सूर्यपुत्र शनिदेव की जयंती भगवान शनि के प्रिय दिन शनिवार को 16 मई के दिन रेवती नक्षत्र के संयोग में मनाई जाएगी। इस अवसर पर मंदिरों में आज से उत्सवी उल …और पढ़ें
HighLights
- शनि जयंती पर शनिश्चरी अमावस्या का दुर्लभ संयोग
- इंदौर के मंदिरों में गूंजेंगे महामंत्र; होंगे भव्य आयोजन
- इंदौर के प्रमुख मंदिरों में विशेष आयोजन
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सूर्यपुत्र शनिदेव की जयंती भगवान शनि के प्रिय दिन शनिवार को 16 मई के दिन रेवती नक्षत्र के संयोग में मनाई जाएगी। इस अवसर पर मंदिरों में आज से उत्सवी उल्लास छाएगा, जहाँ यज्ञ-अनुष्ठानों के साथ कई आयोजन होंगे। दर्शन-पूजन के लिए लंबी कतारें लगेंगी और तेल-तिल के साथ पवित्र नदियों के जल से अभिषेक किया जाएगा।
ज्योतिर्विद् विनायक चतुर्वेदी ने बताया कि ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 5.11 बजे से शुरू होगी। उदयातिथि में अमावस्या होने से इसी दिन एक मत से शनि जयंती मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि शनिवार को आने से शनिश्चरी अमावस्या का संयोग भी बन रहा है। इसके चलते स्नान-दान और पूजन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु नर्मदा-शिप्रा नदी जाएंगे।
इंदौर के प्रमुख मंदिरों में विशेष आयोजन
जूनी इंदौर स्थित प्राचीन शनि मंदिर में 85 वर्ष से चली आ रही परंपरानुसार नमक-चमक से महारुद्राभिषेक होगा। यहाँ अभिषेक सुबह 5.30 बजे, मंगला आरती 8 बजे और जन्म आरती दोपहर 12 बजे की जाएगी।
उषा नगर स्थित गजासीन शनिधाम में महामंडलेश्वर डॉ. दादू महाराज के सान्निध्य में सुबह 5 बजे विभिन्न तेलों और पवित्र नदियों के जल से अभिषेक होगा। यहाँ सुबह 8 से 12 बजे तक पंचकुण्डी यज्ञ और शाम 6 बजे से सामूहिक सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया जाएगा।
सुंदरकांड और महाप्रसादी के कार्यक्रम
जिंसी चौराहा स्थित मंशापूर्ण शनि मंदिर पर गुरुवार शाम 7 बजे से फूल बंगला श्रृंगारित किया जाएगा। 15 मई को देवी अहिल्या वि.वि. कर्मचारी रामायण मंडल द्वारा सुंदरकांड पाठ होगा, वहीं 16 मई को छप्पन भोग और महाआरती होगी। बाल स्वरूप शनिदेव मंदिर व्यासफल में 14 से 24 मई तक 11 दिनी आयोजन होंगे। 16 मई को महायज्ञ और 24 मई को समापन पर छप्पन भोग एवं महाप्रसादी का वितरण औदुम्बर ब्राह्मण समाज की धर्मशाला में किया जाएगा।
चांदी की गदा-तलवार होगी भेंट
जवाहर मार्ग स्थित प्राचीन शनिदेव मंदिर के पुजारी कान्हा जोशी के अनुसार, जयंती पर नवग्रह शांति पूजन होगा। इस अवसर पर भगवान को चांदी की गदा और तलवार भेंट कर श्रृंगार किया जाएगा। साथ ही छप्पन भोग भी लगाया जाएगा। जयंती के अगले दिन 17 मई को शाम 7 बजे से भंडारा आयोजित होगा। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस दिन चंद्रमा राशि परिवर्तन कर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे शनिश्चरी अमावस्या पर शनिदेव की पूजा विशेष फलदायी होगी।
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