इंदौर क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वेलनेस सेंटर की फ्रैंचाइजी देने के नाम पर सवा करोड़ रुपये के करीब की धोखाधड़ी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस टीम ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए देश की राजधानी नई दिल्ली से संबंधित कंपनी के दो मुख्य निदेशकों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। इस पूरे फर्जीवाड़े में शामिल दो डॉक्टरों की भूमिका भी सामने आई है, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने डॉ. हरोर्स एस्थेटिक प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक फर्जी कंपनी का गठन किया था और इसके जरिए वे फ्रैंचाइजी बांटने के नाम पर लोगों को ठगने का एक बड़ा नेटवर्क संचालित कर रहे थे।
जब महिला पहुंची थाने
डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि गत 26 मई को इंदौर क्राइम ब्रांच के समक्ष एक पीड़ित महिला ने न्याय की गुहार लगाई थी। शिकायतकर्ता रितु मेहता, जो कि पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, उन्होंने लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि नई दिल्ली स्थित डॉ. हरोर्स एस्थेटिक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के कर्ताधर्ताओं ने उन्हें अपने झांसे में लिया था। आरोपियों ने महिला को वेलनेस सेंटर खोलने की फ्रैंचाइजी देने का प्रलोभन दिया था और इस झांसे में लेकर उनसे अलग-अलग किश्तों में कुल एक करोड़ 20 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि ऐंठ ली। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी न तो वेलनेस सेंटर शुरू हुआ और न ही पैसे वापस मिले, तब जाकर पीड़िता को अपने साथ हुई इस बड़ी धोखाधड़ी का अहसास हुआ।
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क्राइम ब्रांच की टीम का दिल्ली में छापा
सॉफ्टवेयर इंजीनियर महिला के साथ हुई सवा करोड़ रुपये की ठगी के इस मामले को इंदौर पुलिस ने अत्यंत गंभीरता से लिया। डीसीपी के निर्देशन में तत्काल क्राइम ब्रांच के अनुभवी पुलिस कर्मियों की एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस विशेष टीम को तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच करने के बाद तुरंत नई दिल्ली के लिए रवाना किया गया। दिल्ली पहुंची इंदौर क्राइम ब्रांच की टीम ने आरोपियों के संभावित ठिकानों और उनकी कंपनियों के कार्यालयों के बारे में स्थानीय स्तर पर खुफिया जानकारी जुटाई। सटीक इनपुट मिलने के बाद पुलिस टीम ने आरोपियों के विभिन्न ठिकानों पर एक साथ दबिश देना शुरू किया।
दो मुख्य निदेशकों की गिरफ्तारी
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कड़े प्रयासों और घेराबंदी के बाद टीम को इस मामले में सफलता हाथ लगी। पुलिस ने इस ठगी गिरोह से जुड़े दो मुख्य आरोपियों को दबोच लिया, जो इस फर्जी कंपनी में डायरेक्टर के पद पर काम कर रहे थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक की पहचान 48 वर्षीय देबदुलाल बनर्जी के रूप में हुई है, जो वर्तमान में सुपरटेक केपटाउन, सेक्टर चौहत्तर, नोएडा का निवासी है। वहीं दूसरे आरोपी की पहचान 39 वर्षीय राहुल सावेल के रूप में की गई है, जो नवादा, उत्तम नगर, नई दिल्ली का रहने वाला है।
फरार डॉक्टरों की तलाश
इस पूरे गिरोह के संचालन में दो अन्य मुख्य किरदारों की भूमिका भी उजागर हुई है। पुलिस के अनुसार इस मामले में डॉक्टर दंपत्ति नवनीत और विनीता भी बराबर के भागीदार हैं, जो फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं और उनकी सरगर्मी से तलाश की जा रही है। पकड़े गए दोनों निदेशकों को इंदौर लाकर न्यायालय के समक्ष पेश करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। क्राइम ब्रांच की टीम इन आरोपियों से रिमांड के दौरान कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि गिरोह के अन्य सक्रिय सदस्यों के बारे में पता लगाया जा सके और फरार डॉक्टर दंपत्ति के ठिकानों की जानकारी हासिल कर उन्हें भी जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जा सके।
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