इंदौर में पिछले दो दिनों से जारी आंधी-तूफान और बेमौसम बारिश ने पूरे शहर की व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है। तेज हवाओं के कारण शहर में बड़े पैमाने पर पेड़ उखड़ गए, जबकि कई जगहों पर टीन-टप्पर, होर्डिंग, पोस्टर और बैनर उड़ गए। इस स्थिति के कारण जगह-जगह ट्रैफिक जाम और जलभराव जैसी समस्याएं देखने को मिलीं, जिसने प्रशासनिक और नगर निगम के दावों की परीक्षा ली।
दो दिन में ही 40 बड़ी शिकायतें पहुंची
राहत की बात यह रही कि नगर निगम प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए तुरंत कदम उठाए। निगम के अनुसार, शहर में 40 से अधिक स्थानों से शिकायतें प्राप्त हुईं, जिन्हें आधुनिक उपकरणों और संसाधनों की मदद से तुरंत दूर किया गया। सड़कों पर गिरे पेड़ों और मलबे को हटाकर आवागमन को सुचारू रूप से बहाल किया गया। सोमवार को दोपहर तीन बजे के बाद अचानक आए अंधड़ और बारिश ने जो उथल-पुथल मचाई थी, वैसी ही स्थिति मंगलवार को भी बनी रही।
चुनौतियों से निपटने के लिए झोनवार दलों का गठन किया
भविष्य में वर्षा और आंधी-तूफान की चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपटने के लिए निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। इसके तहत सभी जोनों में वर्षाकाल की व्यवस्थाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विशेष झोनवार दल गठित किए गए हैं। प्रत्येक जोन में संबंधित जोनल अधिकारी को इस दल का प्रमुख बनाया गया है। इसके अलावा क्षेत्रीय स्वास्थ्य अधिकारी को उपदल प्रमुख तथा सहायक यंत्री एवं उपयंत्री को दल के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है।
मानसून पूर्व तैयारियों को लेकर कड़े निर्देश
गठित किए गए इन दलों को अपने-अपने क्षेत्रों में मानसून से पहले सभी आवश्यक कार्य समय सीमा में पूरे करने और उनकी लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने स्पष्ट किया है कि वर्षा ऋतु शुरू होने से पहले शहर के सभी बड़े नालों, नालियों और चेम्बरों की व्यापक सफाई की जाएगी और उनमें जमी गाद को हटाने का काम प्राथमिकता के आधार पर होगा। मुख्य मार्गों पर स्थित जल निकासी वाले चेम्बरों की विशेष सफाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि पानी का भराव न हो।
संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर
प्रशासन ने शहर की पुलियाओं, जल निकासी पाइप लाइनों और ड्रेनेज नेटवर्क के परीक्षण और सफाई के भी आदेश दिए हैं। निगमायुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि शहर के उन सभी संवेदनशील और निचले इलाकों की पहचान की जाए, जहां अत्यधिक बारिश या बाढ़ की स्थिति बनने की आशंका रहती है। इन क्षेत्रों से पानी की त्वरित निकासी की व्यवस्था पहले से ही सुनिश्चित करने को कहा गया है। साथ ही जरूरत पड़ने पर वहां रहने वाले नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उनके अस्थायी ठहराव के लिए उपयुक्त स्थलों का चयन करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त होने वाली सड़कों की मरम्मत और रखरखाव के लिए भी अधिकारियों को समय रहते सुधारात्मक कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।
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