इंदौर के विकास को लेकर की जा रही उपेक्षा को लेकर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने विकास कार्यों की देरी पर सवाल उठाए, हालांकि इस पत्र को लेकर मंत्री विजयवर्गीय से जब सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।
उन्होंने कहा कि इंदौर के साथ हो रही उपेक्षा से मैं आहत हूं। ढाई वर्षों में केवल असहयोग और उपेक्षा ही मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो जनता के मुद्दों को सार्वजनिक मंचों पर उठाना उनकी मजबूरी होगी। उनकी इस चिट्ठी के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। दरअसल, मंत्री विजयवर्गीय कई बार मंचों से अधिकारियों के सहयोग नहीं करने जैसे मुद्दे उठा चुके हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी में इंदौर के विकास कार्यों के पिछड़ने के कारण गिनाए और कहा कि इस साल इंदौर में जल संकट से लोग परेशान रहे, लेकिन सरकार की ओर से कोई विशेष राहत पैकेज नहीं दिया गया। उन्होंने पीथमपुर की तुलना में उज्जैन के विक्रमपुरी को अधिक सुविधाएं दिए जाने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पीथमपुर में कई बड़ी कंपनियां हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर की टेस्टिंग लैब और प्रोडक्ट सर्टिफिकेशन सेंटर अब तक स्थापित नहीं किया गया।
मंत्री विजयवर्गीय ने अब तक मास्टर प्लान की घोषणा नहीं किए जाने पर कहा कि इसे दो साल पहले नगरीय प्रशासन विभाग की ओर से सरकार को भेजा जा चुका है। इस संबंध में अधिकारियों के साथ दो बार उच्चस्तरीय बैठक भी हो चुकी है, लेकिन अब तक मास्टर प्लान जारी नहीं हुआ। आखिर शहर के विकास से जुड़ी इस महत्वपूर्ण योजना में इतनी देरी क्यों की जा रही है?
पत्र में उन्होंने यह भी कहा कि सिंहस्थ से पहले उज्जैन के अलावा इंदौर और आसपास के शहरों में भी सिंहस्थ मद से विकास कार्य कराए जाते रहे हैं, लेकिन इस बार इंदौर के लिए इस मद से कोई राशि जारी नहीं की गई।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पत्र लिखने के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का भी बयान आया है। उन्होंने कहा, “मैं आपकी पीड़ा समझ सकता हूं। समय का फेर है। मेरी सहानुभूति आपके साथ है।”
मंत्री विजयवर्गीय के पत्र के बाद राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने कहा कि यदि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इंदौर की उपेक्षा से आहत हैं, तो फिर जबलपुर और महाकौशल में तो बगावत की स्थिति होना चाहिए।
पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा, “ठाकुर के हाथ कटे हैं। उन्हें गब्बर को काबू में करने के लिए वीरू और जय को भेजना चाहिए।” वर्मा ने यह भी कहा कि जब पावर नहीं है, तो मंत्री विजयवर्गीय को इस्तीफा देकर पितृ पर्वत पर आराम करना चाहिए।
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