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स्वच्छ सर्वेक्षण : जागें इंदौरी, थूकने और गंदगी से कट सकते हैं 200 अंक

स्वच्छ सर्वेक्षण : जागें इंदौरी, थूकने और गंदगी से कट सकते हैं 200 अंक

आठ बार देश का सबसे स्वच्छ शहर रह चुके इंदौर के सामने नौवां खिताब बचाने की चुनौती है। …और पढ़ें

Publish Date: Mon, 04 May 2026 09:42:23 AM (IST)Updated Date: Mon, 04 May 2026 09:54:05 AM (IST)

इंदौर की 56 दुकान का फाइल फोटो।

HighLights

  1. एक-एक धब्बा घटाएगा रैंकिंग, 200 अंकों पर संकट
  2. 6696 चालान, 36.5 लाख वसूली फिर भी नहीं बदली आदत
  3. सुपर स्वच्छ लीग में इंदौर, व्यवहार परिवर्तन ही सहारा

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। आठ बार देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीतने वाले इंदौर के लिए यह वक्त आत्मचिंतन का है। स्वच्छ सर्वेक्षण का दल इसी महीने शहर का मुआयना करने आ सकता है और ठीक इसी समय शहर के नए पुते डिवाइडरों पर गुटखे और तंबाकू की पीक के लाल निशान नजर आ रहे हैं।

यह तस्वीर सिर्फ दिखावट की नहीं, अंकों की भी लड़ाई है, क्योंकि इस बार सर्वेक्षण में खुले में थूकने पर सौ और खुले में पेशाब करने पर सौ, यानी कुल दो सौ अंक काटे जाने का प्रविधान है। स्वच्छ सर्वेक्षण के मानकों के अनुसार, शहरों में ‘खुले स्थान पर मूत्र’ (पीले धब्बे) और ‘खुले स्थान पर थूक’ (लाल धब्बे) से संबंधित मानकों पर शहरों का मूल्यांकन किया जाता है।

इस बार प्रत्येक रेड स्पाट पर सौ और येलो स्पाट पर सौ अंक की कटौती का प्रविधान है। यानी सार्वजनिक स्थलों पर मिलने वाला एक-एक धब्बा शहर की रैंकिंग पर सीधा असर डालेगा।

निगम कर रहा है कार्रवाई, पर आदत नहीं बदल रही

नगर निगम सख्ती तो बरत रहा है। पिछले एक माह में निगम ने स्वच्छता नियमों के उल्लंघन पर 6696 चालान जारी कर 36,50,000 रुपये की वसूली की। इनमें सड़क पर थूकने पर 1304 चालान जारी कर 1,76,000 रुपये वसूल किए गए, जबकि खुले में पेशाब करने वाले 95 लोगों से 10,650 रुपये जुर्माना लिया गया।

बावजूद इसके थूकने और खुले में पेशाब करने की प्रवृत्ति थमने का नाम नहीं ले रही। निगमायुक्त के निर्देशानुसार नगर निगम द्वारा शहर में स्वच्छता बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कार्रवाई लगातार जारी है, लेकिन जब तक नागरिक खुद जिम्मेदारी नहीं उठाएंगे, केवल जुर्माने से बात नहीं बनेगी।

एक माह की कार्रवाई

  • 6696 चालान बनाए स्वच्छता नियमों के उल्लंघन पर
  • 36,50,000 रुपये की वसूली की
  • 1304 चालान बनाए सड़क पर थूकने के
  • 1,76,000 रुपये वसूल किए
  • 95 लोगों से 10,650 रुपये लिया जुर्माना खुले में पेशाब करने पर

आठ बार का सफर, अब नौवें की चुनौती

इंदौर लगातार आठ वर्षों से स्वच्छता में नंबर एक रहा है और उसे सुपर स्वच्छ लीग में रखा गया है। इस बार 10वें संस्करण में शहर को अपनी प्रतिष्ठा बचाने के साथ-साथ उन नए मापदंडों पर भी खरा उतरना है, जो व्यवहार परिवर्तन को सीधे अंकों से जोड़ते हैं। ऐसे में गुटखा-तंबाकू खाकर सड़क पर थूकने की पुरानी आदत अब शहर की रैंकिंग की दुश्मन बन चुकी है।

नागरिक जागरूकता ही असली हथियार

  • स्वच्छता की असली लड़ाई झाड़ू से नहीं, मानसिकता से जीती जाती है। जब तक हर नागरिक यह नहीं मान लेता कि डिवाइडर, दीवार या गली की नाली थूकने की जगह नहीं है, तब तक सफाईकर्मियों और निगम के प्रयास अधूरे ही रहेंगे।
  • शहर का गौरव केवल पुरस्कार समारोह में नहीं, हर उस क्षण बनता है जब कोई नागरिक थूकने के लिए डस्टबिन खोजता है।
  • क्या करें नागरिक
  • सार्वजनिक स्थल पर थूकने से बचें। शौचालय का उपयोग करें, खुले में पेशाब न करें।
  • गुटखा-तंबाकू का सेवन करते हैं तो पीक थूकने से पहले उचित स्थान खोजें। बच्चों और परिवार को भी यह संस्कार दें। यदि कोई नियम तोड़ता दिखे तो विनम्रता से टोकें।
  • सर्वेक्षण की टीम कभी भी, कहीं भी आ सकती है। इंदौर का ताज बचाना है तो हर नागरिक को खुद से शुरुआत करनी होगी, क्योंकि इस बार एक थूक भारी पड़ सकती है।

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