नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: मानसून की वर्षा के साथ हरियाली लौट आई है और लोग भी घरों से निकलकर प्रकृति के करीब समय बिताना पसंद कर रहे हैं। इंदौर में पिछले कुछ वर्षों से इसी मौसम में एक नया ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। शहर के कई योग ग्रुप अब नदी किनारे, पहाड़ियों, जंगलों और प्राकृतिक स्थलों पर तीन से पांच दिन के योग कैंप आयोजित कर रहे हैं। इन कैंपों में सुबह खुले वातावरण में योग और प्राणायाम कराया जाता है, जबकि दिनभर प्रकृति से जुड़ी कई गतिविधियां होती हैं।
इंदौर में योग का अभ्यास अधिकतर पार्क, स्टूडियो या सामुदायिक भवनों में किया जाता है, लेकिन अब मानसून के दौरान प्राकृतिक स्थानों पर योग करने का चलन तेजी से बढ़ा है। इन दिनों विशेष मानसून योग कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें सुबह सूर्योदय के समय योग, ध्यान और प्राणायाम कराया जाता है। कैंप का उद्देश्य सिर्फ योग सिखाना नहीं, बल्कि लोगों को कुछ दिन मोबाइल और भागदौड़ से दूर रखकर प्रकृति के बीच समय बिताने का अवसर देना भी है।
आसपास के प्राकृतिक स्थान बन रहे पहली पसंद
योग प्रशिक्षक अंकुर चव्हाण के अनुसार, योग ग्रुप इंदौर और आसपास के कई प्राकृतिक स्थानों का चयन कर रहे हैं। इनमें जानापाव, तिंछा फाल्स के आसपास का क्षेत्र, चोरल, पातालपानी, महू के आसपास की पहाड़ियां, नर्मदा किनारे के कुछ सुरक्षित स्थान और हरियाली वाले फार्म हाउस शामिल हैं। आयोजक ऐसे स्थान चुनते हैं जहां शोर कम हो, साफ वातावरण हो और समूह के लिए सुरक्षित व्यवस्था उपलब्ध हो।
तीन से पांच दिन के कैंप में कैसा रहता है कार्यक्रम
अधिकांश कैंप तीन, चार या पांच दिन के होते हैं। दिन की शुरुआत सुबह पांच या छह बजे होती है। सबसे पहले हल्की वाक कराई जाती है, इसके बाद सूर्य नमस्कार, योगासन, प्राणायाम और ध्यान कराया जाता है। नाश्ते के बाद प्रतिभागियों को प्राकृतिक भ्रमण, पक्षियों की पहचान, पेड़-पौधों की जानकारी और समूह गतिविधियों में शामिल किया जाता है। शाम को फिर हल्का योग, मेडिटेशन और तनाव कम करने वाले अभ्यास कराए जाते हैं। रात में कई कैंपों में संगीत, लोकगीत, तारों का अवलोकन और समूह चर्चा जैसी गतिविधियां भी होती हैं।
योग विशेषज्ञों का क्या कहना है
योग प्रशिक्षक रीना शर्मा बताती हैं कि मानसून में वातावरण में नमी रहती है और तापमान भी अपेक्षाकृत कम होता है। ऐसे में शरीर अधिक सहज महसूस करता है और कई लोगों को योगासन करने में सुविधा मिलती है। खुले वातावरण में गहरी सांस लेने से मानसिक शांति भी मिलती है। साथ ही प्रकृति के बीच योग करने से व्यक्ति का ध्यान अधिक समय तक एकाग्र रहता है।
योग विशेषज्ञ संजय पाटीदार के अनुसार, जब आसपास हरियाली, पक्षियों की आवाज और स्वच्छ हवा होती है तो तनाव कम महसूस होता है। उनका कहना है कि योग और प्रकृति का संबंध बहुत पुराना है। पहले भी ऋषि-मुनि जंगलों और प्राकृतिक स्थानों पर ही साधना और योगाभ्यास करते थे।
ये गतिविधियां भी की जा रही हैं
- नेचर वॉक और ट्रेकिंग
- रिवर साइड मेडिटेशन
- साइलेंट मेडिटेशन सेशन
- बर्ड वाचिंग
- मिट्टी और पौधों की पहचान
- समूह खेल और टीम एक्टिविटी
- डिजिटल डिटाक्स एक्टिविटी
कितना आता है खर्च
योग कैंप में भोजन, ट्रांसपोर्ट और ट्रेकिंग जैसी सुविधाएं शामिल होती है। इसमें रहने की व्यवस्था, सात्विक भोजन, योग प्रशिक्षण, ट्रेकिंग गाइड और प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा शामिल रहती है। तीन दिन का कैंप 3500 से 7000 रुपये तक होता है। वहीं, पांच दिन का कैंप सात से 10 हजार रुपये तक रहता है। सुविधाएं बढ़ने के साथ राशि भी बढ़ती जाती है। इस दौरान प्रतिभागियों को सात्विक भोजन करवाया जाता है। प्रतिभागियों को हल्का और पौष्टिक भोजन दिया जाता है। इसमें दलिया, अंकुरित अनाज, मौसमी फल, दाल, हरी सब्जियां और पर्याप्त मात्रा में पानी शामिल रहता है।
क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड
फिटनेस विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार स्क्रीन पर समय बिताने और व्यस्त दिनचर्या के कारण लोग मानसिक थकान महसूस कर रहे हैं। ऐसे में प्रकृति के बीच कुछ दिन बिताने और योग करने का विकल्प लोगों को आकर्षित कर रहा है। इंटरनेट मीडिया पर इन कैंपों की तस्वीरें और वीडियो भी युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं। कई लोग हर साल मानसून में एक नया प्राकृतिक स्थान चुनकर योग कैंप में शामिल होने की योजना बनाते हैं। इसी वजह से इंदौर में मानसून योग कैंप अब एक नए लाइफस्टाइल ट्रेंड के रूप में तेजी से पहचान बना रहे हैं।
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