भोजशाला को लेकर हाई कोर्ट में चल रही पांच याचिकाओं और एक अपील में सुनवाई पूरी होने के बाद अब निर्णय का इंतजार है। …और पढ़ें
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भोजशाला को लेकर हाई कोर्ट में चल रही पांच याचिकाओं और एक अपील में सुनवाई पूरी होने के बाद अब निर्णय का इंतजार है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 6 अप्रैल 2026 से मामले में सुनवाई शुरू की थी। 12 मई 2026 को कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अंततः अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया। इन 40 दिनों में 24 बार यह मामला सुनवाई पर लगा।
करीब 43 घंटे सुनवाई चली। मंदिर पक्ष ने अपनी बात कोर्ट के समक्ष रखने के लिए 14 तो मस्जिद पक्ष ने 12 घंटे का समय लिया। अपीलार्थी के वकील ने पांच घंटे में अपनी बात रखी। भोजशाला के सर्वे में मिले साक्ष्य और सर्वे की रिपोर्ट को कोर्ट के समक्ष रखने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने सात घंटे का समय लिया।
दलीलों का दौर: किसने कितनी देर की बहस?
सबसे लंबी बहस याचिकाकर्ता हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने की। उन्होंने लगभग 9.5 घंटे तक अपनी बात रखी। वहीं सबसे छोटी बहस जैन समाज की ओर से एडवोकेट दिनेश पी राजभर ने की। उन्होंने अपनी बात पूरी करने में लगभग सवा घंटे का समय लिया। धार भोजशाला को लेकर मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में पांच याचिकाएं और एक अपील चल रही हैं। इनमें से सबसे पहली याचिका वर्ष 2013 में याचिकाकर्ता अंतरसिंह और अन्य ने प्रस्तुत की थी।
इस याचिका की सुनवाई के दौरान ही वर्ष 2019 में मस्जिद पक्ष की ओर से मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी ने याचिका दायर कर दी। इन याचिकाओं में तारीखें चल ही रही थीं कि वर्ष 2022 में भोजशाला को लेकर दो और जनहित याचिकाएं दायर हो गईं। पहली हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और दूसरी कुलदीप तिवारी ने दायर की थी। दोनों में भोजशाला में 24 घंटे पूजा का अधिकार मांगा गया है। वर्ष 2026 में जैन समाज ने नई याचिका दायर कर भोजशाला पर अपना अधिकार जता दिया।
याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांगें
- हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और कुलदीप तिवारी: इन्होंने एएसआई के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को चुनौती दी है। इस आदेश में एएसआई ने मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा और शुक्रवार को दोपहर एक से तीन के बीच मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति दी थी। याचिकाकर्ताओं ने इस आदेश में संशोधन की मांग करते हुए 24 घंटे पूजा का अधिकार मांगा है।
- मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी: इन्होंने अपनी याचिका में भोजशाला को मस्जिद बताते हुए नमाज की अनुमति चाही है।
- सलेकचंद जैन: इन्होंने अपनी याचिका में भोजशाला को जैन मंदिर बताते हुए पूजा का अधिकार मांगा है।
- अपीलार्थी काजी जकुल्ला: इन्होंने एकलपीठ के आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की है।
- अंतरसिंह और अन्य: इन्होंने अपनी याचिका में भोजशाला मामले का सौहार्दपूर्ण समाधान निकाले जाने की मांग की है।
पक्षकारों के अलग-अलग तर्क
- मंदिर पक्ष: भोजशाला का निर्माण 11वीं शताब्दी में राजा भोज ने कराया था। बाद में अलाउद्दीन खिलजी के काल में भोजशाला में तोड़फोड़ की गई और इसे मस्जिद का स्वरूप देने का प्रयास किया गया।
- मस्जिद पक्ष: जिसे भोजशाला बताया जा रहा है वह मस्जिद है। राजा भोज के बाद धार पर कई बार हमले हुए। भवन तोड़े गए। इन्हीं भवनों के मलबे से निकली सामग्री से मस्जिद का निर्माण किया गया था।
- जैन समाज: भोजशाला का निर्माण राजा भोज ने कराया था। यह जैन गुरुकुल हुआ करती थी।
विवाद की स्थिति और एएसआई की व्यवस्था
वर्ष 2003 में एएसआई ने व्यवस्था दी थी कि हिंदू पक्ष प्रत्येक मंगलवार भोजशाला में पूजा करेंगे और मुस्लिम पक्ष प्रत्येक शुक्रवार दोपहर एक से तीन बजे तक नमाज पढ़ सकता है। इसके साथ ही हिंदू पक्ष प्रत्येक बसंत पंचमी पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा कर सकेगा। विवाद तब होता है जब बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन आती है।
पक्षकार और वकील – कितनी देर रखे तर्क
| पक्षकार / वकील | समय |
| एडवोकेट विष्णु शंकर जैन (हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस) | 9.5 घंटे |
| एडवोकेट मनीष गुप्ता (कुलदीप तिवारी) | 4.5 घंटे |
| एडवोकेट सलमान खुर्शीद और अन्य (मस्जिद पक्ष) | 12 घंटे |
| एडवोकेट सुनील जैन (एएसआई) | 7 घंटे |
| एडवोकेट शोभा मेनन (काजी जकुल्ला) | 5 घंटे |
| एडवोकेट दिनेश पी राजभर (जैन समाज) | 1.5 घंटे |
| महाधिवक्ता प्रशांत सिंह (शासन) | 2.5 घंटे |
| एडवोकेट एके चितले (अंतरसिंह और अन्य) | 3 घंटे |
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