धार स्थित भोजशाला विवाद को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में शुक्रवार को भी सुनवाई जारी रही। …और पढ़ें
HighLights
- आंशिक विवाद पर केंद्रित बहस
- सौहार्द बनाए रखने पर जोर
- एएसआई को रिपोर्ट पेश करनी होगी
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। धार स्थित भोजशाला विवाद को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में शुक्रवार को भी सुनवाई जारी रही। याचिकाकर्ता अंतरसिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एके चितले ने अपने तर्क रखे, जो अधूरे रह गए। अब वे शनिवार को अपनी बहस पूरी करेंगे, जिसके बाद इंटरविनरों और फिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) का पक्ष सुना जाएगा।
पूरी भोजशाला विवादित नहीं
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता चितले ने दलील दी कि पूरी भोजशाला विवादित नहीं है, बल्कि उसका केवल एक हिस्सा ही विवाद का केंद्र है। उन्होंने कहा कि एएसआई के आदेश के बाद यहां मंगलवार को पूजन और शुक्रवार को नमाज होती है, जिससे सामान्य स्थिति में कोई समस्या नहीं होती। विवाद तब उत्पन्न होता है, जब बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ते हैं, जिससे धार्मिक संतुलन प्रभावित होता है।
कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की
इस पर कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत के संविधान की खूबसूरती ही यही है कि यह सभी धर्मों को समान सम्मान देता है। यही देश की धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था की पहचान है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका में उठाए गए सौहार्द और कानून व्यवस्था बनाए रखने के मुद्दे महत्वपूर्ण हैं और न्यायालय भी यही चाहता है कि शांति बनी रहे। अदालत ने याचिकाकर्ता को अपने सभी तर्क विस्तार से रखने का अवसर देने की बात कही।
वकील से भी अपने तर्क तैयार रखने को कहा
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एएसआई के वकील से भी अपने तर्क तैयार रखने को कहा। एएसआई की ओर से पैरवी कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन ने निवेदन किया कि वे सभी पक्षों की बहस के बाद अपना पक्ष रखना चाहेंगे। इस पर कोर्ट ने कहा कि चूंकि एएसआई ने सर्वे किया है, इसलिए उसकी रिपोर्ट और निष्कर्ष जानना जरूरी है।
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