जांच के दौरान पुलिस को टेकरी और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज से महत्वपूर्ण सुराग मिले थे। फुटेज में आरोपित अविनाश के साथ बालिका और उसकी रिश्तेदा …और पढ़ें
HighLights
- जांच के दौरान पुलिस को टेकरी, आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज से महत्वपूर्ण सुराग मिले थे।
- फुटेज में आरोपी अविनाश के साथ बालिका और उसकी रिश्तेदार को टेकरी की ओर जाते देखा गया था।
- लौटते समय बालिका उनके साथ नहीं थी। यह तथ्य जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हुआ।
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। राजधानी भोपाल को वर्ष 2019 में झकझोर देने वाले बहुचर्चित मनुआभान टेकरी दुष्कर्म एवं हत्या कांड में आखिरकार सात वर्ष बाद न्याय का महत्वपूर्ण अध्याय लिखा गया। विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल के न्यायालय ने मामले के दोनों आरोपित अविनाश साहू एवं जस्टिन को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास तथा 4-4 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय के इस फैसले को महिलाओं और बालिकाओं के विरुद्ध होने वाले जघन्य अपराधों के खिलाफ एक सशक्त संदेश माना जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि 30 अप्रैल 2019 को 12 वर्षीय बालिका अपनी एक रिश्तेदार और उसके परिचित के साथ मनुआभान टेकरी घूमने गई थी। इसी दौरान आरोपितों ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया और अपराध उजागर होने के भय से उसकी पत्थर से सिर कुचलकर निर्मम हत्या कर दी।
इसके बाद शव को टेकरी की खाई में फेंककर छिपाने का प्रयास किया गया। इस घटना ने न केवल भोपाल बल्कि पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया था। घटना वाले दिन शाम को बालिका के लापता होने की सूचना मिलने पर स्वजन और पुलिस उसकी तलाश में जुट गए थे।
कोहेफिजा थाना पुलिस ने रातभर मनुआभान टेकरी और आसपास के क्षेत्र में सर्च अभियान चलाया। पूछताछ और जांच के दौरान मिले सुरागों के आधार पर पुलिस आरोपितों तक पहुंची। बाद में झाड़ियों के बीच करीब 100 फीट गहरी खाई में बालिका का रक्तरंजित शव बरामद हुआ। शव की स्थिति देखकर हर कोई सन्न रह गया था।
सीसीटीवी फुटेज बने महत्वपूर्ण साक्ष्य
जांच के दौरान पुलिस को टेकरी और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज से महत्वपूर्ण सुराग मिले थे। फुटेज में आरोपित अविनाश के साथ बालिका और उसकी रिश्तेदार को टेकरी की ओर जाते देखा गया था, जबकि लौटते समय बालिका उनके साथ नहीं थी। यह तथ्य जांच की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ।
डीएनए रिपोर्ट को लेकर उठा था विवाद
मामले की जांच के दौरान डीएनए रिपोर्ट को लेकर भी विवाद सामने आया था। बालिका के पिता ने जांच में लापरवाही के आरोप लगाए थे और मामले की निष्पक्ष जांच के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआइ जांच की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने जांच सीबीआइ को सौंपने की सहमति दी थी। इसके बाद प्रकरण की गहन जांच की गई और वैज्ञानिक साक्ष्यों को संकलित कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
अभियोजन ने रखे मजबूत साक्ष्य
प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक दिव्या शुक्ला ने प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष वैज्ञानिक साक्ष्य, डीएनए रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान एवं अन्य परिस्थितिजन्य प्रमाण प्रस्तुत किए। अभियोजन ने यह स्थापित किया कि दोनों आरोपितों ने सामूहिक रूप से अपराध को अंजाम दिया और बाद में साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। अभियोजन की दलीलों और प्रस्तुत साक्ष्यों से संतुष्ट होकर न्यायालय ने दोनों आरोपितों को दोषसिद्ध ठहराया।
समाज के लिए नजीर बना फैसला
- न्यायालय का यह फैसला केवल एक परिवार को न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में महिलाओं और बालिकाओं के विरुद्ध अपराध करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश भी है।
- यह निर्णय दर्शाता है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के शिकंजे से बच नहीं सकता।
- न्याय मिलने में समय अवश्य लग सकता है, लेकिन न्यायिक व्यवस्था अंततः पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
- सात वर्ष के लंबे इंतजार के बाद आया यह फैसला पीड़िता की स्मृति को श्रद्धांजलि के समान माना जा रहा है।
- साथ ही यह निर्णय उन लोगों के लिए भी चेतावनी है जो महिलाओं और मासूम बच्चियों को अपना आसान शिकार समझते हैं।
- न्यायालय द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा समाज में कानून के प्रति विश्वास को और अधिक मजबूत करने वाली मानी जा रही है।
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