प्रकृति पूजा की ओर भी हमारा कदम बढ़े
आयोजन की मूल भावना को स्पष्ट करते हुए बताया गया कि भगवान शिव ने जिस प्रकार समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को स्वयं ग्रहण कर अमृत देवताओं के लिए छोड़ दिया, उसी प्रकार वृक्ष भी हमारे वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड रूपी विष को ग्रहण कर हमें ऑक्सीजन रूपी अमृत प्रदान करते हैं। इसलिए आज आवश्यकता है कि हमारी शिव पूजा और शिव भक्ति केवल मंदिरों तक सीमित न रहे, बल्कि शिव सेवा से प्रकृति सेवा और शिव पूजा से प्रकृति पूजा की ओर भी हमारा कदम बढ़े। वृक्षों को बचाना और उनकी सेवा करना भी इसी भावना का जीवंत स्वरूप है।
इन्होंने किया कावड़ का पूजन
पूजन आरडीए अध्यक्ष मनोहर पोरवाल, उपाध्यक्ष गोविंद काकानी, एमआईसी सदस्य पार्षद विशाल शर्मा, जअप जिला समन्वयक रत्नेश विजयवर्गीय, स्वामी विवेकानंद व्याख्यानमाला समिति अध्यक्ष विम्पी छावड़ा, पर्यावरणविद् डॉ. खुशहालसिंह पुरोहित, गायत्री परिवार के मुख्य ट्रस्टी पीआर शर्मा, युवा प्रकोष्ठ प्रांतीय संयोजक विवेक चौधरी, राष्ट्रपति पुरुस्कार प्राप्त सीमा अग्निहोत्री, मोहन मुरलीवाला आदि से डॉ. आईपी त्रिवेदी ने करवाया।
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