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Indore News: शहर की सड़कों पर “काल” बनकर दौड़ रहे निगम के टैंकर, आरटीओ-ट्रैफिक पुलिस सबने आंखें मूंदी

Indore News: शहर की सड़कों पर “काल” बनकर दौड़ रहे निगम के टैंकर, आरटीओ-ट्रैफिक पुलिस सबने आंखें मूंदी

इंदौर नगर निगम की लापरवाही और कबाड़ हो चुके टैंकरों के संचालन ने एक बार फिर शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में पटेल पुल पर नगर निगम में अटैच एक पानी के टैंकर से हुआ भीषण हादसा कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी नगर निगम के काम में लगे कई अनियंत्रित टैंकर मासूम लोगों की जान तक ले चुके हैं। इसके बावजूद हर बड़े हादसे के बाद नगर निगम प्रशासन गहरी नींद सोया रहता है। मामलों को दबा दिया जाता है और कभी इस बात की जमीनी जांच नहीं की जाती कि सड़कों पर दौड़ रही गाड़ी और उसे चलाने वाला ड्राइवर नियमों के तहत सही हैं या नहीं।

वर्कशाप विभाग की बड़ी लापरवाही

नगर निगम के वर्कशाप विभाग की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि विभाग में जो भी निजी या आउटसोर्स गाड़ी अटैच की जाए, वह पूरी तरह से नियम-कायदे और फिटनेस मानकों के अनुरूप हो। लेकिन लगातार हो रहे हादसों में जिस तरह की घोर लापरवाही सामने आती है, उससे साफ जाहिर होता है कि जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदकर बैठे हुए हैं। नगर निगम का वर्कशाप विभाग न तो अपनी जिम्मेदारी का सही ढंग से निर्वहन कर रहा है और न ही शहर की यातायात व्यवस्था को संभालने वाली ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ विभाग को इन जानलेवा गाड़ियों की कोई फिक्र है।

नशेड़ी ड्राइवरों के भरोसे दौड़ रहे हैं भारी वाहन

शहर की सड़कों पर दौड़ रहे इन कंडम वाहनों के चालकों की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। ट्रैफिक पुलिस ने कुछ दिनों पहले ही एक ऐसे ट्रैक्टर को चेकिंग के दौरान पकड़ा था, जिसका ड्राइवर अत्यधिक नशे में धुत होकर गाड़ी चला रहा था। उस वक्त पुलिस ने अपनी कागजी कार्रवाई पूरी करके औपचारिकता निभा दी, लेकिन नगर निगम ने इस गंभीर गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार फर्म या ठेकेदार पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। जब मूल विभाग ही इतनी बड़ी लापरवाही पर पर्दा डाल देता है, तो ऐसे में दोषियों को सजा मिलने की बात करना ही पूरी तरह बेकार साबित होता है।

रोज लाखों लीटर पानी की बर्बादी 

नगर निगम में वर्तमान में पानी सप्लाई के लिए जितने भी टैंकर अटैच होकर चल रहे हैं, उनमें से लगभग आधे टैंकर ऐसे हैं जो सड़क पर चलने के बिल्कुल भी काबिल नहीं हैं। इन खटारा वाहनों से न केवल हर वक्त गंभीर सड़क दुर्घटना होने का डर बना रहता है, बल्कि इनसे बड़े पैमाने पर पानी की बर्बादी भी हो रही है। टैंकरों के लीक होने के कारण कई हजार लीटर पानी अपने गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही सड़कों पर बह जाता है। जो निजी फर्में इन गाड़ियों को अटैच करती हैं, वे मुनाफे के चक्कर में इनकी मरम्मत नहीं करातीं और अधिकारी भी सब कुछ जानकर अनजान बने रहते हैं। नगर निगम की खुद की कई गाड़ियां कबाड़ में तब्दील हो चुकी हैं, लेकिन फिर भी उन्हें जबरन चलाया जा रहा है। आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस पूरे शहर में फिटनेस की मुहिम चलाते हैं, लेकिन नगर निगम के इन मौत के ठेकेदारों की तरफ आंख उठाकर भी नहीं देखते।

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