पीड़ित टीकाराम के मुताबिक कई महीनों तक पुलिस थाने की चौखट पर न्याय की गुहार लगाई, लेकिन हर बार उसे खाली हाथ लौटा दिया गया। सात महीने बाद 28 जुलाई 2026 को पुलिस ने केस दर्ज करने की औपचारिकता पूरी की है। अब सवाल यह उठता है कि इतने महीनों बाद पुलिस क्या जांच करेगी और चोरों का क्या सुराग लगाएगी? मधुसूदनगढ़ पुलिस की इस लेट-लतीफी ने पुलिस महकमे की साख पर बड़ा बट्टा लगा दिया है। इस मामले पर जब मधुसूदनगढ़ थाना प्रभारी गोपाल चौबे से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मेरे समय की घटना नहीं है, जो भी परिस्थितियां रहीं हों मैं कुछ नहीं कह पाऊंगा। मुझे महीनेभर पहले प्रभार मिला है, मेरे संज्ञान में आते ही मामला दर्ज किया गया है।
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