स्वच्छता रैंकिंग का सर्वे इंदौर में जारी है। बीते चार दिनों से टीम इंदौर के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर स्वच्छता का आकलन कर रही है, लेकिन इस बार सर्वे के दौरान भी अतिरिक्त स्वच्छता पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जबकि बीते वर्षों में सर्वे के दौरान नगर निगम का अमला मुस्तैद रहता आया है। इस बार नागरिकों के फीडबैक में भी इंदौर दूसरे नंबर पर है। इस बार इंदौर का मुकाबला सूरत, नवी मुंबई और अहमदाबाद जैसे शहरों से है। ये शहर स्वच्छता प्रीमियर लीग में शामिल हैं और इनमें सफाई को लेकर कई नवाचार हुए हैं, जबकि इंदौर के प्रति भागीरथपुरा दूषित पेयजल कांड के कारण नकारात्मक माहौल बना है।
दरअसल, इंदौर में स्वच्छता रैंकिंग का सर्वे करने वाली टीम उस समय आई है, जब शहर में जलसंकट छाया हुआ है। मोहन यादव भी रविवार को इंदौर में बैठक के दौरान अधिकारियों को जलसंकट दूर करने के निर्देश दे चुके हैं। जलसंकट के साथ स्वच्छता पर फोकस करना इस बार चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
सर्वेक्षण के लिए शहर की सड़कों के डिवाइडर पेंट किए गए हैं। सार्वजनिक स्थलों की भी सफाई की गई है। थ्री-आर पद्धति पर शहर में गार्डन भी तैयार किए गए हैं। मापदंडों के अनुसार इस बार नगर निगम की जिम्मेदारी वाले क्षेत्र देपालपुर को भी साफ किया गया है। वहां भी नगर निगम का अमला जुटा हुआ है। बीते चार दिनों से सर्वे टीम सार्वजनिक शौचालयों, सड़कों की सफाई, सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता सहित अन्य मापदंडों के आधार पर शहर की सफाई का आकलन कर रही है। दो दिन बाद सर्वे पूरा होने के बाद टीम लौट सकती है।
आपको बता दें कि इस वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए कुल 12,500 अंक निर्धारित किए गए हैं।जीरो डस्टबिन सिटी, ओडीएफ (ODF) फ्री सिटी, डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन और कचरे के पृथक्करण (सेग्रिगेशन) के मामले में इंदौर आगे है, लेकिन कचरे के पुनः उपयोग (रीसाइक्लिंग एवं रिसोर्स रिकवरी) के मामले में अन्य शहरों ने बेहतर काम किया है। इंदौर लगातार आठ बार स्वच्छता रैंकिंग में प्रथम स्थान प्राप्त कर चुका है और पिछले वर्ष स्वच्छता प्रीमियर लीग में भी पुरस्कार हासिल कर चुका है।
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