वर्ष 2011 की जनगणना में करीब 19 लाख थी। यानी बीते 15 वर्षों में शहर की आबादी में लगभग नौ लाख से अधिक की बढ़ोतरी हुई। …और पढ़ें
HighLights
- नगर निगम सीमा में संभावित जनसंख्या 28 लाख के पार पहुंच गई है
- वर्ष 2011 की जनगणना में करीब 19 लाख थी
- बीते 15 वर्षों में शहर की आबादी में लगभग नौ लाख से अधिक की बढ़ोतरी हुई
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। जनगणना-2027 के पहले चरण में जारी मकान गणना ने इंदौर के तेज शहरी विस्तार की तस्वीर साफ कर दी है। नगर निगम सीमा में संभावित जनसंख्या 28 लाख के पार पहुंच गई है, जो वर्ष 2011 की जनगणना में करीब 19 लाख थी। यानी बीते 15 वर्षों में शहर की आबादी में लगभग नौ लाख से अधिक की बढ़ोतरी हुई। वहीं मकानों और निर्माणों की संख्या भी दोगुनी से ज्यादा हो गई है।
इंदौर नगर निगम सीमा में मकान गणना के लिए बनाए गए 3898 गणना ब्लाकों में से अब तक 3660 से अधिक ब्लाकों का काम पूरा हो चुका है। अब तक के आंकड़ों के अनुसार शहरी सीमा में 8.08 लाख निर्माण चिन्हित किए गए हैं, जबकि 2011 की जनगणना में यह संख्या 3.96 लाख थी।
विशेषज्ञों के अनुसार निर्माण और आबादी में तेजी से हुई बढ़ोतरी का बड़ा कारण वर्ष 2014 में नगर निगम सीमा में 29 गांवों का शामिल होना भी है। इसके बाद वार्डों की संख्या 69 से बढ़कर 85 हो गई। वहीं बीते 15 वर्षों में सुपर कारिडोर, खंडवा रोड, देवास नाका, उज्जैन रोड, बायपास, देवगुराडिया, राऊ, एयरपोर्ट रोड आदि क्षेत्रों में तेजी से विकास हुआ और कई कालोनियों विकसित हुई।
इसके कारण यहां पर नए आवास बने। वहीं बारह से भी रोजगार और अन्य कार्य से बढ़ी संख्या में लोग इस अवधि में इंदौर आकर बसें हैं। नगर निगम आयुक्त नरेंद्रनाथ पांडे का कहना है कि मकानों की गणना का कार्य करीब 96 प्रतिशत हो चुका है और 30 मई तक यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
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