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15 जून को खत्म होगा अधिकमास, सिर्फ 36 दिन मिलेंगे शादी-विवाह के लिए

15 जून को खत्म होगा अधिकमास, सिर्फ 36 दिन मिलेंगे शादी-विवाह के लिए

15 जून को अधिकमास समाप्त होगा। 19 जून से विवाह और मांगलिक कार्य शुरू होंगे। 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास लग जाएगा। …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 12 Jun 2026 08:18:10 AM (IST)Updated Date: Fri, 12 Jun 2026 08:18:10 AM (IST)

15 जून को अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) समाप्त हो जाएगा। (एआई जनरेटेड फोटो)

HighLights

  1. 15 जून को अधिकमास समाप्त, मांगलिक कार्यों का मार्ग खुला।
  2. 19 जून से विवाह और शुभ मुहूर्तों की शुरुआत।
  3. बाजारों में बढ़ेगी खरीदारी, व्यापार को मिलेगा बड़ा लाभ।

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। 15 जून को अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों पर लगा विराम भी खत्म हो जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 19 जून से एक बार फिर शहनाइयों की गूंज सुनाई देने लगेगी। शुभ मांगलिक कार्यों का सिलसिला शुरू हो जाएगा।

इस वर्ष जून-जुलाई का विवाह सीजन छोटा रहेगा। अधिकमास समाप्त होने के केवल चार दिन बाद 19 जून को पहला प्रमुख शुभ मुहूर्त मिलेगा। इसके बाद 23 जून तक लगातार शुभ अवसर रहेंगे। इस दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नए व्यापार का शुभारंभ और अन्य मांगलिक कार्य बड़ी संख्या में होंगे।

व्यापार के नजरिए से भी यह अवधि काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सराफा बाजार, कपड़ा व्यापार, ऑटोमोबाइल सेक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रॉपर्टी कारोबार में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है। विवाह सीजन शुरू होने से बाजारों में खरीदारी बढ़ेगी। व्यावसायिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 19 जून से 12 जुलाई तक का समय शुभ एवं मांगलिक कार्यों के लिए विशेष रूप से अनुकूल रहेगा। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण और नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे कार्य किए जा सकेंगे।

हालांकि यह शुभ अवधि ज्यादा लंबी नहीं रहेगी। 25 जुलाई से देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास का आरंभ हो जाएगा। चातुर्मास शुरू होते ही अगले चार महीनों तक विवाह सहित अधिकांश मांगलिक कार्यों पर फिर से विराम लग जाएगा।

प्रमुख तिथियां

  • 15 जून – सोमवती अमावस्या और अधिकमास का समापन।
  • 16 जून – शुद्ध ज्येष्ठ मास का प्रारंभ।
  • 17 जून – रमा एकादशी व्रत।
  • 18 जून – चंपा द्वादशी।
  • 19 जून – विवाह और मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त प्रारंभ।
  • 23 जून – सूर्य रोहिणी नक्षत्र से बाहर।
  • 25 जुलाई – देवशयनी एकादशी, चातुर्मास प्रारंभ।
  • 27 जुलाई – प्रदोष व्रत।
  • 29 जुलाई – पूर्णिमा और ज्येष्ठ मास का समापन।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसलिए इस अवधि में विवाह और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। यही कारण है कि 19 जून से 25 जुलाई के बीच मिलने वाले शुभ मुहूर्तों को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

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