पुलिस ने उसे अवैध तरीके से कब्जे में रखा है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में युवती ने कहा कि वह याचिकाकर्ता युवक के साथ जाना चाहती है। कोर्ट ने देखा कि युव …और पढ़ें
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शुक्रवार को हाई कोर्ट में एक अजीब मामला सुनवाई के लिए पहुंचा। याचिका 20 वर्षीय युवक ने दायर की थी। उसका कहना था कि उसकी पत्नी को अवैध रूप से रखा गया है। उसे छुड़ाया जाए। कोर्ट के आदेश पर पत्नी को कोर्ट में लाया गया। वह तो बालिग थी, पति की आयु विवाह के योग्य नहीं थी।
इस पर कोर्ट ने युवती को अपनी मर्जी से रहने की अनुमति तो दे दी, लेकिन कहा कि चूंकि युवक की आयु विवाह योग्य नहीं है इसलिए उन्हें पति-पत्नी के रूप में रहने की अनुमति नहीं दे सकते।
रतलाम निवासी युवक-युवती ने परिवार की मर्जी के विरुद्ध जाकर विवाह किया था। पुलिस ने उन्हें तलाशा तो वे खाचरोद में मिले। जब पुलिस ने उन्हें पकड़ा उस वक्त युवती वयस्क हो चुकी थी।
युवती को उज्जैन के शेल्टर होम भेज दिया गया। इस पर युवक ने हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर दी। उसने कहा कि शेल्टर होम में रखी गई युवती उसकी पत्नी है।
पुलिस ने उसे अवैध तरीके से कब्जे में रखा है। शुक्रवार को हुई सुनवाई में युवती ने कहा कि वह याचिकाकर्ता युवक के साथ जाना चाहती है। कोर्ट ने देखा कि युवक की आयु सिर्फ 20 वर्ष है।
लेकिन कानूनन विवाह की न्यूनतम आयु पुरुष के लिए 21 वर्ष है ऐसे में कथित विवाह को मान्यता नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि युवती वयस्क है इसलिए उसे अपनी इच्छा अनुसार जीवन जीने और निवास चुनने का अधिकार है।
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