मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने विजयनगर क्षेत्र में हुए अवंतिका गैस लाइन ब्लास्ट मामले में जूनी इंदौर एसडीएम घनश्याम धनगर द्वारा प्रस्तुत किए गए झूठे शपथपत्र पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। न्यायालय ने प्रशासनिक लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम को स्वयं कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश जारी किया है।
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15 लाख से अधिक का बिल बन गया
विजयनगर इलाके के वार्ड 31 में 23 जून को गैस पाइपलाइन के ऊपर बोरिंग कार्य के दौरान भीषण विस्फोट हुआ था। इस हादसे में 4 लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे। घटना के पश्चात अधिवक्ता रितेश इनानी ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर पीड़ितों के लिए निशुल्क इलाज और मुआवजे की मांग की थी। हादसे में गंभीर रूप से झुलसी मरीज झिनी झाला को उपचार के लिए अहमदाबाद के जायडस अस्पताल भेजा गया, जहां उनके इलाज का व्यय 15 लाख रुपये से अधिक हो चुका है।
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प्रशासनिक दावों की पोल खुली
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट की खंडपीठ को सूचित किया कि जायडस अस्पताल लगातार बकाया 15 लाख रुपये के भुगतान के लिए पत्र भेज रहा है, परंतु अब तक 1 रुपया भी जारी नहीं किया गया है। इसके विपरीत, एसडीएम घनश्याम धनगर ने कोर्ट में शपथपत्र प्रस्तुत कर यह दावा किया था कि न्यायालय के आदेशानुसार मरीज के इलाज का पूरा खर्च और अस्पताल का शुल्क चुका दिया गया है तथा परिजन द्वारा किए गए व्यय की जांच कर राशि लौटा दी गई है।
न्यायालय का कड़ा रुख
प्रकरण की सुनवाई कर रहे जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की पीठ ने प्रशासनिक अधिकारियों की इस कार्यशैली पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त तय करते हुए एसडीएम घनश्याम धनगर को स्वयं उपस्थित रहकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि अन्य घायलों को भी अपने इलाज का खर्च स्वयं वहन करना पड़ रहा है तथा प्रशासन द्वारा अब तक कोई मुआवजा प्रदान नहीं किया गया है।
जिम्मेदार कौन… पार्षद, इंजीनियर या अधिकारी
घटना के संबंध में जांच रिपोर्ट के आधार पर वार्ड 31 के पार्षद बालमुकुंद सोनी पर भी प्रकरण दर्ज किया गया है। हालांकि, सुनवाई के दौरान पार्षद के अधिवक्ता ने पक्ष रखा कि इस लापरवाही के लिए संबंधित इंजीनियर और अधिकारी उत्तरदायी हैं। कोर्ट ने पार्षद से भी इस संबंध में जवाब तलब किया है।
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