Birthday Special: पहली फिल्म में काम करने के लिए जया प्रदा को मिले थे केवल दस रुपए, इस प्रकार चमकी किस्मत
इंटनेट डेस्क। बॉलीवुड अभिनेत्री जया प्रदा का आज जन्मदिन है। 63 वर्ष की हो चुकी जया प्रदा का जन्म आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव राजमुंदरी में आज ही के दिन यानी 03 अप्रेल 1962 को एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उनका मूल नाम ललिता रानी है। पिता कृष्णा तेलूगु फिल्मों के वितरक थे। आज हम आपको जया प्रदा से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।
जया प्रदा का रूझान बचपन से ही नृत्य की ओर था। इसी कारण मां नीलावनी ने नृत्य सीखने के लिए दाखिला दिला दिया। चौदह साल की उम्र में जयाप्रदा को अपने स्कूल में नृत्य कार्यक्रम पेश करने का मौका मिला। यहीं से जया प्रदा की किस्मत चमकी थी। कार्यक्रम के दौरान उनके नृत्य ने एक एक फिल्म निर्देशक का दिल जीत लिया। निर्देशक ने उन्हें अपनी फिल्म भूमिकोसम में उनसे नृत्य करने की पेशकश की।
माता-पिता के जोर देने पर जया प्रदा ने फिल्म में नृत्य करना स्वीकार कर लिया। इस फिल्म के लिए जयाप्रदा को केवल 10 रुपए का वेतन मिला। उनके तीन मिनट के नृत्य ने दक्षिण भारत के कई फिल्म निर्माता -निर्देशक का दिल जीत लिया। इसके बाद से उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका मिला। बाद फिल्मों में शानदार अभिनय के पर अपनी विशेष पहचान बनाई। उन्होंने बॉलीवुड की कई सुपरहिट फिल्मों में अपना जलवा दिखाया।
PC:jansatta
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इंटनेट डेस्क। बॉलीवुड अभिनेत्री जया प्रदा का आज जन्मदिन है। 63 वर्ष की हो चुकी जया प्रदा का जन्म आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव राजमुंदरी में आज ही के दिन यानी 03 अप्रेल 1962 को एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उनका मूल नाम ललिता रानी है। पिता कृष्णा तेलूगु फिल्मों के वितरक थे। आज हम आपको जया प्रदा से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं।
जया प्रदा का रूझान बचपन से ही नृत्य की ओर था। इसी कारण मां नीलावनी ने नृत्य सीखने के लिए दाखिला दिला दिया। चौदह साल की उम्र में जयाप्रदा को अपने स्कूल में नृत्य कार्यक्रम पेश करने का मौका मिला। यहीं से जया प्रदा की किस्मत चमकी थी। कार्यक्रम के दौरान उनके नृत्य ने एक एक फिल्म निर्देशक का दिल जीत लिया। निर्देशक ने उन्हें अपनी फिल्म भूमिकोसम में उनसे नृत्य करने की पेशकश की।
माता-पिता के जोर देने पर जया प्रदा ने फिल्म में नृत्य करना स्वीकार कर लिया। इस फिल्म के लिए जयाप्रदा को केवल 10 रुपए का वेतन मिला। उनके तीन मिनट के नृत्य ने दक्षिण भारत के कई फिल्म निर्माता -निर्देशक का दिल जीत लिया। इसके बाद से उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका मिला। बाद फिल्मों में शानदार अभिनय के पर अपनी विशेष पहचान बनाई। उन्होंने बॉलीवुड की कई सुपरहिट फिल्मों में अपना जलवा दिखाया।
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यह सम्मान 14 अगस्त 2026 को मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वायर में आयोजित एक विशेष समारोह में दिया जाएगा। यह सम्मान भारतीय सिनेमा में रानी मुखर्जी के बेहतरीन योगदान के साथ-साथ महिलाओं, बच्चों और समाज के वंचित वर्गों के लिए किए गए उनके लंबे सामाजिक कार्यों को मान्यता देता है।
13 से 23 अगस्त 2026 तक आयोजित होने वाला इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित भारतीय फिल्म समारोहों में से एक बन चुका है। यह फेस्टिवल भारतीय सिनेमा की बेहतरीन प्रतिभाओं को एक मंच पर लाने के साथ-साथ भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मज़बूत करता है और उन फिल्मों व कलाकारों का सम्मान करता है जिन्होंने दुनिया भर के दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी है।
करीब तीन दशक लंबे अपने करियर में रानी मुखर्जी भारतीय सिनेमा की सबसे सम्मानित और सफल अभिनेत्रियों में शामिल रही हैं। ब्लैक, नो वन किल्ड जेसिका, हिचकी, मर्दानी सीरीज़ और मिसेज़ चटर्जी वर्सेज़ नॉर्वे जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने महिलाओं के अधिकार, लैंगिक समानता, दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में शामिल करने और सामाजिक बदलाव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को बड़े पर्दे तक पहुंचाया है।
सिनेमा के अलावा रानी बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सामुदायिक विकास से जुड़े कई सामाजिक कार्यों का भी समर्थन करती रही हैं। यह समाज के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस सम्मान पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए रानी मुखर्जी ने कहा, “ला ट्रोब यूनिवर्सिटी से यह मानद डॉक्टर ऑफ लेटर्स सम्मान पाकर मैं बेहद विनम्र और गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। सिनेमा मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा शिक्षक रहा है। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि कहानियां लोगों के दिलों को जोड़ने, नई सोच पैदा करने और सकारात्मक बदलाव लाने की ताकत रखती हैं। इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह सम्मान मिलना इसे और भी खास बना देता है। मैं ला ट्रोब यूनिवर्सिटी और IFFM की दिल से आभारी हूं। मुझे अपने करियर में ऐसी कई प्रेरणादायक फिल्मों का हिस्सा बनने का मौका मिला, जिनके जरिए मैंने संघर्ष, जुनून और हर मुश्किल का सामना करने वाले इंसानी हौसले की कहानियां दुनिया तक पहुंचाईं। इंसानी कहानियां हमेशा मुझे भावुक करती रही हैं और सिनेमा की वजह से मुझे कई जिंदगियां जीने का अवसर मिला। मैं यह सम्मान अपने देश भारत और दुनिया भर के उन सभी लोगों को समर्पित करती हूं, जिनके प्यार और विश्वास ने मुझे एक अभिनेत्री बनाया और मेरी जिंदगी को इतना खूबसूरत बनाया।”
ला ट्रोब यूनिवर्सिटी के चांसलर द ऑनरेबल जॉन ब्रम्बी अ ओ ने कहा,”रानी मुखर्जी का काम सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा है। उनकी फिल्मों ने सामाजिक न्याय, समानता और समावेश जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। सिनेमा में उनके शानदार योगदान और समाज सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें इस सम्मान के लिए एक आदर्श व्यक्तित्व बनाती है। हमें उन्हें यह मानद उपाधि देकर और ला ट्रोब यूनिवर्सिटी परिवार में उनका स्वागत करके बेहद खुशी हो रही है।”
इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न की फेस्टिवल डायरेक्टर मितु भौमिक लांगे ने कहा, “इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न हमेशा उन कलाकारों का सम्मान करता है जिन्होंने भारतीय सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है और दुनिया भर के दर्शकों को प्रेरित किया है। रानी मुखर्जी अपनी पीढ़ी की सबसे बेहतरीन अभिनेत्रियों में से एक हैं। उनकी हर परफॉर्मेंस शानदार अभिनय और दमदार कहानी कहने का बेहतरीन उदाहरण रही है। हमें गर्व है कि ला ट्रोब यूनिवर्सिटी का यह सम्मान IFFM के मंच पर उन्हें दिया जाएगा। यह न सिर्फ फेस्टिवल बल्कि उन सभी लोगों के लिए गर्व का क्षण है जिन्होंने वर्षों से रानी मुखर्जी के भारतीय सिनेमा में योगदान की सराहना की है।”
2026 का इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न एक बार फिर भारतीय सिनेमा का भव्य उत्सव बनने जा रहा है। फिल्म स्क्रीनिंग, प्रीमियर, खास बातचीत और कई विशेष कार्यक्रमों के जरिए यह फेस्टिवल दुनिया भर के फिल्मकारों, कलाकारों और दर्शकों को एक साथ लाएगा।
यह सम्मान 14 अगस्त 2026 को मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वायर में आयोजित एक विशेष समारोह में दिया जाएगा। यह सम्मान भारतीय सिनेमा में रानी मुखर्जी के बेहतरीन योगदान के साथ-साथ महिलाओं, बच्चों और समाज के वंचित वर्गों के लिए किए गए उनके लंबे सामाजिक कार्यों को मान्यता देता है।
13 से 23 अगस्त 2026 तक आयोजित होने वाला इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित भारतीय फिल्म समारोहों में से एक बन चुका है। यह फेस्टिवल भारतीय सिनेमा की बेहतरीन प्रतिभाओं को एक मंच पर लाने के साथ-साथ भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मज़बूत करता है और उन फिल्मों व कलाकारों का सम्मान करता है जिन्होंने दुनिया भर के दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी है।
करीब तीन दशक लंबे अपने करियर में रानी मुखर्जी भारतीय सिनेमा की सबसे सम्मानित और सफल अभिनेत्रियों में शामिल रही हैं। ब्लैक, नो वन किल्ड जेसिका, हिचकी, मर्दानी सीरीज़ और मिसेज़ चटर्जी वर्सेज़ नॉर्वे जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने महिलाओं के अधिकार, लैंगिक समानता, दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में शामिल करने और सामाजिक बदलाव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को बड़े पर्दे तक पहुंचाया है।
सिनेमा के अलावा रानी बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सामुदायिक विकास से जुड़े कई सामाजिक कार्यों का भी समर्थन करती रही हैं। यह समाज के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस सम्मान पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए रानी मुखर्जी ने कहा, “ला ट्रोब यूनिवर्सिटी से यह मानद डॉक्टर ऑफ लेटर्स सम्मान पाकर मैं बेहद विनम्र और गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। सिनेमा मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा शिक्षक रहा है। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि कहानियां लोगों के दिलों को जोड़ने, नई सोच पैदा करने और सकारात्मक बदलाव लाने की ताकत रखती हैं। इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह सम्मान मिलना इसे और भी खास बना देता है। मैं ला ट्रोब यूनिवर्सिटी और IFFM की दिल से आभारी हूं। मुझे अपने करियर में ऐसी कई प्रेरणादायक फिल्मों का हिस्सा बनने का मौका मिला, जिनके जरिए मैंने संघर्ष, जुनून और हर मुश्किल का सामना करने वाले इंसानी हौसले की कहानियां दुनिया तक पहुंचाईं। इंसानी कहानियां हमेशा मुझे भावुक करती रही हैं और सिनेमा की वजह से मुझे कई जिंदगियां जीने का अवसर मिला। मैं यह सम्मान अपने देश भारत और दुनिया भर के उन सभी लोगों को समर्पित करती हूं, जिनके प्यार और विश्वास ने मुझे एक अभिनेत्री बनाया और मेरी जिंदगी को इतना खूबसूरत बनाया।”
ला ट्रोब यूनिवर्सिटी के चांसलर द ऑनरेबल जॉन ब्रम्बी अ ओ ने कहा,”रानी मुखर्जी का काम सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा है। उनकी फिल्मों ने सामाजिक न्याय, समानता और समावेश जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। सिनेमा में उनके शानदार योगदान और समाज सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें इस सम्मान के लिए एक आदर्श व्यक्तित्व बनाती है। हमें उन्हें यह मानद उपाधि देकर और ला ट्रोब यूनिवर्सिटी परिवार में उनका स्वागत करके बेहद खुशी हो रही है।”
इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न की फेस्टिवल डायरेक्टर मितु भौमिक लांगे ने कहा, “इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न हमेशा उन कलाकारों का सम्मान करता है जिन्होंने भारतीय सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है और दुनिया भर के दर्शकों को प्रेरित किया है। रानी मुखर्जी अपनी पीढ़ी की सबसे बेहतरीन अभिनेत्रियों में से एक हैं। उनकी हर परफॉर्मेंस शानदार अभिनय और दमदार कहानी कहने का बेहतरीन उदाहरण रही है। हमें गर्व है कि ला ट्रोब यूनिवर्सिटी का यह सम्मान IFFM के मंच पर उन्हें दिया जाएगा। यह न सिर्फ फेस्टिवल बल्कि उन सभी लोगों के लिए गर्व का क्षण है जिन्होंने वर्षों से रानी मुखर्जी के भारतीय सिनेमा में योगदान की सराहना की है।”
2026 का इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न एक बार फिर भारतीय सिनेमा का भव्य उत्सव बनने जा रहा है। फिल्म स्क्रीनिंग, प्रीमियर, खास बातचीत और कई विशेष कार्यक्रमों के जरिए यह फेस्टिवल दुनिया भर के फिल्मकारों, कलाकारों और दर्शकों को एक साथ लाएगा।
">रानी मुखर्जी के फैंस हो जाएंगे खुश, इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न 2026 में इसलिए किया जाएगा सम्मानित
Rani Mukerji IFFM 2026: इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न (IFFM) को यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि मशहूर अभिनेत्री और समाजसेवी रानी मुखर्जी को 2026 के फेस्टिवल के दौरान ला ट्रोब यूनिवर्सिटी की ओर से प्रतिष्ठित ऑनरेरी डॉक्टर ऑफ लेटर्स (मानद डॉक्टरेट) की उपाधि से सम्मानित किया जाएगा।
यह सम्मान 14 अगस्त 2026 को मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वायर में आयोजित एक विशेष समारोह में दिया जाएगा। यह सम्मान भारतीय सिनेमा में रानी मुखर्जी के बेहतरीन योगदान के साथ-साथ महिलाओं, बच्चों और समाज के वंचित वर्गों के लिए किए गए उनके लंबे सामाजिक कार्यों को मान्यता देता है।
13 से 23 अगस्त 2026 तक आयोजित होने वाला इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित भारतीय फिल्म समारोहों में से एक बन चुका है। यह फेस्टिवल भारतीय सिनेमा की बेहतरीन प्रतिभाओं को एक मंच पर लाने के साथ-साथ भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मज़बूत करता है और उन फिल्मों व कलाकारों का सम्मान करता है जिन्होंने दुनिया भर के दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी है।
करीब तीन दशक लंबे अपने करियर में रानी मुखर्जी भारतीय सिनेमा की सबसे सम्मानित और सफल अभिनेत्रियों में शामिल रही हैं। ब्लैक, नो वन किल्ड जेसिका, हिचकी, मर्दानी सीरीज़ और मिसेज़ चटर्जी वर्सेज़ नॉर्वे जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने महिलाओं के अधिकार, लैंगिक समानता, दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में शामिल करने और सामाजिक बदलाव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को बड़े पर्दे तक पहुंचाया है।
सिनेमा के अलावा रानी बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सामुदायिक विकास से जुड़े कई सामाजिक कार्यों का भी समर्थन करती रही हैं। यह समाज के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस सम्मान पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए रानी मुखर्जी ने कहा, “ला ट्रोब यूनिवर्सिटी से यह मानद डॉक्टर ऑफ लेटर्स सम्मान पाकर मैं बेहद विनम्र और गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। सिनेमा मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा शिक्षक रहा है। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि कहानियां लोगों के दिलों को जोड़ने, नई सोच पैदा करने और सकारात्मक बदलाव लाने की ताकत रखती हैं। इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह सम्मान मिलना इसे और भी खास बना देता है। मैं ला ट्रोब यूनिवर्सिटी और IFFM की दिल से आभारी हूं। मुझे अपने करियर में ऐसी कई प्रेरणादायक फिल्मों का हिस्सा बनने का मौका मिला, जिनके जरिए मैंने संघर्ष, जुनून और हर मुश्किल का सामना करने वाले इंसानी हौसले की कहानियां दुनिया तक पहुंचाईं। इंसानी कहानियां हमेशा मुझे भावुक करती रही हैं और सिनेमा की वजह से मुझे कई जिंदगियां जीने का अवसर मिला। मैं यह सम्मान अपने देश भारत और दुनिया भर के उन सभी लोगों को समर्पित करती हूं, जिनके प्यार और विश्वास ने मुझे एक अभिनेत्री बनाया और मेरी जिंदगी को इतना खूबसूरत बनाया।”
ला ट्रोब यूनिवर्सिटी के चांसलर द ऑनरेबल जॉन ब्रम्बी अ ओ ने कहा,”रानी मुखर्जी का काम सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा है। उनकी फिल्मों ने सामाजिक न्याय, समानता और समावेश जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। सिनेमा में उनके शानदार योगदान और समाज सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें इस सम्मान के लिए एक आदर्श व्यक्तित्व बनाती है। हमें उन्हें यह मानद उपाधि देकर और ला ट्रोब यूनिवर्सिटी परिवार में उनका स्वागत करके बेहद खुशी हो रही है।”
इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न की फेस्टिवल डायरेक्टर मितु भौमिक लांगे ने कहा, “इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न हमेशा उन कलाकारों का सम्मान करता है जिन्होंने भारतीय सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है और दुनिया भर के दर्शकों को प्रेरित किया है। रानी मुखर्जी अपनी पीढ़ी की सबसे बेहतरीन अभिनेत्रियों में से एक हैं। उनकी हर परफॉर्मेंस शानदार अभिनय और दमदार कहानी कहने का बेहतरीन उदाहरण रही है। हमें गर्व है कि ला ट्रोब यूनिवर्सिटी का यह सम्मान IFFM के मंच पर उन्हें दिया जाएगा। यह न सिर्फ फेस्टिवल बल्कि उन सभी लोगों के लिए गर्व का क्षण है जिन्होंने वर्षों से रानी मुखर्जी के भारतीय सिनेमा में योगदान की सराहना की है।”
2026 का इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न एक बार फिर भारतीय सिनेमा का भव्य उत्सव बनने जा रहा है। फिल्म स्क्रीनिंग, प्रीमियर, खास बातचीत और कई विशेष कार्यक्रमों के जरिए यह फेस्टिवल दुनिया भर के फिल्मकारों, कलाकारों और दर्शकों को एक साथ लाएगा।
CBFC,CBFC (Censor Board Of Film Certification),Censor,Censor Board of Film Certification,News,Ramayana,Ramayana Part: I,Ranbir Kapoor,Ravi Dubey,Sai Pallavi,Sunny Deol,Trailer,Yash">
CBFC,CBFC (Censor Board Of Film Certification),Censor,Censor Board of Film Certification,News,Ramayana,Ramayana Part: I,Ranbir Kapoor,Ravi Dubey,Sai Pallavi,Sunny Deol,Trailer,Yash">BREAKING: 4-minute-15-second-long trailer of Ramayana passed by CBFC with a ‘U’ certificate
A few days remain before the release of the Ramayana trailer, and excitement is tremendous. Today, the Central Board of Film Certification (CBFC) passed the trailer and in this article, Bollywood Hungama will share interesting information about the same.
BREAKING: 4-minute-15-second-long trailer of Ramayana passed by CBFC with a ‘U’ certificate
The CBFC passed the Ramayana trailer today, July 15, with a ‘U’ certificate. Since the film’s release is more than 3 months away, many would assume that it’ll be a short promo, lasting less than 2 ½ minutes or 3 minutes. However, that’s not the case. The run time of the trailer is a whopping 4 minutes and 15 seconds.
The website of CBFC lists two entries for the Ramayana trailer. One is called ‘Trailer – Ramayana 3D’ and the other is called ‘Theatrical Trailer – Ramayana 3D’. The former is 4 minutes and 15 seconds long, while the duration of the latter is 4 minutes. It now remains to be seen which one drops digitally.
This will be the third asset that would be released by the makers of Ramayana. The introduction asset was unveiled last year on July 3. Earlier this year, on April 2, the makers introduced the teaser called ‘Rama’ on the occasion of Hanuman Jayanti, focusing on the lead character of Lord Rama, played by Ranbir Kapoor. The ‘Rama’ asset was 2 minutes and 38 seconds long and also received a ‘U’ certificate.
Ramayana stars Ranbir Kapoor as Lord Rama, Sai Pallavi as Sita, Yash as Ravana, Sunny Deol as Lord Hanuman and Ravie Dubey as Lakshman. It is directed by Nitesh Tiwari of Dangal (2016) fame and produced by Namit Malhotra. The music is composed by A R Rahman and Hans Zimmer. It’s a two-part saga with the first part releasing on Diwali 2026. As for the second part, it’ll arrive on the big screen on Diwali 2027.
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Bollywood music, hindi cinema, music composition, vocal recording, story behind the iconic senorita track, senorita song, bollywood film, zindagi na milegi dobara movie, music composer shankar mahadevan, senorita, zindagi na milegi dobara, shankar mahadevan, abhay deol, hrithik roshan, farhan akhtar, सेनोरिटा, गाना सेनोरिटा, जिंदगी न मिलेगी दोबारा, अभय देओल, ऋतिक रोशन, फरहान अख्तर, कटरीना कैफ, शंकर महादेवन">ZNMD: शंकर महादेवन ने बताई ‘सेनोरिटा’ गाने के पीछे की मजेदार कहानी, बोले- ‘अभय देओल जब सिर्फ रिहर्सल…’
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आज बुधवार को रोमांटिक-कॉमेडी ड्रामा फिल्म ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ की रिलीज को पूरे 15 साल हो गए हैं। संगीतकार और गायक शंकर महादेवन ने इसके प्रसिद्ध गाने ‘सेनोरीटा’ को लेकर एक दिलचस्प खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे ‘सेनोरीटा’ गाने के निर्माण के दौरान घबराए हुए अभिनेता अभय देओल से यह गाना गवाया था।
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जिंदगी न मिलेगी दोबारा
– फोटो : सोशल मीडिया
‘सेनोरीटा’ को लेकर दिलचस्प खुलासा
शंकर महादेवन ने बताया कि ‘सेनोरीटा’ गाना फिल्म की कहानी के हिसाब से तैयार किया जाना था। कहानी में तीन दोस्त (ऋतिक, फरहान और अभय) थोड़े नशे में स्पेन के एक गांव से गुजर रहे होते हैं। वहां बज रहे स्पेनिश संगीत को सुनकर वे भी झूमने लगते हैं और स्पेनिश धुन में भारतीय स्टाइल का तड़का लगाते हैं।
जब संगीतकार जोड़ी शंकर-एहसान-लॉय ने इस गाने पर काम शुरू किया, तो उन्हें लगा कि यह गाना बहुत बड़ा हिट साबित हो सकता है। मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने इस गाने के लिए ‘सेनोरीटा’ शब्द का सुझाव दिया था।
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फिल्म ‘जिंदगी न मिलेगी दोबारा’
– फोटो : सोशल मीडिया
घवराए हुए थे अभय
आईएएनएस के अनुसार, शंकर महादेवन ने सोचा कि क्यों न यह गाना तीनों अभिनेताओं की असली आवाज में ही रिकॉर्ड किया जाए। फरहान अख्तर पहले से ही गाते आए हैं, इसलिए उनके लिए यह आसान था। ऋतिक रोशन की आवाज भी बहुत सुरीली थी। लेकिन अभय देओल बिल्कुल नए थे और गाने को लेकर बेहद घबराए हुए थे।
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फिल्म ‘जिंदगी न मिलेगी दोबारा’
– फोटो : सोशल मीडिया
शंकर महादेवन ने चली चाल
अभय देओल गाना गाने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे। तब शंकर महादेवन ने उनके साथ एक छोटा सा मजाक किया। उन्होंने अभय से कहा, ‘तुम बस स्टूडियो आ जाओ। हम कोई असली रिकॉर्डिंग नहीं कर रहे हैं, यह सिर्फ एक रिहर्सल है। माइक के सामने मजे करो। अगर सब ठीक रहा, तो असली रिकॉर्डिंग किसी और दिन करेंगे।’
अभय मान गए, लेकिन वे फिर भी डरे हुए थे। जब वे रिकॉर्डिंग रूम में गए, तो शंकर महादेवन ने चुपके से रिकॉर्डिंग चालू कर दी। उन्होंने अभय से कहा, ‘मैं जो गा रहा हूं, तुम बस मेरे पीछे-पीछे उसे दोहराओ।’ जब अभय देओल गाना गाकर बाहर आए, तो शंकर महादेवन ने हंसते हुए कहा, ‘हां भाई, गाना रिकॉर्ड हो गया।’
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जिंदगी न मिलेगी दोबारा
– फोटो : यूट्यूब ग्रैब
हैरान हुए अभय
अभय हैरान रह गए और उन्होंने शंकर से पूछा, ‘अरे सच में? पर मुझे असली रिकॉर्डिंग के लिए कब आना है?’ तब शंकर ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, ‘रिकॉर्डिंग तो हो चुकी है। अब सीधे फाइनल गाना ही सुनना।’ यह सुनकर अभय हैरान भी हुए और बहुत खुश भी हुए।
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