इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा गुलमोहर कॉम्प्लेक्स में विस्थापित परिवारों को पुनर्वासित करने के फैसले के विरोध में वहां के स्थानीय नागरिकों ने लामबंद होना शुरू कर दिया है। रहवासी संघ के अध्यक्ष रौनक राय के नेतृत्व में स्थानीय निवासियों ने इस शासकीय निर्णय के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया है। आज सभी रहवासियों ने कॉम्प्लेक्स के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की। क्षेत्रीय विधायक रमेश मेंदोला रहवासियों से बात करने पहुंचे और उनकी मांगों पर आईडीए में बात करने का आश्वासन दिया। विधायक ने कहा कि जल्द ही बीच का रास्ता निकाला जाएगा और रहवासियों को आने वाली परेशानियों से बचाया जाएगा।
रहवासियों ने सुझाए विकल्प
स्थानीय रहवासी संघ द्वारा दी गई तकनीकी जानकारी के अनुसार, गुलमोहर कॉम्प्लेक्स मूल रूप से एलआईजी श्रेणी की आवासीय योजना है, जिसमें कुल 334 फ्लैट्स निर्मित हैं। वर्तमान में इनमें से केवल 90 फ्लैट्स ही रिक्त हैं, जिनका क्षेत्रफल 667 वर्ग फीट है। इसके विपरीत, जिन विस्थापित परिवारों को यहां लाकर बसाने की योजना बनाई जा रही है, उनकी कुल संख्या 200 से भी अधिक है। रहवासियों का तर्क है कि इतने कम फ्लैट्स में इतने अधिक परिवारों को समाहित करना व्यावहारिक रूप से पूरी तरह असंभव है और इस जबरन व्यवस्था के कारण भविष्य में गंभीर कानूनी पेच और विवाद उत्पन्न होना तय है। इस समस्या के समाधान के रूप में रहवासियों ने प्रशासनिक अधिकारियों को एक बेहतर विकल्प भी सुझाया है। नागरिकों के मुताबिक, इस कॉम्प्लेक्स के बिल्कुल नजदीक ही नवनिर्मित अमलतास कॉम्प्लेक्स स्थित है, जहां 550 वर्ग फीट के लगभग 450 फ्लैट पूरी तरह से खाली पड़े हैं। यह एक बहुमंजिला और पूर्णतः आधुनिक इमारत है जो नई होने के साथ-साथ खाली भी है, इसलिए विस्थापितों के पुनर्वास के दृष्टिकोण से यह हर तरह से उपयुक्त है। रहवासियों की इस दलील और सुझाव पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने गंभीरता से विचार करने का भरोसा दिलाया है।
जर्जर बुनियादी सुविधाएं और रखरखाव पर उठते गंभीर सवाल
आंदोलन कर रहे नागरिकों ने इंदौर विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और निर्माण गुणवत्ता पर भी बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। निवासियों का कहना है कि गुलमोहर कॉम्प्लेक्स में पहले से ही रहने वाले लोग पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं और इमारतों में लगी लिफ्ट भी आए दिन तकनीकी खराबी के कारण बंद रहती हैं। नागरिकों ने आरोप लगाया कि प्राधिकरण कई साल से न बिकने वाले इन फ्लैट्स को विस्थापितों को सौंपकर अपनी नाकामियों और जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ना चाहता है। इसके अतिरिक्त, एक बड़ी व्यावहारिक समस्या यह भी है कि परिसर में पानी की सुचारू आपूर्ति बढ़ाने के लिए भी कोई लिखित गारंटी देने के लिए प्राधिकरण फिलहाल तैयार नहीं दिख रहा है।
विस्थापित होने वाले परिवारों को मिलते हैं ईडब्ल्यूएस के मकान
प्रशासनिक मामलों के जानकारों का इस विषय में स्पष्ट मानना है कि अब तक की व्यवस्था के अनुसार शासकीय योजनाओं में विस्थापित होने वाले परिवारों को केवल ईडब्ल्यूएस यानी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की श्रेणी के छोटे मकान ही आवंटित किए जाते रहे हैं। यदि इस मामले में नियमों को शिथिल कर गुलमोहर कॉम्प्लेक्स जैसे बड़े एलआईजी फ्लैटों में इन्हें बसाया जाता है, तो यह प्रशासनिक इतिहास में एक ऐसी गलत और नई परिपाटी की शुरुआत होगी, जिससे भविष्य में मध्य प्रदेश के अन्य शहरों के विस्थापित भी सरकार से बड़े फ्लैटों की मांग करने लगेंगे।
सोमवार से चल रहा प्रदर्शन
इससे पहले सोमवार और मंगलवार को बड़ी संख्या में रहवासी एकत्र होकर इंदौर विकास प्राधिकरण कार्यालय भी गए थे। वहां आयोजित जनसुनवाई के दौरान नागरिकों ने प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी परिक्षित झाडे और संभागायुक्त सुदामा खाडे को एक लिखित ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं थी। प्रदर्शनकारी नागरिकों ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी थी कि यदि प्राधिकरण ने अपनी इस मनमानी नीति को तुरंत नहीं रोका, तो आने वाले दिनों में स्थानीय स्तर पर चरणबद्ध तरीके से आंदोलन किया जाएगा, जिसमें भूख हड़ताल और पुतला दहन जैसे उग्र कदम शामिल होंगे।
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