भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व विकेटकीपर और 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य सैयद किरमानी एक कार्यक्रम के सिलसिले में इंदौर पहुंचे। इस दौरान अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने अपने दौर की क्रिकेट और आज के खेल के बीच आए बड़े बदलावों पर खुलकर बात की।
किरमानी ने कहा कि उनके समय की क्रिकेट आज से बिल्कुल अलग थी। सुविधाएं सीमित थीं और खिलाड़ियों को आज जैसी पेशेवर मदद नहीं मिलती थी। उन्होंने कहा, हमारे साथ कोई कोच नहीं होता था। कोई यह बताने वाला नहीं होता था कि हमारी कमियां क्या हैं और किस पहलू में सुधार की जरूरत है। तकनीकी चीजें भी हमें खुद समझनी पड़ती थीं। हमने 1983 का विश्व कप बिना कोच के जीता था।”
उन्होंने बताया कि उस दौर में स्टेडियम और ड्रेसिंग रूम भी बेहद सामान्य होते थे। मैदानों की स्थिति भी आज जैसी नहीं थी। तब मैदान कम हरे-भरे होते थे, सुविधाएं भी सीमित थीं, लेकिन अब क्रिकेट पूरी तरह बदल चुकी है। खिलाड़ियों को हर तरह का सपोर्ट और आधुनिक सुविधाएं मिल रही हैं।
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एक सवाल के जवाब में किरमानी ने महेंद्र सिंह धोनी को अपना पसंदीदा विकेटकीपर बताया। उन्होंने कहा, “धोनी बेहतरीन विकेटकीपर रहे हैं। उन्होंने खूब नाम कमाया। वे शानदार बल्लेबाज भी थे और कप्तान के तौर पर भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने यह भी कहा कि बॉब टेलर, वसीम बारी और एलन नॉट भी उनके पसंदीदा विकेटकीपर रहे हैं। “इन सभी से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला,” उन्होंने कहा।
किरमानी पर पुस्तक लिखने वाले लेखक दक्षेश पाठक ने बताया कि किरमानी ने भारत के लिए 88 टेस्ट मैच खेले हैं। उन्होंने कहा कि जिन गेंदबाजों के साथ किरमानी ने विकेटकीपिंग की, वैसी चुनौती आज के दौर में कम देखने को मिलती है। पाठक ने कहा कि भगवत चंद्रशेखर जैसे गेंदबाज के पीछे विकेटकीपिंग करना आसान नहीं था। उनकी गेंदों को पकड़ना किसी भी विकेटकीपर के लिए बड़ी चुनौती होती थी। उन्होंने बताया कि किरमानी पर लिखी किताब को तैयार करने में छह साल लगे। इस दौरान 40 से अधिक लोगों के साक्षात्कार लिए गए। “किरमानी जितने शानदार खिलाड़ी रहे हैं, उतने ही बेहतर इंसान भी हैं।
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