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मजदूरों को किसान बनाकर हजारों क्विंटल धान खरीदा, बिना मिलिंग किए डिंडौरी से भेजा महाराष्ट्र

नईदुनिया प्रतिनिधि, डिंडौरी। आदिवासी बहुल जिले डिंडौरी में धान खरीदी से लेकर महाराष्ट्र तक पहुंचाने में बड़ा खेल सामने आ रहा है। जांच आगे बढ़ने पर मनमानी की पोल परत दर परत खुल रही है।

महाराष्ट्र भेजने के गंभीर आरोप

आरोप है कि मजदूरों को कागजों में किसान बनाकर हजारों क्विंटल धान की खरीदी दर्शाई गई है। लाखों क्विंटल सरकारी धान बिना मिलिंग किए महाराष्ट्र भेजने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

मनमानी पूर्वक जारी धान अनुज्ञप्ति की जांच

कांग्रेस सूचना का अधिकार प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष ने जिले से जुडा पूरा मामला अब खाद्य मंत्री तक पहुंचा दिया है। इससे पहले जयस और भारतीय किसान संघ ने भी इस मुद्दे पर मोर्चा खोल दिया है। कलेक्टर के निर्देश पर गोरखपुर मंडी से मनमानी पूर्वक जारी धान अनुज्ञप्ति की जांच तेजी से चल रही है।

कलेक्टर पूरी जांच की स्वयं मानीटिरिंग कर रहीं

संयुक्त कलेक्टर भारती मेरावी की अगुवाई में अधिकारी गांव गांव पहुंचकर संबंधित तथाकथित किसानों के बयान दर्ज कर रहे हैं, जिनसे कागजों में 10 से 20 हजार क्विंटल तक धान खरीदी दिखाया गया है। बयान में बडा फर्जीवाडा सामने आ रहा है। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया इस पूरी जांच की स्वयं मानीटिरिंग कर रही हैं।

जानकारी बनाने में जुटे रहे जिम्मेदार

इस मामले की आंच अब भोपाल तक पहुंचने के बाद वहीं से जिले के सभी राइस मिलरों के बिजली बिल तलब किए गए हैं, ताकि मिलिंग की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके। देर रात तक निर्धारित फार्मेट में बिजली बिल की जानकारी भेजने में नान विभाग के अधिकारी जुटे रहे।

ग्रामीणों के पास दो-चार एकड़ ही जमीन

गौरतलब है कि कृषि उपज मंडी गोरखपुर से जारी महाराष्ट्र तक धान परिवहन की अनुज्ञप्तियों में भारी विसंगतियां मिल रहीं हैं। एक-एक तथाकथित किसान के नाम पर हजारों क्विंटल धान खरीदी दिखाई गई है, जबकि उसके पास दो-चार एकड़ ही जमीन है।

विक्रेता बने ग्रामीण ही मनमानी उजागर कर रहे

छोटे-छोटे रकबों पर असामान्य रूप से बड़ी मात्रा में धान उत्पादन और विक्रय दिखाया गया है। जांच में सामने आ रहा है कि तथाकथित कागजों में धान विक्रेता बने ग्रामीण ही अब मनमानी उजागर कर रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने कहा है कि उन्होंने इतना धान बेचा ही नहीं, उनके नाम का इस्तेमाल किया गया है।

पौष्टिक धान भेजी जा रही महाराष्ट्र

आरोप है कि जिले का अच्छा और पौष्टिक धान बिना मिलिंग किए ही मंडियों से मनमानी पूर्वक साठगांठ कर अनुज्ञप्ति बनवाकर सीधे महाराष्ट्र मुरमुरा फैक्टरी भेज दिया गया। जबकि बदले में जिले के गोदामों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए अन्य राज्यों से खराब और सड़ा चावल खपाया गया।

मिलिंग क्षमता का मिलान कर रहा जांच दल

जांच दल मंडी के रिकॉर्ड, अनुज्ञप्ति, परिवहन दस्तावेज और मिलरों की मिलिंग क्षमता का मिलान कर रहा है। बिजली बिल तलब करने के पीछे मंशा यह है कि यदि मिल ने मिलिंग ही नहीं की, तो बिजली खपत भी कम होगी। इससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

डिंडौरी जिले में जो राइस मिल में मनमानी सामने आ रही है, उसको लेकर मैंने खाद्य मंत्री से मिलकर शिकायत रखी है। उनसे विस्तृत जांच कर कार्यवाही की मांग की गई है। मैंने मांग रखी है कि इसकी प्रदेश स्तरीय जांच कराई जाए और जो भी दोषी हैं, उन पर कार्यवाही हो।

पुनीत टंडन, प्रदेश अध्यक्ष सूचना का अधिकार प्रकोष्ठ कांग्रेस।

डिंडौरी जिले में बिना मिलिंग किए जो मनमानी पूर्वक मंडियो से अनुज्ञप्ति बनवाकर धान महाराष्ट्र भेजने का मामला सामने आया है, यह निश्चित ही गंभीर मुद्दा है। जिले में पौष्टिक धान होती है। इस मामले की जल्द जांच पूरी कर आवश्यक कदम उठाए जाने की आवश्यता है ताकि आगे इस तरह की स्थिति न हो।

सम्यक जैन, अधिवक्ता डिंडौरी।

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