नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपित सोनम रघुवंशी (25 वर्ष) को जमानत मिलने के बाद अब अन्य आरोपितों को भी राहत की उम्मीद जागी है। इसी कड़ी में सहआरोपित और सोनम के कथित प्रेमी राज कुशवाह ने बुधवार को शिलांग सत्र न्यायालय में जमानत आवेदन प्रस्तुत किया। इस पर सुनवाई भी हुई, लेकिन कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया है।
सोनम को जमानत मिलने पर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गौरतलब है कि इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी मई 2025 में हनीमून के दौरान मेघालय के चेरापूंजी क्षेत्र में लापता हो गए थे।
करीब दस दिन बाद उनका शव गहरी खाई में मिला था। जांच में सामने आया कि पत्नी सोनम ने राज के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी। आरोप है कि राज ने अपने तीन साथियों- विशाल चौहान, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी की मदद से वारदात को अंजाम दिलाया। ये तीनों भी शिलांग जेल में बंद हैं।
एसआईटी की भूमिका पर सवाल
मामले में मेघालय पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि जांच एजेंसियों ने गिरफ्तारी के समय आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का सही पालन नहीं किया। यदि शुरुआती स्तर पर ही दस्तावेजों और धाराओं की सटीकता सुनिश्चित की जाती, तो स्थिति अलग हो सकती थी।
शिलांग के होटल में पिता के साथ रुकी है सोनम
मंगलवार रात रिहा होने के बाद सोनम अभी शिलांग के होटल में अपने पिता देवी सिंह के साथ रुकी हुई है। देवी सिंह ने अपने भतीजे के साथ शिलांग जाकर जमानत के लिए 50 हजार रुपये का मुचलका भरा था। सोनम अभी सार्वजनिक रूप से बाजार या अन्य स्थानों पर नहीं जा रही है। होटल से बाहर निकलते समय भी वो चेहरे पर स्कार्फ पहने रहती है।
राज कुशवाह पर आरोप
राज कथिततौर पर सोनम का प्रेमी है। आरोप है कि उसने ही हत्याकांड को अंजाम तक पहुंचाया। दोस्तों को शिलांग पहुंचाया। पिस्टल, रुपयों और मोबाइल की व्यवस्था की।
सबसे बड़ी गलती, जिससे सोनम को मिली जमानत
अदालत ने पाया कि आरोपित को गिरफ्तारी के समय सही धाराओं की जानकारी नहीं दी गई। हत्या जैसे गंभीर आरोप (धारा 103 बीएनएस) की जगह दस्तावेजों में धारा 403(1) दर्ज थी। कानून में इस तरह की कोई धारा नहीं है।
क्या अन्य आरोपियों को भी मिलेगा फायदा?
सोनम के केस जैसी प्रक्रिया त्रुटियां अन्य आरोपितों के मामलों में भी पाई जाती हैं, तो उन्हें भी जमानत का लाभ मिल सकता है, एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि अंडर ट्रायल मामलों में लंबे समय तक जेल में रखने पर भी अदालतें राहत देती हैं। ऐसे में आरोपित इस आधार को भी जमानत के लिए उपयोग कर सकते हैं।
अब आगे क्या?
फिलहाल राज कुशवाह की जमानत पर कोर्ट का फैसला आना बाकी है। यदि उसे भी राहत मिलती है, तो यह जांच एजेंसियों के लिए बड़ा झटका होगा। वहीं अभियोजन पक्ष के सामने अब यह चुनौती है कि ट्रायल के दौरान ठोस साक्ष्यों के आधार पर केस को मजबूत किया जाए, ताकि प्रक्रिया की खामियों का असर अंतिम फैसले पर न पड़े।
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