इंदौर का संभागायुक्त पद भी तबादलों की तेजी का शिकार हो चुका है। बीते पंद्रह वर्षों में तबादलों की यह परंपरा रही है कि इंदौर में संभागायुक्त दो से तीन साल तक पद पर बने रहे हैं, लेकिन बीते तीन वर्षों में तीन संभागायुक्त बदल गए।
निवर्तमान संभागायुक्त सुदाम खाड़े का तो एक साल का कार्यकाल भी पूरा नहीं हुआ था और उनका तबादला भोपाल हो गया। अब भास्कर लाक्षाकार को जिम्मेदारी मिली है। देखना दिलचस्प होगा कि वे अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा करते हैं या फिर उनका तबादला भी जल्दी हो जाएगा।
दुबे रहे पांच साल तक इंदौर संभागायुक्त
आईएएस संजय दुबे 3 मार्च 2013 को इंदौर के संभागायुक्त बने और 30 अप्रैल 2018 तक इस कुर्सी पर टिके रहे। वे पांच वर्षों तक इंदौर के संभागायुक्त रहे। उनके कार्यकाल में अंगदान, ग्रामीण इलाकों को खुले में शौच से मुक्ति, ज्ञानदान सहित कई प्रोजेक्ट चले और सफल भी रहे।
आकाश त्रिपाठी भी 18 माह तक संभागायुक्त रहे। तब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। उनके कार्यकाल में सरदार सरोवर बांध भरने के कारण नर्मदा नदी किनारे के गांवों में आई डूब और विस्थापन का काम हुआ। हालांकि भाजपा की सरकार आने के बाद उनकी भी रवानगी हो गई और पवन कुमार शर्मा संभागायुक्त बने। वे भी ढाई साल तक इस पद पर रहे।
साढ़े छह माह में हो गया माल सिंह का तबादला
इंदौर में बीते वर्षों में तीन संभागायुक्त बदल चुके हैं। सबसे तेज तबादला माल सिंह का हुआ। वे 1 अगस्त 2023 को इंदौर के संभागायुक्त बने और 12 मार्च 2024 को उनका तबादला हो गया। वे साढ़े छह माह तक संभागायुक्त रहे। उनकी रवानगी के बाद दीपक सिंह संभागायुक्त बने, लेकिन वे भी तीन साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। डेढ़ साल में ही उनका तबादला हो गया। उनके स्थान पर आए सुदाम खाड़े भी सालभर का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए और उनका भी तबादला हो गया।
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