कोर्ट ने तट से 100 मीटर के दायरे में होने वाले निर्माण को तो इजाजत के योग्य माना, लेकिन 100 से 200 मीटर के निर्माण के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट बुलवाई …और पढ़ें
HighLights
- शिप्रा नदी के आसपास व्यावसायिक गतिविधि स्वीकार नहीं की जा सकती।
- कोर्ट ने नदी के 100 से 200 मीटर दायरे में रिसार्ट निर्माण पर रोक लगाई।
- हाई कोर्ट में जनहित याचिका उज्जैन निवासी सत्यनारायण ने दायर की है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ के लिए शिप्रा नदी के आसपास किए जा रहे निर्माण को लेकर हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। शिप्रा नदी के 200 मीटर क्षेत्र में अवैध निर्माण को लेकर प्रस्तुत जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि शिप्रा नदी के आसपास किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि स्वीकार नहीं की जा सकती। कोर्ट ने नदी के 100 से 200 मीटर दायरे में प्रस्तावित रिसार्ट निर्माण पर रोक लगा दी है।
हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका उज्जैन निवासी सत्यनारायण ने दायर की है। याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पूर्व में नगर निगम और राज्य शासन को आदेश दिए थे कि शिप्रा नदी के 200 मीटर क्षेत्र में हो रहे अवैध और अनाधिकृत निर्माण पर कार्रवाई कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
याचिकाकर्ता का कहना है कि मास्टर प्लान के प्रविधानों को दरकिनार करते हुए अतिक्रमण हो रहे हैं, नदी के आसपास बड़े पैमाने पर निर्माण भी हो रहे हैं। पिछली सुनवाई पर शासन ने कोर्ट को बताया था कि कुछ अवैध निर्माण हटा दिए हैं कुछ को नोटिस जारी किए हैं।
जहां तक निगम सीमा में कार्रवाई का बात है यह जिम्मेदारी उज्जैन नगर निगम की है। मंगलवार को सुनवाई में उज्जैन नगर निगम ने कोर्ट में रिपोर्ट पेश की। कहा कि शिप्रा नदी के 200 मीटर क्षेत्र में किए गए अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई जारी है।
सुनवाई के दौरान मेले को ध्यान में रखते हुए बनाए गए रिवर फंड डेवलपमेंट योजना का उल्लेख भी हुआ। बताया गया कि इसके अंतर्गत शिप्रा नदी तट के विकास की योजना है। नदी से 100 मीटर क्षेत्र में घाट विकास, सुंदरीकरण और जल संरक्षण जैसे कार्य किए जाने प्रस्तावित हैं।
100 से 200 मीटर के दायरे में आश्रम, मठ, प्रवचन हाल, धर्मशालाओं और रिसोर्ट जैसी गतिविधियां संचालित की जाएंगी। कोर्ट ने तट से 100 मीटर के दायरे में होने वाले निर्माण को तो इजाजत के योग्य माना, लेकिन 100 से 200 मीटर के निर्माण के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट बुलवाई है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नदी किनारे रिसार्ट के निर्माण को स्वीकार करने में कोर्ट असमर्थ है। रिसोर्ट जैसे व्यावसायिक निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई तक 100 से 200 मीटर क्षेत्र में किसी भी प्रकार के रिसार्ट या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी।
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