरकर सिर्फ एक बोरिंग को रिचार्ज नहीं करता बल्कि आसपास के कम से कम 200 वर्गमीटर क्षेत्र में नमी बनाकर रखता है।
लोगों से अपील की है
यह समय रिचार्जिंग सिस्टम के रखरखाव का है। हमने आमजन से अपील की है कि वे वर्षाजल को सहेजने की तैयारी कर लें ताकि अगले वर्ष हमें बोरिंग सूखने जैसी समस्या का सामना न करना पड़े। -अभिषेक शर्मा बबलू, जलकार्य प्रभारी नगर निगम
अपनी जरूरतें कम करना होंगी
हमें अपनी जरूरतों का आंकलन करके इसे कम करना होगा। जब ग्रामीण और कस्बों के नागरिक अपेक्षाकृत कम पानी में काम कर सकते हैं तो शहरी नागरिक क्यों नहीं। इसके अलावा हमें पानी के पुनर्उपयोग पर भी ध्यान देना होगा। पानी का पुनर्उपयोग और जरूरतें कम करके हम पानी बचा सकते हैं। -सुधींद्र मोहन शर्मा (भू-जल विशेषज्ञ)
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