देश के कई हिस्सों में उनके द्वारा बनवाए कुएं, बावड़ी, घाट और धर्मशालाएं उनकी दूरदर्शिता दर्शाते हैं। इसीलिए उन्हें लोकमाता कहा जाता है। उनके द्वारा जा …और पढ़ें
HighLights
- देवी अहिल्याबाई होल्कर को एक शासिका नहीं बल्कि प्रजापालक माता के रूप में जाना जाता है
- देश के कई हिस्सों में उनके द्वारा बनवाए कुएं, बावड़ी, घाट और धर्मशालाएं उनकी दूरदर्शिता दर्शाते हैं
- यही कारण है कि उन्हें लोकमाता कहा जाता है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर को एक शासिका नहीं बल्कि प्रजापालक माता के रूप में जाना जाता है। उनके कार्य न सिर्फ मालवा की धरती पर उनके शासनकाल की विशेषताओं की बानगी प्रस्तुत करते हैं, बल्कि देश के कई हिस्सों में उनके द्वारा बनवाए कुएं, बावड़ी, घाट और धर्मशालाएं उनकी दूरदर्शिता दर्शाते हैं। यही कारण है कि उन्हें लोकमाता कहा जाता है। शताब्दियों बाद भी न सिर्फ उनके निर्माण स्थल सुरक्षित हैं, बल्कि उनके द्वारा जारी सिक्के और पत्र भी संरक्षित रखे गए हैं।
कांस्य धातु के काइन डाई का संग्रह
इंदौर की राजमाता देवी अहिल्याबाई होलकर द्वारा जारी किए गए पुराने सिक्कों का संग्रह इंदौर में मौजूद है। यह खास संग्रह नीशांत पारिक के पास मौजूद है, जिसमें चांदी और तांबे के कई दुर्लभ सिक्के शामिल हैं। इन सिक्कों के साथ एक कांस्य धातु का काइन डाई भी है, जिसका इस्तेमाल उस समय सिक्के ढालने के लिए किया जाता था। डाई के एक हिस्से पर शिवलिंग और बेलपत्र की आकृति बनी हुई है।
संग्रह में राजमाता अहिल्याबाई होलकर के समय के 1 रुपया और आधा रुपया चांदी के सिक्के शामिल हैं। दोनों सिक्कों पर 1203 हिजरी वर्ष लिखा हुआ है, जो 1788 ईस्वी के बराबर माना जाता है। एक रुपये के सिक्के का वजन करीब 11.21 ग्राम है, जबकि आधे रुपये का वजन करीब 5.5 ग्राम बताया गया है।
नीशांत पारिक ने बताया कि उनके संग्रह में माल्हारनगर टकसाल से जारी चांदी के कई सिक्के भी हैं। इनमें 1193 हिजरी यानी 1779 ईस्वी का एक खास रुपया शामिल है। इस सिक्के पर फारसी भाषा में एक अतिरिक्त शब्द “वाला” लिखा हुआ है। खास बात यह है कि आज तक इस शब्द को लेकर कोई पक्का दस्तावेज सामने नहीं आया है, जिससे यह पता चल सके कि इसे सिक्के पर क्यों लिखा गया था। संग्रह में 1200 हिजरी यानी 1785 ईस्वी और 1186 हिजरी यानी 1772 ईस्वी के चांदी के रुपये भी शामिल हैं। इन सिक्कों पर उस समय की कारीगरी और डिजाइन साफ दिखाई देती है।
केंद्रीय संग्रहालय में संरक्षित सिक्के
देवी अहिल्या बाई होलकर के शासन काल में तांबे व चांदी के सिक्कें प्रचलन में थे। केंद्रीय संग्रहालय के क्यूरेटर आशुतोष महाशब्दे के अनुसार, संग्रहालय की मुद्रा वीथिका में 8 नग चांदी के सिक्के प्रदर्शित है, जिनका वजन लगभग 11 ग्राम और व्यास लगभग 20 मिमी है। अग्रभाग में उर्दू में शाह आलम 2 सिक्का मुबारक बादशाह गाजी लिखा है और पृष्ठभाग में पुष्प के साथ बालोस और सूर्य व चंद्र के साथ सना जुलुस लिखा है। सिक्कों की ढलाई मल्हार नगर टकसाल में की जाती थी, लेकिन संग्रहालय इंदौर में प्रदर्शित सिक्कों में टकसाल का नाम अंकित नहीं है। एक सिक्का अन्य सिक्कें में सूर्य व चंद्र के स्थान पर बिल्वपत्र एवं शिव लिंग का अंकन है, जो शिव के प्रति देवी की आस्था का प्रतीक है।
मल्हारी मार्तंड मंदिर में स्थित है ज्योतिर्लिंग
शिव भक्त लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने राजवाड़ा स्थित मल्हारी मार्तंड मंदिर में सभी ज्योतिर्लिंगों की स्थापना की थी। लोकमाता ने सभी दिशाओं में धार्मिक यात्राएं की इस दौरान उन्होंने 12 ज्योतिर्लिंगों के स्थान से पिंडियां लाकर स्थापित की। यह प्रदेश का इकलौता मंदिर है, जहां अहिल्यावाई ने 12 ज्योतिर्लिंग स्वयं स्थापित किए। उनके हाथों में नजर आने वाला शिवलिंग भी मंदिर में स्थापित है। बालू से निर्मित किए। इस शिवलिंग पर स्वर्ण परत है। इसका पूजन प्रतिदिन किया जाता है। साथ ही आज भी मंदिर में उनके शासनकाल में प्रचलित शिव ऑर्डर की मुहर रखी है।
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