डॉक्यू सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ पर छिड़ी बहस, लॉरेंस के चचेरे भाई ने किया विरोध; बोले- ‘बैन की जानी चाहिए’
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एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: Poonam Kandari
Updated Fri, 24 Apr 2026 12:54 PM IST
Docu Series Lawrence of Punjab Controversy: हाल ही में एक डॉक्यू सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ का ट्रेलर सामने आया। रिलीज से पहले ही यह डॉक्यू सीरीज विवाद में फंस गई है। कई लोग पर बैन की मांग कर रहे हैं। हाल ही में लॉरेंस के परिवार ने भी डॉक्यू सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ पर आपत्ति जाहिर की।
डॉक्यू सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ पर बढ़ा विवाद
– फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
डॉक्यू सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ को लेकर सोशल मीडिया से लेकर पंजाब के राजनीति तक में बहस छिड़ी है। इसे बैन करने की मांग की जा रही है। बीते दिनों पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा ने डॉक्यू सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ पर बैन लगाने की मांग की है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है, साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखकर डॉक्यू सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ पर बैन लगाने की मांग की। अब इस सीरीज के विरोध में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का परिवार भी उतर आया है। वह भी इस पर बैन लगाने की मांग कर रहे हैं।
लॉरेंस के चचेरे भाई ने भी की बैन की मांग
लॉरेंस बिश्नोई के चचेरे भाई रमेश बिश्नोई ने डॉक्यू-सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ की निंदा की है। वह इस पर जल्द से जल्द बैन लगाने की मांग की है। एएनआई से की गई बातचीत में वह कहते हैं, ‘पंजाब गुरुओं की धरती है। डायरेक्टर ने किसकी इजाजत से यह डॉक्यू सीरीज बनाई है? न परिवार से इजाजत ली, न सरकार से कोई परमिशन ली। वह इसके जरिए क्या साबित करना चाहते हैं? लाॅरेंस का मामला अभी भी कोर्ट में चल रहा है। हमें इस डॉक्यू सीरीज पर आपत्ति है। यह बैन की जानी चाहिए।
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एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: Poonam Kandari
Updated Fri, 24 Apr 2026 12:54 PM IST
Docu Series Lawrence of Punjab Controversy: हाल ही में एक डॉक्यू सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ का ट्रेलर सामने आया। रिलीज से पहले ही यह डॉक्यू सीरीज विवाद में फंस गई है। कई लोग पर बैन की मांग कर रहे हैं। हाल ही में लॉरेंस के परिवार ने भी डॉक्यू सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ पर आपत्ति जाहिर की।
डॉक्यू सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ पर बढ़ा विवाद – फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
डॉक्यू सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ को लेकर सोशल मीडिया से लेकर पंजाब के राजनीति तक में बहस छिड़ी है। इसे बैन करने की मांग की जा रही है। बीते दिनों पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा ने डॉक्यू सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ पर बैन लगाने की मांग की है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है, साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखकर डॉक्यू सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ पर बैन लगाने की मांग की। अब इस सीरीज के विरोध में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का परिवार भी उतर आया है। वह भी इस पर बैन लगाने की मांग कर रहे हैं।
लॉरेंस के चचेरे भाई ने भी की बैन की मांग
लॉरेंस बिश्नोई के चचेरे भाई रमेश बिश्नोई ने डॉक्यू-सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ की निंदा की है। वह इस पर जल्द से जल्द बैन लगाने की मांग की है। एएनआई से की गई बातचीत में वह कहते हैं, ‘पंजाब गुरुओं की धरती है। डायरेक्टर ने किसकी इजाजत से यह डॉक्यू सीरीज बनाई है? न परिवार से इजाजत ली, न सरकार से कोई परमिशन ली। वह इसके जरिए क्या साबित करना चाहते हैं? लाॅरेंस का मामला अभी भी कोर्ट में चल रहा है। हमें इस डॉक्यू सीरीज पर आपत्ति है। यह बैन की जानी चाहिए।
पंजाबी म्यूज़िक में अपने बढ़ते प्रभाव के साथ अमेरिका स्थित गायक-गीतलेखक, मनसिमरन संधू ने वापसी करते हुए अपना लेटेस्ट सिंगल, दीवानी मस्तानी पेश किया है। इस ट्रैक में वो एक बहुत ही निजी एहसास लेकर आए हैं और बता रहे हैं कि किसी के प्यार में पूरी तरह डूब जाने पर कैसा महसूस होता है। यह एक ऐसी स्थिति होती है, जब प्यार कोई एहसास नहीं रह जाता है, बल्कि आपकी पूरी दुनिया बन जाता है।
इस गाने को लिखने वाले और कंपोज़ करने वाले खुद मनसिमरन हैं। इसका निर्माण हितेन ने किया है। इस गाने में मधुर धुनों के साथ मंत्रमुग्ध कर देने वाली लय है। धीरे-धीरे गाने की तीव्रता बढ़ती जाती है और यह एक गहरे एवं लगभग पूरी तरह से आध्यात्मिक अनुभव में बदल जाता है। दीवानी मस्तानी के मूल में प्यार का एक ऐसा रोमांटिक अंदाज है, जो बिल्कुल काल्पनिक महसूस होता है, लेकिन फिर भी इस एहसास को खुद से दूर नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसके एक-एक क्षण में असीम शांति का अनुभव मिलता है। जैसे-जैसे ट्रैक आगे बढ़ता है, कव्वाली से प्रेरित शैली के साथ इसकी भावनात्मक गहराई बढ़ती चली जाती है और चाहत पूरी तरह से समर्पण में बदल जाती है।
इस गाने के बारे में मनसिमरन संधू ने कहा, ;;दीवानी मस्तानी एक वास्तविक जगह से निकला है। यह ऐसे प्यार के प्रति समर्पित हो जाने के बारे में है, जिस पर आपका कोई नियंत्रण नहीं होता है, और जो लगभग काल्पनिक महसूस होता है। मेरा मानना है कि हर किसी ने अपने जीवन में कभी न कभी इस प्यार का अनुभव किया होगा, जब आपके मन में केवल एक इंसान बस जाता है और बाकी सब-कुछ धुंधला हो जाता है। मैं चाहता था कि इस गाने में ठीक वैसा ही महसूस हो, वही सच्चा और बहुत ज्यादा गहरा एहसास मिले।
मनसिमरन संधू इस समय शिकागो में रहते हैं। वो सुर्खियों में पहली बार तब आए, जब उन्होंने रियलिटी शो, राईज़िंग स्टार में उद्योग के दिग्गजों और अपने आदर्श, दिलजीत दोसांझ के सामने परफॉर्म किया। तेरे पीछे, मिलदे मिलदे और हुजूर जी जैसे ट्रैक्स के साथ वो ऐसे गीत बना रहे हैं, जिनमें आधुनिक प्रोडक्शन के साथ भावुक कहानियाँ भी शामिल हैं। दीवानी मस्तानी उनके गानों के सफर में एक और गहरा व दिलचस्प मोड़ है।
दीवानी मस्तानी के साथ मनसिमरन जज्बातों की दुनिया में उतर रहे हैं और एक ऐसा प्यार पेश कर रहे हैं, जो थमता नहीं, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ता चला जाता है और आपके दिलोदिमाग पर छा जाता है, जिससे बचना असंभव है। दीवानी मस्तानी सभी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज़ हो गया है।
पंजाबी म्यूज़िक में अपने बढ़ते प्रभाव के साथ अमेरिका स्थित गायक-गीतलेखक, मनसिमरन संधू ने वापसी करते हुए अपना लेटेस्ट सिंगल, दीवानी मस्तानी पेश किया है। इस ट्रैक में वो एक बहुत ही निजी एहसास लेकर आए हैं और बता रहे हैं कि किसी के प्यार में पूरी तरह डूब जाने पर कैसा महसूस होता है। यह एक ऐसी स्थिति होती है, जब प्यार कोई एहसास नहीं रह जाता है, बल्कि आपकी पूरी दुनिया बन जाता है।
इस गाने को लिखने वाले और कंपोज़ करने वाले खुद मनसिमरन हैं। इसका निर्माण हितेन ने किया है। इस गाने में मधुर धुनों के साथ मंत्रमुग्ध कर देने वाली लय है। धीरे-धीरे गाने की तीव्रता बढ़ती जाती है और यह एक गहरे एवं लगभग पूरी तरह से आध्यात्मिक अनुभव में बदल जाता है। दीवानी मस्तानी के मूल में प्यार का एक ऐसा रोमांटिक अंदाज है, जो बिल्कुल काल्पनिक महसूस होता है, लेकिन फिर भी इस एहसास को खुद से दूर नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसके एक-एक क्षण में असीम शांति का अनुभव मिलता है। जैसे-जैसे ट्रैक आगे बढ़ता है, कव्वाली से प्रेरित शैली के साथ इसकी भावनात्मक गहराई बढ़ती चली जाती है और चाहत पूरी तरह से समर्पण में बदल जाती है।
इस गाने के बारे में मनसिमरन संधू ने कहा, ;;दीवानी मस्तानी एक वास्तविक जगह से निकला है। यह ऐसे प्यार के प्रति समर्पित हो जाने के बारे में है, जिस पर आपका कोई नियंत्रण नहीं होता है, और जो लगभग काल्पनिक महसूस होता है। मेरा मानना है कि हर किसी ने अपने जीवन में कभी न कभी इस प्यार का अनुभव किया होगा, जब आपके मन में केवल एक इंसान बस जाता है और बाकी सब-कुछ धुंधला हो जाता है। मैं चाहता था कि इस गाने में ठीक वैसा ही महसूस हो, वही सच्चा और बहुत ज्यादा गहरा एहसास मिले।
मनसिमरन संधू इस समय शिकागो में रहते हैं। वो सुर्खियों में पहली बार तब आए, जब उन्होंने रियलिटी शो, राईज़िंग स्टार में उद्योग के दिग्गजों और अपने आदर्श, दिलजीत दोसांझ के सामने परफॉर्म किया। तेरे पीछे, मिलदे मिलदे और हुजूर जी जैसे ट्रैक्स के साथ वो ऐसे गीत बना रहे हैं, जिनमें आधुनिक प्रोडक्शन के साथ भावुक कहानियाँ भी शामिल हैं। दीवानी मस्तानी उनके गानों के सफर में एक और गहरा व दिलचस्प मोड़ है।
दीवानी मस्तानी के साथ मनसिमरन जज्बातों की दुनिया में उतर रहे हैं और एक ऐसा प्यार पेश कर रहे हैं, जो थमता नहीं, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ता चला जाता है और आपके दिलोदिमाग पर छा जाता है, जिससे बचना असंभव है। दीवानी मस्तानी सभी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज़ हो गया है।
Mansimran Sandhu,Deewani Mastani, Hindi news">मनसिमरन संधू एक बार फिर आए लोगों का दिल जीतने अपने नए गाने
पंजाबी म्यूज़िक में अपने बढ़ते प्रभाव के साथ अमेरिका स्थित गायक-गीतलेखक, मनसिमरन संधू ने वापसी करते हुए अपना लेटेस्ट सिंगल, दीवानी मस्तानी पेश किया है। इस ट्रैक में वो एक बहुत ही निजी एहसास लेकर आए हैं और बता रहे हैं कि किसी के प्यार में पूरी तरह डूब जाने पर कैसा महसूस होता है। यह एक ऐसी स्थिति होती है, जब प्यार कोई एहसास नहीं रह जाता है, बल्कि आपकी पूरी दुनिया बन जाता है।
इस गाने को लिखने वाले और कंपोज़ करने वाले खुद मनसिमरन हैं। इसका निर्माण हितेन ने किया है। इस गाने में मधुर धुनों के साथ मंत्रमुग्ध कर देने वाली लय है। धीरे-धीरे गाने की तीव्रता बढ़ती जाती है और यह एक गहरे एवं लगभग पूरी तरह से आध्यात्मिक अनुभव में बदल जाता है। दीवानी मस्तानी के मूल में प्यार का एक ऐसा रोमांटिक अंदाज है, जो बिल्कुल काल्पनिक महसूस होता है, लेकिन फिर भी इस एहसास को खुद से दूर नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसके एक-एक क्षण में असीम शांति का अनुभव मिलता है। जैसे-जैसे ट्रैक आगे बढ़ता है, कव्वाली से प्रेरित शैली के साथ इसकी भावनात्मक गहराई बढ़ती चली जाती है और चाहत पूरी तरह से समर्पण में बदल जाती है।
इस गाने के बारे में मनसिमरन संधू ने कहा, ;;दीवानी मस्तानी एक वास्तविक जगह से निकला है। यह ऐसे प्यार के प्रति समर्पित हो जाने के बारे में है, जिस पर आपका कोई नियंत्रण नहीं होता है, और जो लगभग काल्पनिक महसूस होता है। मेरा मानना है कि हर किसी ने अपने जीवन में कभी न कभी इस प्यार का अनुभव किया होगा, जब आपके मन में केवल एक इंसान बस जाता है और बाकी सब-कुछ धुंधला हो जाता है। मैं चाहता था कि इस गाने में ठीक वैसा ही महसूस हो, वही सच्चा और बहुत ज्यादा गहरा एहसास मिले।
मनसिमरन संधू इस समय शिकागो में रहते हैं। वो सुर्खियों में पहली बार तब आए, जब उन्होंने रियलिटी शो, राईज़िंग स्टार में उद्योग के दिग्गजों और अपने आदर्श, दिलजीत दोसांझ के सामने परफॉर्म किया। तेरे पीछे, मिलदे मिलदे और हुजूर जी जैसे ट्रैक्स के साथ वो ऐसे गीत बना रहे हैं, जिनमें आधुनिक प्रोडक्शन के साथ भावुक कहानियाँ भी शामिल हैं। दीवानी मस्तानी उनके गानों के सफर में एक और गहरा व दिलचस्प मोड़ है।
दीवानी मस्तानी के साथ मनसिमरन जज्बातों की दुनिया में उतर रहे हैं और एक ऐसा प्यार पेश कर रहे हैं, जो थमता नहीं, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ता चला जाता है और आपके दिलोदिमाग पर छा जाता है, जिससे बचना असंभव है। दीवानी मस्तानी सभी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज़ हो गया है।
मुरादाबाद के तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (TMU) मेडिकल कॉलेज में गर्भवती अमीना का इलाज शुरू हुआ। दो महीने की जांच के बाद डॉक्टरों को पता चला कि उसके गर्भ में चार बच्चे पल रहे हैं। मेडिकल साइंस में ऐसी गर्भावस्था को हाई-रिस्क माना जाता है, क्योंकि इसमें मां और बच्चों दोनों की जान को खतरा हो सकता है।
इलाज कर रही डॉक्टरों की टीम की प्रमुख डॉ. शुभ्रा अग्रवाल ने अमीना के परिवार को बताया कि उसके गर्भ में चार बच्चे हैं, जिसके चलते खतरा हो सकता है, लिहाजा फीटल रिडक्शन यानी भ्रूणों की संख्या कम कर सकते है, लेकिन परिवार ने चारों बच्चों को जन्म देने का फैसला लिया। अमीना के चारों बच्चे अलग-अलग थैली में थे, जिसके चलते स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण थी।
गर्भावस्था के दौरान अमीना को ब्लड प्रेशर और लीवर से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई बार उनकी हालत इतनी बिगड़ी और अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। लेकिन गर्भवती का परिवार लगातार इलाज और जांच के लिए अस्पताल आता रहा।
8 मई को तबीयत ज्यादा खराब होने पर अमीना को फिर अस्पताल में भर्ती कराया गया। अगले दिन 9 मई को उन्होंने सामान्य प्रसव से एक बेटे को जन्म दिया, जिसका वजन करीब 710 ग्राम था। इसके बाद डॉक्टरों ने स्थिति को संभालते हुए बाकी बच्चों की डिलीवरी को कुछ दिनों तक टालते हुए जच्चा-बच्चे को घर भेज दिया गया। 14 मई में फिर से अमीना को पीड़ा शुरू हो गई, अस्पताल लाया गया जहां उसने प्रीमैच्योर दो बेटियों और एक बेटे को जन्म दिया।
डॉक्टरों का कहना है कि यह मामला इसलिए और भी खास बन जाता है क्योंकि चारों बच्चे गर्भ में अलग-अलग थैली में विकसित हो रहे थे। समय से पहले जन्म और बच्चों का कम वजन डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती था। फिलहाल चारों नवजातों को एहतियात के तौर पर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है और उनकी हालत में लगातार सुधार हो रहा है। मां की स्थिति भी पूरी तरह स्थिर बताई जा रही है।
चार बच्चों के जन्म के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। बच्चों के पिता मोहम्मद आलिम ने डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और सही इलाज की वजह से आज उनकी पत्नी और बच्चे सुरक्षित हैं। Edited by : Sudhir Sharma
मुरादाबाद के तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (TMU) मेडिकल कॉलेज में गर्भवती अमीना का इलाज शुरू हुआ। दो महीने की जांच के बाद डॉक्टरों को पता चला कि उसके गर्भ में चार बच्चे पल रहे हैं। मेडिकल साइंस में ऐसी गर्भावस्था को हाई-रिस्क माना जाता है, क्योंकि इसमें मां और बच्चों दोनों की जान को खतरा हो सकता है।
इलाज कर रही डॉक्टरों की टीम की प्रमुख डॉ. शुभ्रा अग्रवाल ने अमीना के परिवार को बताया कि उसके गर्भ में चार बच्चे हैं, जिसके चलते खतरा हो सकता है, लिहाजा फीटल रिडक्शन यानी भ्रूणों की संख्या कम कर सकते है, लेकिन परिवार ने चारों बच्चों को जन्म देने का फैसला लिया। अमीना के चारों बच्चे अलग-अलग थैली में थे, जिसके चलते स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण थी।
गर्भावस्था के दौरान अमीना को ब्लड प्रेशर और लीवर से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई बार उनकी हालत इतनी बिगड़ी और अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। लेकिन गर्भवती का परिवार लगातार इलाज और जांच के लिए अस्पताल आता रहा।
8 मई को तबीयत ज्यादा खराब होने पर अमीना को फिर अस्पताल में भर्ती कराया गया। अगले दिन 9 मई को उन्होंने सामान्य प्रसव से एक बेटे को जन्म दिया, जिसका वजन करीब 710 ग्राम था। इसके बाद डॉक्टरों ने स्थिति को संभालते हुए बाकी बच्चों की डिलीवरी को कुछ दिनों तक टालते हुए जच्चा-बच्चे को घर भेज दिया गया। 14 मई में फिर से अमीना को पीड़ा शुरू हो गई, अस्पताल लाया गया जहां उसने प्रीमैच्योर दो बेटियों और एक बेटे को जन्म दिया।
डॉक्टरों का कहना है कि यह मामला इसलिए और भी खास बन जाता है क्योंकि चारों बच्चे गर्भ में अलग-अलग थैली में विकसित हो रहे थे। समय से पहले जन्म और बच्चों का कम वजन डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती था। फिलहाल चारों नवजातों को एहतियात के तौर पर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है और उनकी हालत में लगातार सुधार हो रहा है। मां की स्थिति भी पूरी तरह स्थिर बताई जा रही है।
चार बच्चों के जन्म के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। बच्चों के पिता मोहम्मद आलिम ने डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और सही इलाज की वजह से आज उनकी पत्नी और बच्चे सुरक्षित हैं। Edited by : Sudhir Sharma
">UP में 31 साल की महिला ने 5 दिनों में 4 बच्चों को दिया जन्म, डॉक्टर्स भी हैरान
उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद से एक ऐसी खबर सामने आ रही है। इसने हर किसी को हैरत में डाल दिया। संभल जिले के असमोली क्षेत्र की रहने वाली 31 वर्षीय अमीना ने पांच दिनों के अंदर चार बच्चों को जन्म दिया। इनमें दो बेटे और दो बेटियां शामिल हैं। अस्पताल में इन चार बच्चों की किलकारियों को सुनकर डॉक्टर और परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं है। डॉक्टर्स के मुताबिक यह डिलीवरी बेहद दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण रही हैं। आमतौर पर हाई रिस्क केस में सिजेरियन ऑपरेशन होता है, लेकिन यहां चारों बच्चे नार्मल डिलीवरी से हुए हैं।
मुरादाबाद के तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (TMU) मेडिकल कॉलेज में गर्भवती अमीना का इलाज शुरू हुआ। दो महीने की जांच के बाद डॉक्टरों को पता चला कि उसके गर्भ में चार बच्चे पल रहे हैं। मेडिकल साइंस में ऐसी गर्भावस्था को हाई-रिस्क माना जाता है, क्योंकि इसमें मां और बच्चों दोनों की जान को खतरा हो सकता है।
इलाज कर रही डॉक्टरों की टीम की प्रमुख डॉ. शुभ्रा अग्रवाल ने अमीना के परिवार को बताया कि उसके गर्भ में चार बच्चे हैं, जिसके चलते खतरा हो सकता है, लिहाजा फीटल रिडक्शन यानी भ्रूणों की संख्या कम कर सकते है, लेकिन परिवार ने चारों बच्चों को जन्म देने का फैसला लिया। अमीना के चारों बच्चे अलग-अलग थैली में थे, जिसके चलते स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण थी।
गर्भावस्था के दौरान अमीना को ब्लड प्रेशर और लीवर से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई बार उनकी हालत इतनी बिगड़ी और अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। लेकिन गर्भवती का परिवार लगातार इलाज और जांच के लिए अस्पताल आता रहा।
8 मई को तबीयत ज्यादा खराब होने पर अमीना को फिर अस्पताल में भर्ती कराया गया। अगले दिन 9 मई को उन्होंने सामान्य प्रसव से एक बेटे को जन्म दिया, जिसका वजन करीब 710 ग्राम था। इसके बाद डॉक्टरों ने स्थिति को संभालते हुए बाकी बच्चों की डिलीवरी को कुछ दिनों तक टालते हुए जच्चा-बच्चे को घर भेज दिया गया। 14 मई में फिर से अमीना को पीड़ा शुरू हो गई, अस्पताल लाया गया जहां उसने प्रीमैच्योर दो बेटियों और एक बेटे को जन्म दिया।
डॉक्टरों का कहना है कि यह मामला इसलिए और भी खास बन जाता है क्योंकि चारों बच्चे गर्भ में अलग-अलग थैली में विकसित हो रहे थे। समय से पहले जन्म और बच्चों का कम वजन डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी चुनौती था। फिलहाल चारों नवजातों को एहतियात के तौर पर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है और उनकी हालत में लगातार सुधार हो रहा है। मां की स्थिति भी पूरी तरह स्थिर बताई जा रही है।
चार बच्चों के जन्म के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। बच्चों के पिता मोहम्मद आलिम ने डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और सही इलाज की वजह से आज उनकी पत्नी और बच्चे सुरक्षित हैं। Edited by : Sudhir Sharma
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