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NEET जैसी परीक्षा कराना कैसे बन गई सरकार के लिए चुनौती?
	
		
	समीरात्मज मिश्र

	NEET परीक्षा दोबारा कराने की घोषणा सरकार भले ही कर चुकी हो लेकिन इसके खिलाफ देश भर में छात्र और युवा प्रदर्शन कर रहे हैं। परीक्षा रद्द करने की वजह ये है कि प्रश्नपत्र लीक हो गए थे लेकिन संसदीय समिति के सामने परीक्षा कराने वाली एजेंसी एनटीए के जो बयान मीडिया में सामने आए हैं, उससे यह मामला और गरम हो गया है। समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से कई मीडिया संस्थानों ने लिखा है कि नीट पेपर लीक मामले में संसदीय समिति के सामने एनटीए के डीजी और चेयरमैन ने कहा है कि परीक्षा लीक नहीं हुई है।

	 

	एएनआई के मुताबिक, “NEET पेपर लीक विवाद को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह और एनटीए चेयरमैन प्रदीप कुमार जोशी 21 मई को संसद की समिति के सामने पेश हुए। सूत्रों के मुताबिक बैठक के दौरान NTA प्रमुख ने एजेंसी का बचाव करते हुए दावा किया कि पेपर NTA के सिस्टम से लीक नहीं हुए थे। जब संसदीय समिति ने अधिकारियों से सीधा सवाल किया कि इस लीक के लिए आखिर जिम्मेदार कौन हैं, तो NTA प्रमुख ने जवाब दिया कि वे इसका सटीक जवाब सीबीआई की जांच पूरी होने के बाद ही दे पाएंगे।”

	 

	एनटीए ही वह संस्था है, जो नीट और इस तरह की करीब 15 परीक्षाएं आयोजित करती है। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जानकारी लेने के लिए एनटीए के महानिदेशक और चेयरमैन को संसदीय समिति के सामने बुलाया गया था। नीट यूजी की परीक्षा इसी महीने तीन मई को हुई थी, लेकिन पेपर लीक होने के बाद 11 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। फिलहाल पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई कर रही है। दोबारा परीक्षा 21 जून को होगी।

	 

	मामले की जांच कर रही सीबीआई ने अब तक महाराष्ट्र और राजस्थान से कम से कम नौ लोगों को गिरफ्तार भी किया है जिसमें कुछ कोचिंग संस्थानों के मालिक और शिक्षक भी शामिल हैं।

	 

	राज्यों का विरोध

	नीट परीक्षा में हुई धांधली के चलते कई राज्य अब इस परीक्षा पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं, खासकर दक्षिण भारत के राज्य। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने तो बारहवीं की परीक्षा के अंकों के आधार पर ही प्रवेश का सुझाव दिया है, वहीं केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने तो इसे खत्म करने की ही मांग कर डाली है। जहां तक बारहवीं के अंकों के आधार पर मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश की बात है तो जानकारों का कहना है कि अलग-अलग राज्यों और केंद्रीय बोर्डों के अंकों में असमानता और अलग पैटर्न के कारण यह तरीका बहुत व्यावहारिक नहीं होगा। ऐसी दिक्कतों को दूर करने के लिए ही प्रवेश परीक्षा की शुरुआत हुई।

	 

	इधर, नीट परीक्षा दोबारा कराने की घोषणा करने के साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि अगले साल से यह परीक्षा ऑनलाइन कराई जाएगी जिसमें परीक्षा का मोड सीबीटी यानी कंप्यूटर बेस्ड टेस्टिंग होगा। लेकिन सवाल ये हैं कि क्या ऑनलाइन तरीका अपना कर ही परीक्षा पारदर्शी हो सकती है क्योंकि अभी भी कई परीक्षाएं ऑनलाइन होती हैं लेकिन उनमें भी धांधली की शिकायतें आती रहती हैं।

	 

	कब बनी एनटीए?

	साल 2017 से पहले देश में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई अखिल भारतीय स्तर पर प्रवेश परीक्षा आयोजित करता था जबकि अलग-अलग राज्यों के बोर्ड अपने मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए के लिए अलग प्रवेश परीक्षाएं कराते थे। कुछ विश्वविद्यालय भी अलग प्रवेश परीक्षा आयोजित करते थे।

	 

	लेकिन साल 2017 में उच्च शिक्षा के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा व्यवस्था में सख्ती, मानकीकरण और विश्वसनीयता लाने के मकसद से अखिल भारतीय स्तर पर NEET यानी 'नेशनल एलिजिबिलिटी कम इंट्रेंस टेस्ट' की व्यस्था शुरू हुई और इसे कराने की जिम्मेदारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए को दी गई। यह एजेंसी 15 से अधिक परीक्षाएं आयोजित कराती है।

	 

	लेकिन बनने के बाद से ही एनटीए लगातार विवादों में घिरी रही है। अभी दो साल पहले भी यूजीसी-नेट परीक्षा को लेकर सवाल उठे थे और पेपर लीक के आरोप लगे थे। उस वक्त भी पूरी परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। 2024 में भी नीट परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र लीक होने की खबरें सामने आई थीं। बिहार और गुजरात के गोधरा समेत कई केंद्रों पर पेपर बेचे जाने और नकल कराने के पुख्ता सबूत मिले, जिसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई।

	 

	कैसी मुश्किलें आ रही हैं?

	जानकारों का कहना है कि 22-23 लाख छात्रों की परीक्षा एक साथ कराना आसान नहीं है लेकिन यदि परीक्षा कराई जा रही है तो जिम्मेदारी भी होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय भी होनी चाहिए। दीपिका सिंघल दिल्ली की एक कोचिंग में नीट के छात्रों का मार्गदर्शन करती हैं और बॉटनी पढ़ाती हैं।

	 

	डीडब्ल्यू से बातचीत में वो कहती हैं, “इंजीनियरिंग की कई परीक्षाएं अब ऑनलाइन हो रही हैं। कई प्रतियोगी परीक्षाएं भी ऑनलाइन होती हैं। ऐसे में नीट भी ऑनलाइन हो तो कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ ऑनलाइन परीक्षा करा लेने भर से पारदर्शिता आ जाएगी। धांधली की गुंजाइश तब भी बनी रहेगी। इसलिए सबसे जरूरी है कि सिस्टम फुलप्रूफ होना चाहिए और गड़बड़ी होने पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।”

	 

	जेईई जैसी इंजीनियरिंग की परीक्षाएं भी अब ऑनलाइन होने लगी हैं और कई शिफ्टों में आयोजित होती हैं, जबकि नीट अब भी पारंपरिक तरीके से यानी ओएमआर शीट पर पेन से निशान लगाकर होती है। जानकारों का कहना है कि इसकी वजह से इतने सारे प्रश्नपत्रों को एक साथ देश भर के हजारों केंद्रों में पहुंचाना और उन्हें सुरक्षित रखना अपने आप में एक चुनौती है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि पेपर लीक की घटनाएं इन केंद्रों के बजाय दूसरी जगहों से हो रही हैं। जानकारों के मुताबिक परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र कड़े सुरक्षा वाले स्ट्रॉन्गरूम में रखे जाते हैं और परीक्षा से सिर्फ 45 मिनट पहले ही खुलते हैं।

	 

	ऑनलाइन परीक्षा की चुनौतियां

	हालांकि विशेषज्ञों की समिति पहले भी कंप्यूटर आधारित परीक्षा की सिफारिश कर चुकी है और अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने घोषणा भी कर दी है लेकिन जानकारों का मानना है कि फुल प्रूफ इसे भी नहीं कह सकते और सभी छात्रों के साथ न्याय कर पाना भी मुश्किल होगा।

	 

	शिक्षाविद और राइट टू एजूकेशन फोरम के संयोजक अनिल कुमार रॉय कहते हैं कि परीक्षा को ऑफलाइन से ऑनलाइन कर देना कुछ वैसा ही है जैसे चोट सिर में लगी हो तो पट्टी पैर में बांध देना। डीडब्ल्यू से बातचीत में अनिल कुमार रॉय कहते हैं, “⁠⁠ऑनलाइन एग्जाम डिजिटल असमानता को स्थापित करेगा। अधिकांश राज्यों में उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं के छात्र, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में कंप्यूटर-दक्ष नहीं होते हैं। वे परीक्षा के इस मोड में संपन्न परिवारों, निजी विद्यालयों और शहरी छात्रों से कंपीट नहीं कर पाएंगे। दूसरी बात ये कि ऑफलाइन मोड के लीकेज को पकड़ना आसान है, ऑनलाइन के लीकेज को आसानी से पकड़ा नहीं जा सकता है। इसलिए अब धांधली को लेकर शोर भी नहीं होगा।”

	 

	अनिल कुमार रॉय कहते हैं कि इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की परीक्षा एक साथ लेने का इंफ्रास्ट्रक्चर भी सरकार के पास नहीं है। इसलिए फिर वह प्राइवेट कंप्यूटर सेंटर को परीक्षा-केंद्र बनाएगी। ये निजी केंद्र सभी सुरक्षा उपायों से न तो लैस होते हैं और न ही यकीन के साथ कहा जा सकता है कि लाखों केंद्र ईमानदार हाथों में हैं।

	 

	भले ही इतने छात्रों की परीक्षा एक साथ ना ली जा सके लेकिन परीक्षा कई शिफ्ट में या कई दिनों तक हो सकती है, हालांकि इसमें भी कई चुनौतियां हैं। अनिल कुमार रॉय के मुताबिक, “⁠सारे शिफ्ट के क्वेश्चन सेट एक ही समान कठिन या सरल नहीं होंगे। इससे कठिन सेट वाले बच्चों के कंपीट करने का चांस कम हो जाएगा। यदि इससे बचने के लिए नॉर्मलाइजेशन भी किया जाता है तो अधिक अंक लाने वालों के अंक कम हो जाएंगे और कम अंक लाने वालों के बढ़ जाएंगे।”

	 

	धांधली की आशंका ज्यादा

	शिक्षाविद अनिल कुमार रॉय कहते हैं, “ऑनलाइन परीक्षा धांधली रोकने की गारंटी नहीं है। कई बार बड़ी ऑनलाइन परीक्षाएं हैक हो चुकी हैं। जेईई मेन्स 2021 में 'रिमोट एक्सेस' जालसाजों ने सुरक्षा प्रणालियों को पूरी तरह से बाईपास कर दिया था। एसएससी सीजीएल 2017 में स्क्रीनशॉट और सिंडिकेट स्कैम हुआ था। सीबीटी मोड में होने वाली इस परीक्षा में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसमें परीक्षा हॉल के अंदर से प्रश्नों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे, जबकि हॉल में मोबाइल ले जाना प्रतिबंधित था। सुप्रीम कोर्ट ने इस परीक्षा और सिस्टम को 'दागी' बताया था और परिणामों पर रोक लगा दी थी। जब पिछली परीक्षाओं में अनेक बार ऐसा हो चुका है तो अगली बार न होने की क्या गारंटी है।”

	 

	यही नहीं, सीबीटी यानी कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट मोड में और भी कई दिक्कतें हैं। चूंकि सरकारी केंद्रों की कमी के कारण छोटे और निजी 'आईटी केंद्रों' का उपयोग करना पड़ेगा जिसे फुलप्रूफ बनाना आसान नहीं होगा। सर्वर डाउन होने की समस्या अलग होगी। इसके अलावा बायोमेट्रिक सुरक्षा के बावजूद, हाई-टेक डमी कैंडिडेट्स का उपयोग ऐसी परीक्षाओं में आज भी एक चुनौती बनी हुई है। और सबसे बड़ी बात तो ये कि पूरे परीक्षा केंद्र को भी हैक कर लेना भी तकनीकी रूप से संभव है।

	 

	ऐसे में इन तमाम सवालों के जवाब ढूंढ़ने के बाद ही ऑनलाइन मोड में परीक्षा कराने का कोई फायदा हो सकता है, अन्यथा मौजूदा सिस्टम को ही सख्त निगरानी और जिम्मेदारी के साथ बेहतर किया जा सकता है।

NEET जैसी परीक्षा कराना कैसे बन गई सरकार के लिए चुनौती?

NEET जैसी परीक्षा कराना कैसे बन गई सरकार के लिए चुनौती?
	
		
	समीरात्मज मिश्र

	NEET परीक्षा दोबारा कराने की घोषणा सरकार भले ही कर चुकी हो लेकिन इसके खिलाफ देश भर में छात्र और युवा प्रदर्शन कर रहे हैं। परीक्षा रद्द करने की वजह ये है कि प्रश्नपत्र लीक हो गए थे लेकिन संसदीय समिति के सामने परीक्षा कराने वाली एजेंसी एनटीए के जो बयान मीडिया में सामने आए हैं, उससे यह मामला और गरम हो गया है। समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से कई मीडिया संस्थानों ने लिखा है कि नीट पेपर लीक मामले में संसदीय समिति के सामने एनटीए के डीजी और चेयरमैन ने कहा है कि परीक्षा लीक नहीं हुई है।

	 

	एएनआई के मुताबिक, “NEET पेपर लीक विवाद को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह और एनटीए चेयरमैन प्रदीप कुमार जोशी 21 मई को संसद की समिति के सामने पेश हुए। सूत्रों के मुताबिक बैठक के दौरान NTA प्रमुख ने एजेंसी का बचाव करते हुए दावा किया कि पेपर NTA के सिस्टम से लीक नहीं हुए थे। जब संसदीय समिति ने अधिकारियों से सीधा सवाल किया कि इस लीक के लिए आखिर जिम्मेदार कौन हैं, तो NTA प्रमुख ने जवाब दिया कि वे इसका सटीक जवाब सीबीआई की जांच पूरी होने के बाद ही दे पाएंगे।”

	 

	एनटीए ही वह संस्था है, जो नीट और इस तरह की करीब 15 परीक्षाएं आयोजित करती है। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जानकारी लेने के लिए एनटीए के महानिदेशक और चेयरमैन को संसदीय समिति के सामने बुलाया गया था। नीट यूजी की परीक्षा इसी महीने तीन मई को हुई थी, लेकिन पेपर लीक होने के बाद 11 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। फिलहाल पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई कर रही है। दोबारा परीक्षा 21 जून को होगी।

	 

	मामले की जांच कर रही सीबीआई ने अब तक महाराष्ट्र और राजस्थान से कम से कम नौ लोगों को गिरफ्तार भी किया है जिसमें कुछ कोचिंग संस्थानों के मालिक और शिक्षक भी शामिल हैं।

	 

	राज्यों का विरोध

	नीट परीक्षा में हुई धांधली के चलते कई राज्य अब इस परीक्षा पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं, खासकर दक्षिण भारत के राज्य। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने तो बारहवीं की परीक्षा के अंकों के आधार पर ही प्रवेश का सुझाव दिया है, वहीं केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने तो इसे खत्म करने की ही मांग कर डाली है। जहां तक बारहवीं के अंकों के आधार पर मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश की बात है तो जानकारों का कहना है कि अलग-अलग राज्यों और केंद्रीय बोर्डों के अंकों में असमानता और अलग पैटर्न के कारण यह तरीका बहुत व्यावहारिक नहीं होगा। ऐसी दिक्कतों को दूर करने के लिए ही प्रवेश परीक्षा की शुरुआत हुई।

	 

	इधर, नीट परीक्षा दोबारा कराने की घोषणा करने के साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि अगले साल से यह परीक्षा ऑनलाइन कराई जाएगी जिसमें परीक्षा का मोड सीबीटी यानी कंप्यूटर बेस्ड टेस्टिंग होगा। लेकिन सवाल ये हैं कि क्या ऑनलाइन तरीका अपना कर ही परीक्षा पारदर्शी हो सकती है क्योंकि अभी भी कई परीक्षाएं ऑनलाइन होती हैं लेकिन उनमें भी धांधली की शिकायतें आती रहती हैं।

	 

	कब बनी एनटीए?

	साल 2017 से पहले देश में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई अखिल भारतीय स्तर पर प्रवेश परीक्षा आयोजित करता था जबकि अलग-अलग राज्यों के बोर्ड अपने मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए के लिए अलग प्रवेश परीक्षाएं कराते थे। कुछ विश्वविद्यालय भी अलग प्रवेश परीक्षा आयोजित करते थे।

	 

	लेकिन साल 2017 में उच्च शिक्षा के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा व्यवस्था में सख्ती, मानकीकरण और विश्वसनीयता लाने के मकसद से अखिल भारतीय स्तर पर NEET यानी 'नेशनल एलिजिबिलिटी कम इंट्रेंस टेस्ट' की व्यस्था शुरू हुई और इसे कराने की जिम्मेदारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए को दी गई। यह एजेंसी 15 से अधिक परीक्षाएं आयोजित कराती है।

	 

	लेकिन बनने के बाद से ही एनटीए लगातार विवादों में घिरी रही है। अभी दो साल पहले भी यूजीसी-नेट परीक्षा को लेकर सवाल उठे थे और पेपर लीक के आरोप लगे थे। उस वक्त भी पूरी परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। 2024 में भी नीट परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र लीक होने की खबरें सामने आई थीं। बिहार और गुजरात के गोधरा समेत कई केंद्रों पर पेपर बेचे जाने और नकल कराने के पुख्ता सबूत मिले, जिसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई।

	 

	कैसी मुश्किलें आ रही हैं?

	जानकारों का कहना है कि 22-23 लाख छात्रों की परीक्षा एक साथ कराना आसान नहीं है लेकिन यदि परीक्षा कराई जा रही है तो जिम्मेदारी भी होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय भी होनी चाहिए। दीपिका सिंघल दिल्ली की एक कोचिंग में नीट के छात्रों का मार्गदर्शन करती हैं और बॉटनी पढ़ाती हैं।

	 

	डीडब्ल्यू से बातचीत में वो कहती हैं, “इंजीनियरिंग की कई परीक्षाएं अब ऑनलाइन हो रही हैं। कई प्रतियोगी परीक्षाएं भी ऑनलाइन होती हैं। ऐसे में नीट भी ऑनलाइन हो तो कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ ऑनलाइन परीक्षा करा लेने भर से पारदर्शिता आ जाएगी। धांधली की गुंजाइश तब भी बनी रहेगी। इसलिए सबसे जरूरी है कि सिस्टम फुलप्रूफ होना चाहिए और गड़बड़ी होने पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।”

	 

	जेईई जैसी इंजीनियरिंग की परीक्षाएं भी अब ऑनलाइन होने लगी हैं और कई शिफ्टों में आयोजित होती हैं, जबकि नीट अब भी पारंपरिक तरीके से यानी ओएमआर शीट पर पेन से निशान लगाकर होती है। जानकारों का कहना है कि इसकी वजह से इतने सारे प्रश्नपत्रों को एक साथ देश भर के हजारों केंद्रों में पहुंचाना और उन्हें सुरक्षित रखना अपने आप में एक चुनौती है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि पेपर लीक की घटनाएं इन केंद्रों के बजाय दूसरी जगहों से हो रही हैं। जानकारों के मुताबिक परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र कड़े सुरक्षा वाले स्ट्रॉन्गरूम में रखे जाते हैं और परीक्षा से सिर्फ 45 मिनट पहले ही खुलते हैं।

	 

	ऑनलाइन परीक्षा की चुनौतियां

	हालांकि विशेषज्ञों की समिति पहले भी कंप्यूटर आधारित परीक्षा की सिफारिश कर चुकी है और अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने घोषणा भी कर दी है लेकिन जानकारों का मानना है कि फुल प्रूफ इसे भी नहीं कह सकते और सभी छात्रों के साथ न्याय कर पाना भी मुश्किल होगा।

	 

	शिक्षाविद और राइट टू एजूकेशन फोरम के संयोजक अनिल कुमार रॉय कहते हैं कि परीक्षा को ऑफलाइन से ऑनलाइन कर देना कुछ वैसा ही है जैसे चोट सिर में लगी हो तो पट्टी पैर में बांध देना। डीडब्ल्यू से बातचीत में अनिल कुमार रॉय कहते हैं, “⁠⁠ऑनलाइन एग्जाम डिजिटल असमानता को स्थापित करेगा। अधिकांश राज्यों में उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं के छात्र, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में कंप्यूटर-दक्ष नहीं होते हैं। वे परीक्षा के इस मोड में संपन्न परिवारों, निजी विद्यालयों और शहरी छात्रों से कंपीट नहीं कर पाएंगे। दूसरी बात ये कि ऑफलाइन मोड के लीकेज को पकड़ना आसान है, ऑनलाइन के लीकेज को आसानी से पकड़ा नहीं जा सकता है। इसलिए अब धांधली को लेकर शोर भी नहीं होगा।”

	 

	अनिल कुमार रॉय कहते हैं कि इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की परीक्षा एक साथ लेने का इंफ्रास्ट्रक्चर भी सरकार के पास नहीं है। इसलिए फिर वह प्राइवेट कंप्यूटर सेंटर को परीक्षा-केंद्र बनाएगी। ये निजी केंद्र सभी सुरक्षा उपायों से न तो लैस होते हैं और न ही यकीन के साथ कहा जा सकता है कि लाखों केंद्र ईमानदार हाथों में हैं।

	 

	भले ही इतने छात्रों की परीक्षा एक साथ ना ली जा सके लेकिन परीक्षा कई शिफ्ट में या कई दिनों तक हो सकती है, हालांकि इसमें भी कई चुनौतियां हैं। अनिल कुमार रॉय के मुताबिक, “⁠सारे शिफ्ट के क्वेश्चन सेट एक ही समान कठिन या सरल नहीं होंगे। इससे कठिन सेट वाले बच्चों के कंपीट करने का चांस कम हो जाएगा। यदि इससे बचने के लिए नॉर्मलाइजेशन भी किया जाता है तो अधिक अंक लाने वालों के अंक कम हो जाएंगे और कम अंक लाने वालों के बढ़ जाएंगे।”

	 

	धांधली की आशंका ज्यादा

	शिक्षाविद अनिल कुमार रॉय कहते हैं, “ऑनलाइन परीक्षा धांधली रोकने की गारंटी नहीं है। कई बार बड़ी ऑनलाइन परीक्षाएं हैक हो चुकी हैं। जेईई मेन्स 2021 में 'रिमोट एक्सेस' जालसाजों ने सुरक्षा प्रणालियों को पूरी तरह से बाईपास कर दिया था। एसएससी सीजीएल 2017 में स्क्रीनशॉट और सिंडिकेट स्कैम हुआ था। सीबीटी मोड में होने वाली इस परीक्षा में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसमें परीक्षा हॉल के अंदर से प्रश्नों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे, जबकि हॉल में मोबाइल ले जाना प्रतिबंधित था। सुप्रीम कोर्ट ने इस परीक्षा और सिस्टम को 'दागी' बताया था और परिणामों पर रोक लगा दी थी। जब पिछली परीक्षाओं में अनेक बार ऐसा हो चुका है तो अगली बार न होने की क्या गारंटी है।”

	 

	यही नहीं, सीबीटी यानी कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट मोड में और भी कई दिक्कतें हैं। चूंकि सरकारी केंद्रों की कमी के कारण छोटे और निजी 'आईटी केंद्रों' का उपयोग करना पड़ेगा जिसे फुलप्रूफ बनाना आसान नहीं होगा। सर्वर डाउन होने की समस्या अलग होगी। इसके अलावा बायोमेट्रिक सुरक्षा के बावजूद, हाई-टेक डमी कैंडिडेट्स का उपयोग ऐसी परीक्षाओं में आज भी एक चुनौती बनी हुई है। और सबसे बड़ी बात तो ये कि पूरे परीक्षा केंद्र को भी हैक कर लेना भी तकनीकी रूप से संभव है।

	 

	ऐसे में इन तमाम सवालों के जवाब ढूंढ़ने के बाद ही ऑनलाइन मोड में परीक्षा कराने का कोई फायदा हो सकता है, अन्यथा मौजूदा सिस्टम को ही सख्त निगरानी और जिम्मेदारी के साथ बेहतर किया जा सकता है।

समीरात्मज मिश्र

NEET परीक्षा दोबारा कराने की घोषणा सरकार भले ही कर चुकी हो लेकिन इसके खिलाफ देश भर में छात्र और युवा प्रदर्शन कर रहे हैं। परीक्षा रद्द करने की वजह ये है कि प्रश्नपत्र लीक हो गए थे लेकिन संसदीय समिति के सामने परीक्षा कराने वाली एजेंसी एनटीए के जो बयान मीडिया में सामने आए हैं, उससे यह मामला और गरम हो गया है। समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से कई मीडिया संस्थानों ने लिखा है कि नीट पेपर लीक मामले में संसदीय समिति के सामने एनटीए के डीजी और चेयरमैन ने कहा है कि परीक्षा लीक नहीं हुई है।

 

एएनआई के मुताबिक, “NEET पेपर लीक विवाद को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह और एनटीए चेयरमैन प्रदीप कुमार जोशी 21 मई को संसद की समिति के सामने पेश हुए। सूत्रों के मुताबिक बैठक के दौरान NTA प्रमुख ने एजेंसी का बचाव करते हुए दावा किया कि पेपर NTA के सिस्टम से लीक नहीं हुए थे। जब संसदीय समिति ने अधिकारियों से सीधा सवाल किया कि इस लीक के लिए आखिर जिम्मेदार कौन हैं, तो NTA प्रमुख ने जवाब दिया कि वे इसका सटीक जवाब सीबीआई की जांच पूरी होने के बाद ही दे पाएंगे।”

 

एनटीए ही वह संस्था है, जो नीट और इस तरह की करीब 15 परीक्षाएं आयोजित करती है। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जानकारी लेने के लिए एनटीए के महानिदेशक और चेयरमैन को संसदीय समिति के सामने बुलाया गया था। नीट यूजी की परीक्षा इसी महीने तीन मई को हुई थी, लेकिन पेपर लीक होने के बाद 11 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। फिलहाल पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई कर रही है। दोबारा परीक्षा 21 जून को होगी।

 

मामले की जांच कर रही सीबीआई ने अब तक महाराष्ट्र और राजस्थान से कम से कम नौ लोगों को गिरफ्तार भी किया है जिसमें कुछ कोचिंग संस्थानों के मालिक और शिक्षक भी शामिल हैं।

 

राज्यों का विरोध

नीट परीक्षा में हुई धांधली के चलते कई राज्य अब इस परीक्षा पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं, खासकर दक्षिण भारत के राज्य। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने तो बारहवीं की परीक्षा के अंकों के आधार पर ही प्रवेश का सुझाव दिया है, वहीं केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने तो इसे खत्म करने की ही मांग कर डाली है। जहां तक बारहवीं के अंकों के आधार पर मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश की बात है तो जानकारों का कहना है कि अलग-अलग राज्यों और केंद्रीय बोर्डों के अंकों में असमानता और अलग पैटर्न के कारण यह तरीका बहुत व्यावहारिक नहीं होगा। ऐसी दिक्कतों को दूर करने के लिए ही प्रवेश परीक्षा की शुरुआत हुई।

 

इधर, नीट परीक्षा दोबारा कराने की घोषणा करने के साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि अगले साल से यह परीक्षा ऑनलाइन कराई जाएगी जिसमें परीक्षा का मोड सीबीटी यानी कंप्यूटर बेस्ड टेस्टिंग होगा। लेकिन सवाल ये हैं कि क्या ऑनलाइन तरीका अपना कर ही परीक्षा पारदर्शी हो सकती है क्योंकि अभी भी कई परीक्षाएं ऑनलाइन होती हैं लेकिन उनमें भी धांधली की शिकायतें आती रहती हैं।

 

कब बनी एनटीए?

साल 2017 से पहले देश में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई अखिल भारतीय स्तर पर प्रवेश परीक्षा आयोजित करता था जबकि अलग-अलग राज्यों के बोर्ड अपने मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए के लिए अलग प्रवेश परीक्षाएं कराते थे। कुछ विश्वविद्यालय भी अलग प्रवेश परीक्षा आयोजित करते थे।

 

लेकिन साल 2017 में उच्च शिक्षा के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा व्यवस्था में सख्ती, मानकीकरण और विश्वसनीयता लाने के मकसद से अखिल भारतीय स्तर पर NEET यानी 'नेशनल एलिजिबिलिटी कम इंट्रेंस टेस्ट' की व्यस्था शुरू हुई और इसे कराने की जिम्मेदारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए को दी गई। यह एजेंसी 15 से अधिक परीक्षाएं आयोजित कराती है।

 

लेकिन बनने के बाद से ही एनटीए लगातार विवादों में घिरी रही है। अभी दो साल पहले भी यूजीसी-नेट परीक्षा को लेकर सवाल उठे थे और पेपर लीक के आरोप लगे थे। उस वक्त भी पूरी परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। 2024 में भी नीट परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र लीक होने की खबरें सामने आई थीं। बिहार और गुजरात के गोधरा समेत कई केंद्रों पर पेपर बेचे जाने और नकल कराने के पुख्ता सबूत मिले, जिसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई।

 

कैसी मुश्किलें आ रही हैं?

जानकारों का कहना है कि 22-23 लाख छात्रों की परीक्षा एक साथ कराना आसान नहीं है लेकिन यदि परीक्षा कराई जा रही है तो जिम्मेदारी भी होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय भी होनी चाहिए। दीपिका सिंघल दिल्ली की एक कोचिंग में नीट के छात्रों का मार्गदर्शन करती हैं और बॉटनी पढ़ाती हैं।

 

डीडब्ल्यू से बातचीत में वो कहती हैं, “इंजीनियरिंग की कई परीक्षाएं अब ऑनलाइन हो रही हैं। कई प्रतियोगी परीक्षाएं भी ऑनलाइन होती हैं। ऐसे में नीट भी ऑनलाइन हो तो कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ ऑनलाइन परीक्षा करा लेने भर से पारदर्शिता आ जाएगी। धांधली की गुंजाइश तब भी बनी रहेगी। इसलिए सबसे जरूरी है कि सिस्टम फुलप्रूफ होना चाहिए और गड़बड़ी होने पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।”

 

जेईई जैसी इंजीनियरिंग की परीक्षाएं भी अब ऑनलाइन होने लगी हैं और कई शिफ्टों में आयोजित होती हैं, जबकि नीट अब भी पारंपरिक तरीके से यानी ओएमआर शीट पर पेन से निशान लगाकर होती है। जानकारों का कहना है कि इसकी वजह से इतने सारे प्रश्नपत्रों को एक साथ देश भर के हजारों केंद्रों में पहुंचाना और उन्हें सुरक्षित रखना अपने आप में एक चुनौती है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि पेपर लीक की घटनाएं इन केंद्रों के बजाय दूसरी जगहों से हो रही हैं। जानकारों के मुताबिक परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र कड़े सुरक्षा वाले स्ट्रॉन्गरूम में रखे जाते हैं और परीक्षा से सिर्फ 45 मिनट पहले ही खुलते हैं।

 

ऑनलाइन परीक्षा की चुनौतियां

हालांकि विशेषज्ञों की समिति पहले भी कंप्यूटर आधारित परीक्षा की सिफारिश कर चुकी है और अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने घोषणा भी कर दी है लेकिन जानकारों का मानना है कि फुल प्रूफ इसे भी नहीं कह सकते और सभी छात्रों के साथ न्याय कर पाना भी मुश्किल होगा।

 

शिक्षाविद और राइट टू एजूकेशन फोरम के संयोजक अनिल कुमार रॉय कहते हैं कि परीक्षा को ऑफलाइन से ऑनलाइन कर देना कुछ वैसा ही है जैसे चोट सिर में लगी हो तो पट्टी पैर में बांध देना। डीडब्ल्यू से बातचीत में अनिल कुमार रॉय कहते हैं, “⁠⁠ऑनलाइन एग्जाम डिजिटल असमानता को स्थापित करेगा। अधिकांश राज्यों में उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं के छात्र, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में कंप्यूटर-दक्ष नहीं होते हैं। वे परीक्षा के इस मोड में संपन्न परिवारों, निजी विद्यालयों और शहरी छात्रों से कंपीट नहीं कर पाएंगे। दूसरी बात ये कि ऑफलाइन मोड के लीकेज को पकड़ना आसान है, ऑनलाइन के लीकेज को आसानी से पकड़ा नहीं जा सकता है। इसलिए अब धांधली को लेकर शोर भी नहीं होगा।”

 

अनिल कुमार रॉय कहते हैं कि इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की परीक्षा एक साथ लेने का इंफ्रास्ट्रक्चर भी सरकार के पास नहीं है। इसलिए फिर वह प्राइवेट कंप्यूटर सेंटर को परीक्षा-केंद्र बनाएगी। ये निजी केंद्र सभी सुरक्षा उपायों से न तो लैस होते हैं और न ही यकीन के साथ कहा जा सकता है कि लाखों केंद्र ईमानदार हाथों में हैं।

 

भले ही इतने छात्रों की परीक्षा एक साथ ना ली जा सके लेकिन परीक्षा कई शिफ्ट में या कई दिनों तक हो सकती है, हालांकि इसमें भी कई चुनौतियां हैं। अनिल कुमार रॉय के मुताबिक, “⁠सारे शिफ्ट के क्वेश्चन सेट एक ही समान कठिन या सरल नहीं होंगे। इससे कठिन सेट वाले बच्चों के कंपीट करने का चांस कम हो जाएगा। यदि इससे बचने के लिए नॉर्मलाइजेशन भी किया जाता है तो अधिक अंक लाने वालों के अंक कम हो जाएंगे और कम अंक लाने वालों के बढ़ जाएंगे।”

 

धांधली की आशंका ज्यादा

शिक्षाविद अनिल कुमार रॉय कहते हैं, “ऑनलाइन परीक्षा धांधली रोकने की गारंटी नहीं है। कई बार बड़ी ऑनलाइन परीक्षाएं हैक हो चुकी हैं। जेईई मेन्स 2021 में 'रिमोट एक्सेस' जालसाजों ने सुरक्षा प्रणालियों को पूरी तरह से बाईपास कर दिया था। एसएससी सीजीएल 2017 में स्क्रीनशॉट और सिंडिकेट स्कैम हुआ था। सीबीटी मोड में होने वाली इस परीक्षा में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसमें परीक्षा हॉल के अंदर से प्रश्नों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे, जबकि हॉल में मोबाइल ले जाना प्रतिबंधित था। सुप्रीम कोर्ट ने इस परीक्षा और सिस्टम को 'दागी' बताया था और परिणामों पर रोक लगा दी थी। जब पिछली परीक्षाओं में अनेक बार ऐसा हो चुका है तो अगली बार न होने की क्या गारंटी है।”

 

यही नहीं, सीबीटी यानी कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट मोड में और भी कई दिक्कतें हैं। चूंकि सरकारी केंद्रों की कमी के कारण छोटे और निजी 'आईटी केंद्रों' का उपयोग करना पड़ेगा जिसे फुलप्रूफ बनाना आसान नहीं होगा। सर्वर डाउन होने की समस्या अलग होगी। इसके अलावा बायोमेट्रिक सुरक्षा के बावजूद, हाई-टेक डमी कैंडिडेट्स का उपयोग ऐसी परीक्षाओं में आज भी एक चुनौती बनी हुई है। और सबसे बड़ी बात तो ये कि पूरे परीक्षा केंद्र को भी हैक कर लेना भी तकनीकी रूप से संभव है।

 

ऐसे में इन तमाम सवालों के जवाब ढूंढ़ने के बाद ही ऑनलाइन मोड में परीक्षा कराने का कोई फायदा हो सकता है, अन्यथा मौजूदा सिस्टम को ही सख्त निगरानी और जिम्मेदारी के साथ बेहतर किया जा सकता है।

समीरात्मज मिश्र

NEET परीक्षा दोबारा कराने की घोषणा सरकार भले ही कर चुकी हो लेकिन इसके खिलाफ देश भर में छात्र और युवा प्रदर्शन कर रहे हैं। परीक्षा रद्द करने की वजह ये है कि प्रश्नपत्र लीक हो गए थे लेकिन संसदीय समिति के सामने परीक्षा कराने वाली एजेंसी एनटीए के जो बयान मीडिया में सामने आए हैं, उससे यह मामला और गरम हो गया है। समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से कई मीडिया संस्थानों ने लिखा है कि नीट पेपर लीक मामले में संसदीय समिति के सामने एनटीए के डीजी और चेयरमैन ने कहा है कि परीक्षा लीक नहीं हुई है।

 

एएनआई के मुताबिक, “NEET पेपर लीक विवाद को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह और एनटीए चेयरमैन प्रदीप कुमार जोशी 21 मई को संसद की समिति के सामने पेश हुए। सूत्रों के मुताबिक बैठक के दौरान NTA प्रमुख ने एजेंसी का बचाव करते हुए दावा किया कि पेपर NTA के सिस्टम से लीक नहीं हुए थे। जब संसदीय समिति ने अधिकारियों से सीधा सवाल किया कि इस लीक के लिए आखिर जिम्मेदार कौन हैं, तो NTA प्रमुख ने जवाब दिया कि वे इसका सटीक जवाब सीबीआई की जांच पूरी होने के बाद ही दे पाएंगे।”

 

एनटीए ही वह संस्था है, जो नीट और इस तरह की करीब 15 परीक्षाएं आयोजित करती है। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले की जानकारी लेने के लिए एनटीए के महानिदेशक और चेयरमैन को संसदीय समिति के सामने बुलाया गया था। नीट यूजी की परीक्षा इसी महीने तीन मई को हुई थी, लेकिन पेपर लीक होने के बाद 11 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। फिलहाल पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई कर रही है। दोबारा परीक्षा 21 जून को होगी।

 

मामले की जांच कर रही सीबीआई ने अब तक महाराष्ट्र और राजस्थान से कम से कम नौ लोगों को गिरफ्तार भी किया है जिसमें कुछ कोचिंग संस्थानों के मालिक और शिक्षक भी शामिल हैं।

 

राज्यों का विरोध

नीट परीक्षा में हुई धांधली के चलते कई राज्य अब इस परीक्षा पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं, खासकर दक्षिण भारत के राज्य। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने तो बारहवीं की परीक्षा के अंकों के आधार पर ही प्रवेश का सुझाव दिया है, वहीं केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने तो इसे खत्म करने की ही मांग कर डाली है। जहां तक बारहवीं के अंकों के आधार पर मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश की बात है तो जानकारों का कहना है कि अलग-अलग राज्यों और केंद्रीय बोर्डों के अंकों में असमानता और अलग पैटर्न के कारण यह तरीका बहुत व्यावहारिक नहीं होगा। ऐसी दिक्कतों को दूर करने के लिए ही प्रवेश परीक्षा की शुरुआत हुई।

 

इधर, नीट परीक्षा दोबारा कराने की घोषणा करने के साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि अगले साल से यह परीक्षा ऑनलाइन कराई जाएगी जिसमें परीक्षा का मोड सीबीटी यानी कंप्यूटर बेस्ड टेस्टिंग होगा। लेकिन सवाल ये हैं कि क्या ऑनलाइन तरीका अपना कर ही परीक्षा पारदर्शी हो सकती है क्योंकि अभी भी कई परीक्षाएं ऑनलाइन होती हैं लेकिन उनमें भी धांधली की शिकायतें आती रहती हैं।

 

कब बनी एनटीए?

साल 2017 से पहले देश में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई अखिल भारतीय स्तर पर प्रवेश परीक्षा आयोजित करता था जबकि अलग-अलग राज्यों के बोर्ड अपने मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए के लिए अलग प्रवेश परीक्षाएं कराते थे। कुछ विश्वविद्यालय भी अलग प्रवेश परीक्षा आयोजित करते थे।

 

लेकिन साल 2017 में उच्च शिक्षा के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा व्यवस्था में सख्ती, मानकीकरण और विश्वसनीयता लाने के मकसद से अखिल भारतीय स्तर पर NEET यानी 'नेशनल एलिजिबिलिटी कम इंट्रेंस टेस्ट' की व्यस्था शुरू हुई और इसे कराने की जिम्मेदारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए को दी गई। यह एजेंसी 15 से अधिक परीक्षाएं आयोजित कराती है।

 

लेकिन बनने के बाद से ही एनटीए लगातार विवादों में घिरी रही है। अभी दो साल पहले भी यूजीसी-नेट परीक्षा को लेकर सवाल उठे थे और पेपर लीक के आरोप लगे थे। उस वक्त भी पूरी परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। 2024 में भी नीट परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र लीक होने की खबरें सामने आई थीं। बिहार और गुजरात के गोधरा समेत कई केंद्रों पर पेपर बेचे जाने और नकल कराने के पुख्ता सबूत मिले, जिसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई।

 

कैसी मुश्किलें आ रही हैं?

जानकारों का कहना है कि 22-23 लाख छात्रों की परीक्षा एक साथ कराना आसान नहीं है लेकिन यदि परीक्षा कराई जा रही है तो जिम्मेदारी भी होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय भी होनी चाहिए। दीपिका सिंघल दिल्ली की एक कोचिंग में नीट के छात्रों का मार्गदर्शन करती हैं और बॉटनी पढ़ाती हैं।

 

डीडब्ल्यू से बातचीत में वो कहती हैं, “इंजीनियरिंग की कई परीक्षाएं अब ऑनलाइन हो रही हैं। कई प्रतियोगी परीक्षाएं भी ऑनलाइन होती हैं। ऐसे में नीट भी ऑनलाइन हो तो कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ ऑनलाइन परीक्षा करा लेने भर से पारदर्शिता आ जाएगी। धांधली की गुंजाइश तब भी बनी रहेगी। इसलिए सबसे जरूरी है कि सिस्टम फुलप्रूफ होना चाहिए और गड़बड़ी होने पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।”

 

जेईई जैसी इंजीनियरिंग की परीक्षाएं भी अब ऑनलाइन होने लगी हैं और कई शिफ्टों में आयोजित होती हैं, जबकि नीट अब भी पारंपरिक तरीके से यानी ओएमआर शीट पर पेन से निशान लगाकर होती है। जानकारों का कहना है कि इसकी वजह से इतने सारे प्रश्नपत्रों को एक साथ देश भर के हजारों केंद्रों में पहुंचाना और उन्हें सुरक्षित रखना अपने आप में एक चुनौती है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि पेपर लीक की घटनाएं इन केंद्रों के बजाय दूसरी जगहों से हो रही हैं। जानकारों के मुताबिक परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र कड़े सुरक्षा वाले स्ट्रॉन्गरूम में रखे जाते हैं और परीक्षा से सिर्फ 45 मिनट पहले ही खुलते हैं।

 

ऑनलाइन परीक्षा की चुनौतियां

हालांकि विशेषज्ञों की समिति पहले भी कंप्यूटर आधारित परीक्षा की सिफारिश कर चुकी है और अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने घोषणा भी कर दी है लेकिन जानकारों का मानना है कि फुल प्रूफ इसे भी नहीं कह सकते और सभी छात्रों के साथ न्याय कर पाना भी मुश्किल होगा।

 

शिक्षाविद और राइट टू एजूकेशन फोरम के संयोजक अनिल कुमार रॉय कहते हैं कि परीक्षा को ऑफलाइन से ऑनलाइन कर देना कुछ वैसा ही है जैसे चोट सिर में लगी हो तो पट्टी पैर में बांध देना। डीडब्ल्यू से बातचीत में अनिल कुमार रॉय कहते हैं, “⁠⁠ऑनलाइन एग्जाम डिजिटल असमानता को स्थापित करेगा। अधिकांश राज्यों में उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं के छात्र, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में कंप्यूटर-दक्ष नहीं होते हैं। वे परीक्षा के इस मोड में संपन्न परिवारों, निजी विद्यालयों और शहरी छात्रों से कंपीट नहीं कर पाएंगे। दूसरी बात ये कि ऑफलाइन मोड के लीकेज को पकड़ना आसान है, ऑनलाइन के लीकेज को आसानी से पकड़ा नहीं जा सकता है। इसलिए अब धांधली को लेकर शोर भी नहीं होगा।”

 

अनिल कुमार रॉय कहते हैं कि इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की परीक्षा एक साथ लेने का इंफ्रास्ट्रक्चर भी सरकार के पास नहीं है। इसलिए फिर वह प्राइवेट कंप्यूटर सेंटर को परीक्षा-केंद्र बनाएगी। ये निजी केंद्र सभी सुरक्षा उपायों से न तो लैस होते हैं और न ही यकीन के साथ कहा जा सकता है कि लाखों केंद्र ईमानदार हाथों में हैं।

 

भले ही इतने छात्रों की परीक्षा एक साथ ना ली जा सके लेकिन परीक्षा कई शिफ्ट में या कई दिनों तक हो सकती है, हालांकि इसमें भी कई चुनौतियां हैं। अनिल कुमार रॉय के मुताबिक, “⁠सारे शिफ्ट के क्वेश्चन सेट एक ही समान कठिन या सरल नहीं होंगे। इससे कठिन सेट वाले बच्चों के कंपीट करने का चांस कम हो जाएगा। यदि इससे बचने के लिए नॉर्मलाइजेशन भी किया जाता है तो अधिक अंक लाने वालों के अंक कम हो जाएंगे और कम अंक लाने वालों के बढ़ जाएंगे।”

 

धांधली की आशंका ज्यादा

शिक्षाविद अनिल कुमार रॉय कहते हैं, “ऑनलाइन परीक्षा धांधली रोकने की गारंटी नहीं है। कई बार बड़ी ऑनलाइन परीक्षाएं हैक हो चुकी हैं। जेईई मेन्स 2021 में 'रिमोट एक्सेस' जालसाजों ने सुरक्षा प्रणालियों को पूरी तरह से बाईपास कर दिया था। एसएससी सीजीएल 2017 में स्क्रीनशॉट और सिंडिकेट स्कैम हुआ था। सीबीटी मोड में होने वाली इस परीक्षा में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसमें परीक्षा हॉल के अंदर से प्रश्नों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे, जबकि हॉल में मोबाइल ले जाना प्रतिबंधित था। सुप्रीम कोर्ट ने इस परीक्षा और सिस्टम को 'दागी' बताया था और परिणामों पर रोक लगा दी थी। जब पिछली परीक्षाओं में अनेक बार ऐसा हो चुका है तो अगली बार न होने की क्या गारंटी है।”

 

यही नहीं, सीबीटी यानी कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट मोड में और भी कई दिक्कतें हैं। चूंकि सरकारी केंद्रों की कमी के कारण छोटे और निजी 'आईटी केंद्रों' का उपयोग करना पड़ेगा जिसे फुलप्रूफ बनाना आसान नहीं होगा। सर्वर डाउन होने की समस्या अलग होगी। इसके अलावा बायोमेट्रिक सुरक्षा के बावजूद, हाई-टेक डमी कैंडिडेट्स का उपयोग ऐसी परीक्षाओं में आज भी एक चुनौती बनी हुई है। और सबसे बड़ी बात तो ये कि पूरे परीक्षा केंद्र को भी हैक कर लेना भी तकनीकी रूप से संभव है।

 

ऐसे में इन तमाम सवालों के जवाब ढूंढ़ने के बाद ही ऑनलाइन मोड में परीक्षा कराने का कोई फायदा हो सकता है, अन्यथा मौजूदा सिस्टम को ही सख्त निगरानी और जिम्मेदारी के साथ बेहतर किया जा सकता है।

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">कौन है सुपरस्टार यश की पत्नी राधिका पंडित? खूबसूरती देख फैन्स हुए मंत्रमुग्ध, बोले- ये तो हुस्नपरी है… Superstar Yash Wife Radhika Pandit: साउथ के सुपरस्टार यश इस समय अपनी आने वाली फिल्म ‘टॉक्सिक’ को लेकर काफी ज्यादा चर्चा में बने हुए हैं। फिल्म का ट्रेलर भी रिलीज हो चुका है और हाल ही में ट्रेलर लॉन्च इवेंट में पूरी स्टार कास्ट को भी देखा गया था। जहां पर यश की पत्नी राधिका पंडित छा गई। सोशल मीडिया पर अब उनकी चर्चा भी हो रही है और लोग जानना चाहते हैं कि आखिर वह कौन है।           टीवी और फिल्मों में किया काम साउथ फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार कहीं जाने वाले यश की पत्नी का नाम राधिका पंडित है जो कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की एक जानी-मानी अभिनेत्री है। उनका जन्म 7 मार्च 1984 में बेंगलुरु में हुआ था। इसके बाद साल 2007 में टीवी शो ‘नंदगोकुला’ से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वह ‘कदंबरी’ और ‘सुमंगली’ जैसे शोज में भी नजर आ चुकी हैं।    लेकिन राधिका पंडित ने टीवी इंडस्ट्री में काम करने के बाद में साल 2008 में फिल्म ‘मोग्गीना मनसु’ से फिल्मों में काम करना शुरू किया। साथ ही वह कृष्णन लव स्टोरी, अधूरी और मिस्टर एंड मिसेज रामाचारी जैसी फिल्मों में भी नजर आ चुकी है। लाइमलाइट से रहती है दूर राधिका पंडित की खूबसूरती भी बेहद कमल की है और वह खूबसूरती के आगे तो बड़ी-बड़ी हसीनाओं को भी फेल कर सकती हैं। लेकिन वह ज्यादातर लाइमलाइट से दूरी रखना पसंद करती है। हालांकि सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है और अपनी तस्वीरों को शेयर करती हुई भी नजर आती है।      शादी के बाद फिल्मों से बनाई दूरी जानकारी के लिए आपको बताते चलें कि राधिका पंडित ने 9 दिसंबर 2016 को सुपरस्टार यश के साथ में शादी कर ली थी और दोनों के दो बच्चे भी हैं। एक बेटा है और एक बेटी है। यश से शादी करने के बाद राधिका ने फिल्मों से दूरी बना ली है और अभी के वक्त में वह अपना पूरा वक्त बच्चों और परिवार को ही देती हैं।

Avika Gor, who rose to fame as Anandi in the popular television show Balika Vadhu, has been hospitalised after being diagnosed with dengue. The actor had been battling a high fever for five days before she was admitted to the hospital. Her husband, Milind Chandwani, shared an update on her health and requested fans to keep her in their prayers as she recovers.

Avika Gor hospitalised with Dengue after five days of high fever     Avika Gor, who rose to fame as Anandi in the popular television show Balika Vadhu, has been hospitalised after being diagnosed with dengue. The actor had been battling a high fever for five days before she was admitted to the hospital. Her husband, Milind Chandwani, shared an update on her health and requested fans to keep her in their prayers as she recovers.Avika Gor hospitalised with Dengue after five days of high feverOn Friday, Milind shared a video on Instagram in which he revealed that Avika had been admitted the previous night. He also spoke about how she continued to fulfil her professional commitments despite suffering from a high fever.He said, “Avika has been in the hospital since last night. She has had a fever of 103–104 degrees for the past five days. And guess what she did during those five days? She first went to a project where two days of shooting were still pending. She performed so well despite having a 104-degree fever that they managed to wrap up the shoot in just one day. Then she came back and got a two-day break. She spent the entire day in bed, taking medicines, unable to move or even eat properly. But because she had made a commitment, she travelled to Delhi with the same fever and shot an ad. She also got herself tested before that. When she returned to Mumbai, we checked the report and it showed dengue. I told her many times that the producers would understand and that we could postpone it, but she kept saying, ‘Someone will suffer a loss, someone’s time will be wasted, someone’s money will be lost. I don’t want that. I’ll do as much as I can.’”Milind also spoke about Avika’s dedication towards her profession and her consideration for other people’s time and resources. “I have never understood where someone gets so much love for their work from. The amount of respect she has for her craft and the value she places on other people’s time and resources, I don’t think many people in this industry do that. Anyway, I request all of you to please keep her in your prayers. I am proud of you, Avika,” he said.Avika began her acting career as a child artist with the 2007 television series Ssshhhh… Koi Hai. In 2008, she was cast as Anandi in Balika Vadhu, a role that brought her widespread recognition. She later appeared in shows including Sasural Simar Ka and Laado – Veerpur Ki Mardani.Avika has also worked in Hindi and Telugu films and is currently a contestant on Khatron Ke Khiladi 15. Her last Telugu film appearance was in Ugly Story.Also Read : Is Avika Gor returning to television? Cryptic post and SJ Studios visit spark fresh speculationBOLLYWOOD NEWS – LIVE UPDATESCatch us for latest Bollywood News, New Bollywood Movies update, Box office collection, New Movies Release , Bollywood News Hindi, Entertainment News, Bollywood Live News Today & Upcoming Movies 2026 and stay updated with latest hindi movies only on Bollywood Hungama.Avika Gor,dengue,Five Days,Health,Health Update,High Fever,Hospitalised,NewsAvika Gor hospitalised with Dengue after five days of high fever     Avika Gor, who rose to fame as Anandi in the popular television show Balika Vadhu, has been hospitalised after being diagnosed with dengue. The actor had been battling a high fever for five days before she was admitted to the hospital. Her husband, Milind Chandwani, shared an update on her health and requested fans to keep her in their prayers as she recovers.Avika Gor hospitalised with Dengue after five days of high feverOn Friday, Milind shared a video on Instagram in which he revealed that Avika had been admitted the previous night. He also spoke about how she continued to fulfil her professional commitments despite suffering from a high fever.He said, “Avika has been in the hospital since last night. She has had a fever of 103–104 degrees for the past five days. And guess what she did during those five days? She first went to a project where two days of shooting were still pending. She performed so well despite having a 104-degree fever that they managed to wrap up the shoot in just one day. Then she came back and got a two-day break. She spent the entire day in bed, taking medicines, unable to move or even eat properly. But because she had made a commitment, she travelled to Delhi with the same fever and shot an ad. She also got herself tested before that. When she returned to Mumbai, we checked the report and it showed dengue. I told her many times that the producers would understand and that we could postpone it, but she kept saying, ‘Someone will suffer a loss, someone’s time will be wasted, someone’s money will be lost. I don’t want that. I’ll do as much as I can.’”Milind also spoke about Avika’s dedication towards her profession and her consideration for other people’s time and resources. “I have never understood where someone gets so much love for their work from. The amount of respect she has for her craft and the value she places on other people’s time and resources, I don’t think many people in this industry do that. Anyway, I request all of you to please keep her in your prayers. I am proud of you, Avika,” he said.Avika began her acting career as a child artist with the 2007 television series Ssshhhh… Koi Hai. In 2008, she was cast as Anandi in Balika Vadhu, a role that brought her widespread recognition. She later appeared in shows including Sasural Simar Ka and Laado – Veerpur Ki Mardani.Avika has also worked in Hindi and Telugu films and is currently a contestant on Khatron Ke Khiladi 15. Her last Telugu film appearance was in Ugly Story.Also Read : Is Avika Gor returning to television? Cryptic post and SJ Studios visit spark fresh speculationBOLLYWOOD NEWS – LIVE UPDATESCatch us for latest Bollywood News, New Bollywood Movies update, Box office collection, New Movies Release , Bollywood News Hindi, Entertainment News, Bollywood Live News Today & Upcoming Movies 2026 and stay updated with latest hindi movies only on Bollywood Hungama.Avika Gor,dengue,Five Days,Health,Health Update,High Fever,Hospitalised,News

Avika Gor hospitalised with Dengue after five days of high fever

On Friday, Milind shared a video on Instagram in which he revealed that Avika had been admitted the previous night. He also spoke about how she continued to fulfil her professional commitments despite suffering from a high fever.

He said, “Avika has been in the hospital since last night. She has had a fever of 103–104 degrees for the past five days. And guess what she did during those five days? She first went to a project where two days of shooting were still pending. She performed so well despite having a 104-degree fever that they managed to wrap up the shoot in just one day. Then she came back and got a two-day break. She spent the entire day in bed, taking medicines, unable to move or even eat properly. But because she had made a commitment, she travelled to Delhi with the same fever and shot an ad. She also got herself tested before that. When she returned to Mumbai, we checked the report and it showed dengue. I told her many times that the producers would understand and that we could postpone it, but she kept saying, ‘Someone will suffer a loss, someone’s time will be wasted, someone’s money will be lost. I don’t want that. I’ll do as much as I can.’”

Milind also spoke about Avika’s dedication towards her profession and her consideration for other people’s time and resources. “I have never understood where someone gets so much love for their work from. The amount of respect she has for her craft and the value she places on other people’s time and resources, I don’t think many people in this industry do that. Anyway, I request all of you to please keep her in your prayers. I am proud of you, Avika,” he said.

Avika began her acting career as a child artist with the 2007 television series Ssshhhh… Koi Hai. In 2008, she was cast as Anandi in Balika Vadhu, a role that brought her widespread recognition. She later appeared in shows including Sasural Simar Ka and Laado – Veerpur Ki Mardani.

Avika has also worked in Hindi and Telugu films and is currently a contestant on Khatron Ke Khiladi 15. Her last Telugu film appearance was in Ugly Story.

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Avika Gor,dengue,Five Days,Health,Health Update,High Fever,Hospitalised,News">Avika Gor hospitalised with Dengue after five days of high fever

Avika Gor, who rose to fame as Anandi in the popular television show Balika Vadhu, has been hospitalised after being diagnosed with dengue. The actor had been battling a high fever for five days before she was admitted to the hospital. Her husband, Milind Chandwani, shared an update on her health and requested fans to keep her in their prayers as she recovers.

Avika Gor hospitalised with Dengue after five days of high fever     Avika Gor, who rose to fame as Anandi in the popular television show Balika Vadhu, has been hospitalised after being diagnosed with dengue. The actor had been battling a high fever for five days before she was admitted to the hospital. Her husband, Milind Chandwani, shared an update on her health and requested fans to keep her in their prayers as she recovers.Avika Gor hospitalised with Dengue after five days of high feverOn Friday, Milind shared a video on Instagram in which he revealed that Avika had been admitted the previous night. He also spoke about how she continued to fulfil her professional commitments despite suffering from a high fever.He said, “Avika has been in the hospital since last night. She has had a fever of 103–104 degrees for the past five days. And guess what she did during those five days? She first went to a project where two days of shooting were still pending. She performed so well despite having a 104-degree fever that they managed to wrap up the shoot in just one day. Then she came back and got a two-day break. She spent the entire day in bed, taking medicines, unable to move or even eat properly. But because she had made a commitment, she travelled to Delhi with the same fever and shot an ad. She also got herself tested before that. When she returned to Mumbai, we checked the report and it showed dengue. I told her many times that the producers would understand and that we could postpone it, but she kept saying, ‘Someone will suffer a loss, someone’s time will be wasted, someone’s money will be lost. I don’t want that. I’ll do as much as I can.’”Milind also spoke about Avika’s dedication towards her profession and her consideration for other people’s time and resources. “I have never understood where someone gets so much love for their work from. The amount of respect she has for her craft and the value she places on other people’s time and resources, I don’t think many people in this industry do that. Anyway, I request all of you to please keep her in your prayers. I am proud of you, Avika,” he said.Avika began her acting career as a child artist with the 2007 television series Ssshhhh… Koi Hai. In 2008, she was cast as Anandi in Balika Vadhu, a role that brought her widespread recognition. She later appeared in shows including Sasural Simar Ka and Laado – Veerpur Ki Mardani.Avika has also worked in Hindi and Telugu films and is currently a contestant on Khatron Ke Khiladi 15. Her last Telugu film appearance was in Ugly Story.Also Read : Is Avika Gor returning to television? Cryptic post and SJ Studios visit spark fresh speculationBOLLYWOOD NEWS – LIVE UPDATESCatch us for latest Bollywood News, New Bollywood Movies update, Box office collection, New Movies Release , Bollywood News Hindi, Entertainment News, Bollywood Live News Today & Upcoming Movies 2026 and stay updated with latest hindi movies only on Bollywood Hungama.Avika Gor,dengue,Five Days,Health,Health Update,High Fever,Hospitalised,NewsAvika Gor hospitalised with Dengue after five days of high fever     Avika Gor, who rose to fame as Anandi in the popular television show Balika Vadhu, has been hospitalised after being diagnosed with dengue. The actor had been battling a high fever for five days before she was admitted to the hospital. Her husband, Milind Chandwani, shared an update on her health and requested fans to keep her in their prayers as she recovers.Avika Gor hospitalised with Dengue after five days of high feverOn Friday, Milind shared a video on Instagram in which he revealed that Avika had been admitted the previous night. He also spoke about how she continued to fulfil her professional commitments despite suffering from a high fever.He said, “Avika has been in the hospital since last night. She has had a fever of 103–104 degrees for the past five days. And guess what she did during those five days? She first went to a project where two days of shooting were still pending. She performed so well despite having a 104-degree fever that they managed to wrap up the shoot in just one day. Then she came back and got a two-day break. She spent the entire day in bed, taking medicines, unable to move or even eat properly. But because she had made a commitment, she travelled to Delhi with the same fever and shot an ad. She also got herself tested before that. When she returned to Mumbai, we checked the report and it showed dengue. I told her many times that the producers would understand and that we could postpone it, but she kept saying, ‘Someone will suffer a loss, someone’s time will be wasted, someone’s money will be lost. I don’t want that. I’ll do as much as I can.’”Milind also spoke about Avika’s dedication towards her profession and her consideration for other people’s time and resources. “I have never understood where someone gets so much love for their work from. The amount of respect she has for her craft and the value she places on other people’s time and resources, I don’t think many people in this industry do that. Anyway, I request all of you to please keep her in your prayers. I am proud of you, Avika,” he said.Avika began her acting career as a child artist with the 2007 television series Ssshhhh… Koi Hai. In 2008, she was cast as Anandi in Balika Vadhu, a role that brought her widespread recognition. She later appeared in shows including Sasural Simar Ka and Laado – Veerpur Ki Mardani.Avika has also worked in Hindi and Telugu films and is currently a contestant on Khatron Ke Khiladi 15. Her last Telugu film appearance was in Ugly Story.Also Read : Is Avika Gor returning to television? Cryptic post and SJ Studios visit spark fresh speculationBOLLYWOOD NEWS – LIVE UPDATESCatch us for latest Bollywood News, New Bollywood Movies update, Box office collection, New Movies Release , Bollywood News Hindi, Entertainment News, Bollywood Live News Today & Upcoming Movies 2026 and stay updated with latest hindi movies only on Bollywood Hungama.Avika Gor,dengue,Five Days,Health,Health Update,High Fever,Hospitalised,News

Avika Gor hospitalised with Dengue after five days of high fever

On Friday, Milind shared a video on Instagram in which he revealed that Avika had been admitted the previous night. He also spoke about how she continued to fulfil her professional commitments despite suffering from a high fever.

He said, “Avika has been in the hospital since last night. She has had a fever of 103–104 degrees for the past five days. And guess what she did during those five days? She first went to a project where two days of shooting were still pending. She performed so well despite having a 104-degree fever that they managed to wrap up the shoot in just one day. Then she came back and got a two-day break. She spent the entire day in bed, taking medicines, unable to move or even eat properly. But because she had made a commitment, she travelled to Delhi with the same fever and shot an ad. She also got herself tested before that. When she returned to Mumbai, we checked the report and it showed dengue. I told her many times that the producers would understand and that we could postpone it, but she kept saying, ‘Someone will suffer a loss, someone’s time will be wasted, someone’s money will be lost. I don’t want that. I’ll do as much as I can.’”

Milind also spoke about Avika’s dedication towards her profession and her consideration for other people’s time and resources. “I have never understood where someone gets so much love for their work from. The amount of respect she has for her craft and the value she places on other people’s time and resources, I don’t think many people in this industry do that. Anyway, I request all of you to please keep her in your prayers. I am proud of you, Avika,” he said.

Avika began her acting career as a child artist with the 2007 television series Ssshhhh… Koi Hai. In 2008, she was cast as Anandi in Balika Vadhu, a role that brought her widespread recognition. She later appeared in shows including Sasural Simar Ka and Laado – Veerpur Ki Mardani.

Avika has also worked in Hindi and Telugu films and is currently a contestant on Khatron Ke Khiladi 15. Her last Telugu film appearance was in Ugly Story.

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एक्ट्रेस निकिता रावल के साथ हाल ही में रेड कार्पेट पर एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने सभी को हैरान कर दिया। दरअसल, एक फीमेल फैन सेल्फी लेने के बहाने उनके पास आई और फिर कुछ ऐसा कर गई, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। 

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                एक्ट्रेस निकिता रावल के साथ हाल ही में रेड कार्पेट पर एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने सभी को हैरान कर दिया। दरअसल, एक फीमेल फैन सेल्फी लेने के बहाने उनके पास आई और फिर कुछ ऐसा कर गई, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। 
                                
                
                
                 
                    
                                                                                 
                                                                        
                        
                        












                        
                                                                                        
                             
                                                                    
                                         
                                       
                                                                    
                                
                                                                                                               
                                                    
                            
                                 
                                
                               
                                                                                
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