देशभर में चर्चित रहे सनसनीखेज केस में जिस तरह की लापरवाही जांच और दस्तावेजीकरण में हुई है उसे देखते हुए वकील भी कह रहे हैं कि इसका फायदा विचारण के दौर …और पढ़ें
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। राजा रघुवंशी केस की मुख्य आरोपित सोनम को सेशन कोर्ट से जमानत मिलने के बाद शिलांग पुलिस की जांच सवालों के घेरे में है। देशभर में चर्चित रहे सनसनीखेज केस में जिस तरह की लापरवाही जांच और दस्तावेजीकरण में हुई है उसे देखते हुए वकील भी कह रहे हैं कि इसका फायदा विचारण के दौरान भी आरोपित को मिलेगा। जांच के दौरान जो सुराग छोड़े गए हैं वे जांच एजेंसी की मंशा और कार्यप्रणाली दोनों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित केस में लचर जांच
नईदुनिया ने इस बारे में वकीलों से चर्चा की। उनका कहना है कि यह केस पूरी तरह से परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित है। छोटी सी चूक भी आरोपित को बड़ा लाभ पहुंचा सकती है। जिस तरह की तकनीकी खामियां सामने आ रही हैं उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच ही नहीं की। यह कहना है वकीलों का इस त्रुटि का मतलब है कि अभियोजन ने शुरू से ही गलत केस बनाया है। यह विशुद्ध रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर केस है। इस तरह की लापरवाही का फायदा आरोपित को मिलेगा। अब तक हत्या का उद्देश्य भी ही नहीं सिद्ध हुआ है। पहली नजर में ही लग रहा है कि पुलिस ने इस मामले में बहुत ही लचर जांच की है। इसका फायदा आरोपित को विचारण के दौरान भी मिलेगा। – एडवोकेट मनीष यादव (हाई कोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष)
तकनीकी गलतियों से बढ़ेगी अभियोजन की परेशानी
जांच के दौरान पुलिस द्वारा की गई लापरवाही का फायदा सीधे-सीधे आरोपितों को मिलता है। पुलिस ने मामले में जांच पूरी करने के बाद चालान पेश किया है तो परेशानी और बढ़ेगी। अगर पुलिस ने जांच पूरी करने के बजाय जांच आगे जारी रखने की गुहार लगाते हुए चालान पेश किया होगा तो सुधार की कुछ गुंजाइश रहेगी, लेकिन तकनीकी इन गलतियों को सही नहीं ठहराया जा सकता। कहीं न कहीं जांच एजेंसी की मंशा पर सवाल है। – एडवोकेट विवेक सिंह (वरिष्ठ अधिवक्ता हाई कोर्ट इंदौर)
अतिरिक्त साक्ष्यों और पूरक चालान की उम्मीद
पुलिस से इस तरह की लापरवाही की अपेक्षा नहीं की जा सकती। हत्या जैसे मामलों में अत्यंत सूक्ष्मता से जांच की आवश्यकता होती है। जो खामियां सामने आई हैं वह पुलिस की मंशा पर सवाल खड़े कर रही हैं। हालांकि चालान प्रस्तुत होने का मतलब यह बिलकुल नहीं है कि पुलिस को उसी अपराध में आगे जांच से रोका गया है। अगर पुलिस को इसी मामले में और कोई अतिरिक्त साक्ष्य मिलते हैं तो वह पूरक चालान के जरिए इसे कोर्ट के समक्ष ला सकती है। – अभिजीतसिंह राठौर, शासकीय अधिवक्ता इंदौर
Source link
#रज #रघवश #कस #सनम #क #जमनत #क #बद #शलग #पलस #क #जच #सवल #क #घर #म #वकल #न #जतई #आपतत



Post Comment