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Mamata Banerjee : TMC में बगावत तेज, काकोली घोष दस्तीदार के बेटे ने ममता बनर्जी समेत 5 नेताओं पर ठोका मानहानि का मुकदमा
	
		
	पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी अंदरूनी कलह के बीच पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार (Kakoli Ghosh Dastidar) के बेटे डॉ. बैद्यनाथ घोष दस्तीदार ने ममता बनर्जी समेत कई वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने का ऐलान किया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि ममता बनर्जी पार्टी के भीतर उभर रहे इस संकट और असंतोष से कैसे निपटती हैं।

	
		ALSO READ: क्या समाप्त होने वाला ईरान-अमेरिका युद्ध, समझौते के कितने करीब दोनों देश, होर्मुज पर किसका कंट्रोल


	मनोचिकित्सक डॉ. बैद्यनाथ घोष दस्तीदार ने ममता बनर्जी, कल्याण बनर्जी (Kalyan Banerjee), सौगात रॉय (Sougata Roy), महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) और सोनाली गुहा  (Sonali Guha) को संबोधित एक पत्र में कहा है कि उनके बारे में किए गए दावे पूरी तरह झूठे हैं।
	
		टीएमसी में बगावत से बढ़ा संकट
	
		यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब टीएमसी में बगावत की स्थिति बनी हुई है। सांसद काकोली घोष दस्तीदार को पार्टी के भीतर असंतुष्ट गुट का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि लोकसभा में 18 सांसदों का समर्थन उन्हें प्राप्त है और इन सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ पत्र पर हस्ताक्षर भी किए हैं। काकोली, जिन्हें कभी ममता बनर्जी का करीबी सहयोगी माना जाता था, संगठन के सभी पदों से इस्तीफा दे चुकी हैं।
		
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			संगठन में बड़े बदलाव कर चुकी हैं ममता
		
			पार्टी में बढ़ते असंतोष को देखते हुए ममता बनर्जी संगठन में बड़े बदलाव कर चुकी हैं। उन्होंने सायोनी घो‍ष (Saayoni Ghosh)  को युवा तृणमूल कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं माला रॉय की जगह अलीफा अहमद को महिला विंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
		
			बागी खेमे में शामिल हुए सुदीप बंद्योपाध्याय
		
			ममता बनर्जी के लिए चुनौती तब और बढ़ गई जब वरिष्ठ टीएमसी नेता सुदीप बंद्योपाध्याय भी कथित तौर पर बागी खेमे के संपर्क में दिखाई दिए। दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भुपेंद्र यादव से मुलाकात के बाद उनके रुख को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
	


	टिकट मांगने और शराब सेवन के आरोपों का किया खंडन

	बैद्यनाथ ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने बारासात विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए टिकट मांगा था। उन्होंने यह भी कहा कि सोनाली गुहा द्वारा लगाए गए आरोप, जिनमें उनकी और उनकी मां के नियमित रूप से शराब सेवन करने की बात कही गई थी, पूरी तरह निराधार और असत्य हैं।

	 

	उन्होंने कहा कि इन बयानों के खिलाफ वह कानूनी नोटिस भेजेंगे और सार्वजनिक माफी की मांग करेंगे। यदि उचित जवाब नहीं मिला तो मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।

	'राजनीतिक विवादों से कोई लेना-देना नहीं'

	अपने पत्र में बैद्यनाथ ने स्पष्ट किया कि उनका किसी भी राजनीतिक विवाद, गुटबाजी या आंतरिक संघर्ष से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने नेताओं से उनके नाम, पहचान, पेशे और पारिवारिक परिस्थितियों का राजनीतिक बहस या सार्वजनिक चर्चाओं में उपयोग नहीं करने की अपील की है।   Edited by : Sudhir Sharma

Mamata Banerjee : TMC में बगावत तेज, काकोली घोष दस्तीदार के बेटे ने ममता बनर्जी समेत 5 नेताओं पर ठोका मानहानि का मुकदमा

Mamata Banerjee : TMC में बगावत तेज, काकोली घोष दस्तीदार के बेटे ने ममता बनर्जी समेत 5 नेताओं पर ठोका मानहानि का मुकदमा
	
		
	पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी अंदरूनी कलह के बीच पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार (Kakoli Ghosh Dastidar) के बेटे डॉ. बैद्यनाथ घोष दस्तीदार ने ममता बनर्जी समेत कई वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने का ऐलान किया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि ममता बनर्जी पार्टी के भीतर उभर रहे इस संकट और असंतोष से कैसे निपटती हैं।

	
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	मनोचिकित्सक डॉ. बैद्यनाथ घोष दस्तीदार ने ममता बनर्जी, कल्याण बनर्जी (Kalyan Banerjee), सौगात रॉय (Sougata Roy), महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) और सोनाली गुहा  (Sonali Guha) को संबोधित एक पत्र में कहा है कि उनके बारे में किए गए दावे पूरी तरह झूठे हैं।
	
		टीएमसी में बगावत से बढ़ा संकट
	
		यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब टीएमसी में बगावत की स्थिति बनी हुई है। सांसद काकोली घोष दस्तीदार को पार्टी के भीतर असंतुष्ट गुट का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि लोकसभा में 18 सांसदों का समर्थन उन्हें प्राप्त है और इन सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ पत्र पर हस्ताक्षर भी किए हैं। काकोली, जिन्हें कभी ममता बनर्जी का करीबी सहयोगी माना जाता था, संगठन के सभी पदों से इस्तीफा दे चुकी हैं।
		
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			संगठन में बड़े बदलाव कर चुकी हैं ममता
		
			पार्टी में बढ़ते असंतोष को देखते हुए ममता बनर्जी संगठन में बड़े बदलाव कर चुकी हैं। उन्होंने सायोनी घो‍ष (Saayoni Ghosh)  को युवा तृणमूल कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं माला रॉय की जगह अलीफा अहमद को महिला विंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
		
			बागी खेमे में शामिल हुए सुदीप बंद्योपाध्याय
		
			ममता बनर्जी के लिए चुनौती तब और बढ़ गई जब वरिष्ठ टीएमसी नेता सुदीप बंद्योपाध्याय भी कथित तौर पर बागी खेमे के संपर्क में दिखाई दिए। दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भुपेंद्र यादव से मुलाकात के बाद उनके रुख को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
	


	टिकट मांगने और शराब सेवन के आरोपों का किया खंडन

	बैद्यनाथ ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने बारासात विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए टिकट मांगा था। उन्होंने यह भी कहा कि सोनाली गुहा द्वारा लगाए गए आरोप, जिनमें उनकी और उनकी मां के नियमित रूप से शराब सेवन करने की बात कही गई थी, पूरी तरह निराधार और असत्य हैं।

	 

	उन्होंने कहा कि इन बयानों के खिलाफ वह कानूनी नोटिस भेजेंगे और सार्वजनिक माफी की मांग करेंगे। यदि उचित जवाब नहीं मिला तो मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।

	'राजनीतिक विवादों से कोई लेना-देना नहीं'

	अपने पत्र में बैद्यनाथ ने स्पष्ट किया कि उनका किसी भी राजनीतिक विवाद, गुटबाजी या आंतरिक संघर्ष से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने नेताओं से उनके नाम, पहचान, पेशे और पारिवारिक परिस्थितियों का राजनीतिक बहस या सार्वजनिक चर्चाओं में उपयोग नहीं करने की अपील की है।   Edited by : Sudhir Sharma

पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी अंदरूनी कलह के बीच पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार (Kakoli Ghosh Dastidar) के बेटे डॉ. बैद्यनाथ घोष दस्तीदार ने ममता बनर्जी समेत कई वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने का ऐलान किया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि ममता बनर्जी पार्टी के भीतर उभर रहे इस संकट और असंतोष से कैसे निपटती हैं।

ALSO READ: क्या समाप्त होने वाला ईरान-अमेरिका युद्ध, समझौते के कितने करीब दोनों देश, होर्मुज पर किसका कंट्रोल

मनोचिकित्सक डॉ. बैद्यनाथ घोष दस्तीदार ने ममता बनर्जी, कल्याण बनर्जी (Kalyan Banerjee), सौगात रॉय (Sougata Roy), महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) और सोनाली गुहा  (Sonali Guha) को संबोधित एक पत्र में कहा है कि उनके बारे में किए गए दावे पूरी तरह झूठे हैं।

टीएमसी में बगावत से बढ़ा संकट

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब टीएमसी में बगावत की स्थिति बनी हुई है। सांसद काकोली घोष दस्तीदार को पार्टी के भीतर असंतुष्ट गुट का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि लोकसभा में 18 सांसदों का समर्थन उन्हें प्राप्त है और इन सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ पत्र पर हस्ताक्षर भी किए हैं। काकोली, जिन्हें कभी ममता बनर्जी का करीबी सहयोगी माना जाता था, संगठन के सभी पदों से इस्तीफा दे चुकी हैं।

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संगठन में बड़े बदलाव कर चुकी हैं ममता

पार्टी में बढ़ते असंतोष को देखते हुए ममता बनर्जी संगठन में बड़े बदलाव कर चुकी हैं। उन्होंने सायोनी घो‍ष (Saayoni Ghosh)  को युवा तृणमूल कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं माला रॉय की जगह अलीफा अहमद को महिला विंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बागी खेमे में शामिल हुए सुदीप बंद्योपाध्याय

ममता बनर्जी के लिए चुनौती तब और बढ़ गई जब वरिष्ठ टीएमसी नेता सुदीप बंद्योपाध्याय भी कथित तौर पर बागी खेमे के संपर्क में दिखाई दिए। दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भुपेंद्र यादव से मुलाकात के बाद उनके रुख को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

टिकट मांगने और शराब सेवन के आरोपों का किया खंडन

बैद्यनाथ ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने बारासात विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए टिकट मांगा था। उन्होंने यह भी कहा कि सोनाली गुहा द्वारा लगाए गए आरोप, जिनमें उनकी और उनकी मां के नियमित रूप से शराब सेवन करने की बात कही गई थी, पूरी तरह निराधार और असत्य हैं।

 

उन्होंने कहा कि इन बयानों के खिलाफ वह कानूनी नोटिस भेजेंगे और सार्वजनिक माफी की मांग करेंगे। यदि उचित जवाब नहीं मिला तो मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।

'राजनीतिक विवादों से कोई लेना-देना नहीं'

अपने पत्र में बैद्यनाथ ने स्पष्ट किया कि उनका किसी भी राजनीतिक विवाद, गुटबाजी या आंतरिक संघर्ष से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने नेताओं से उनके नाम, पहचान, पेशे और पारिवारिक परिस्थितियों का राजनीतिक बहस या सार्वजनिक चर्चाओं में उपयोग नहीं करने की अपील की है।   Edited by : Sudhir Sharma

पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी अंदरूनी कलह के बीच पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार (Kakoli Ghosh Dastidar) के बेटे डॉ. बैद्यनाथ घोष दस्तीदार ने ममता बनर्जी समेत कई वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने का ऐलान किया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि ममता बनर्जी पार्टी के भीतर उभर रहे इस संकट और असंतोष से कैसे निपटती हैं।

ALSO READ: क्या समाप्त होने वाला ईरान-अमेरिका युद्ध, समझौते के कितने करीब दोनों देश, होर्मुज पर किसका कंट्रोल

मनोचिकित्सक डॉ. बैद्यनाथ घोष दस्तीदार ने ममता बनर्जी, कल्याण बनर्जी (Kalyan Banerjee), सौगात रॉय (Sougata Roy), महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) और सोनाली गुहा  (Sonali Guha) को संबोधित एक पत्र में कहा है कि उनके बारे में किए गए दावे पूरी तरह झूठे हैं।

टीएमसी में बगावत से बढ़ा संकट

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब टीएमसी में बगावत की स्थिति बनी हुई है। सांसद काकोली घोष दस्तीदार को पार्टी के भीतर असंतुष्ट गुट का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि लोकसभा में 18 सांसदों का समर्थन उन्हें प्राप्त है और इन सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ पत्र पर हस्ताक्षर भी किए हैं। काकोली, जिन्हें कभी ममता बनर्जी का करीबी सहयोगी माना जाता था, संगठन के सभी पदों से इस्तीफा दे चुकी हैं।

ALSO READ: क्या समाप्त होने वाला ईरान-अमेरिका युद्ध, समझौते के कितने करीब दोनों देश, होर्मुज पर किसका कंट्रोल

संगठन में बड़े बदलाव कर चुकी हैं ममता

पार्टी में बढ़ते असंतोष को देखते हुए ममता बनर्जी संगठन में बड़े बदलाव कर चुकी हैं। उन्होंने सायोनी घो‍ष (Saayoni Ghosh)  को युवा तृणमूल कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं माला रॉय की जगह अलीफा अहमद को महिला विंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बागी खेमे में शामिल हुए सुदीप बंद्योपाध्याय

ममता बनर्जी के लिए चुनौती तब और बढ़ गई जब वरिष्ठ टीएमसी नेता सुदीप बंद्योपाध्याय भी कथित तौर पर बागी खेमे के संपर्क में दिखाई दिए। दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भुपेंद्र यादव से मुलाकात के बाद उनके रुख को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

टिकट मांगने और शराब सेवन के आरोपों का किया खंडन

बैद्यनाथ ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने बारासात विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए टिकट मांगा था। उन्होंने यह भी कहा कि सोनाली गुहा द्वारा लगाए गए आरोप, जिनमें उनकी और उनकी मां के नियमित रूप से शराब सेवन करने की बात कही गई थी, पूरी तरह निराधार और असत्य हैं।

 

उन्होंने कहा कि इन बयानों के खिलाफ वह कानूनी नोटिस भेजेंगे और सार्वजनिक माफी की मांग करेंगे। यदि उचित जवाब नहीं मिला तो मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।

'राजनीतिक विवादों से कोई लेना-देना नहीं'

अपने पत्र में बैद्यनाथ ने स्पष्ट किया कि उनका किसी भी राजनीतिक विवाद, गुटबाजी या आंतरिक संघर्ष से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने नेताओं से उनके नाम, पहचान, पेशे और पारिवारिक परिस्थितियों का राजनीतिक बहस या सार्वजनिक चर्चाओं में उपयोग नहीं करने की अपील की है।   Edited by : Sudhir Sharma

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Bollywood News: ‘जो डर गया, वो मर गया…’, सलमान खान के नए पोस्ट ने सोशल मीडिया पर मचाई हलचल  Dailyhunt">Google NewsBollywood News: ‘जो डर गया, वो मर गया…’, सलमान खान के नए पोस्ट ने सोशल मीडिया पर मचाई हलचल  Dailyhunt

शगुफ्ता ने बताया कि वो एक से एक पैसे के लिए मोहताज हो गई थीं फिर उन्होंने बिना किसी के मदद के अपनी सारी जिम्मेदारियां निभाईं। इसके साथ ही शगुफ्ता ने इस बात से पर्दा उठाया कि आखिर उन्होंने क्या अभी तक ब्रेस्ट कैंसर की बात छुपा कर रखी थी।

सिद्धार्थ कन्नन को दिए इंटरव्यू में शगुफ्ता अली ने बताया कि जब उन्हें स्टेज 3 ब्रेस्ट कैंसर का पता चला, तो उन्होंने इसे सभी से छुपा कर क्यों रखा? जब शगुफ्ता से पूछा गया कि उन्होंने अपनी इस बीमारी के बारे में किसी को क्यों नहीं बताया, तो उन्होंने कहा, ‘उस जमाने में इस चीज को लेकर यही कहा जाता था कि नहीं, नहीं, बिल्कुल नहीं बताना। एकदम चुप रहो, बात मत करो। वरना काम मिलना बंद हो जाएगा। डरा दिया गया कि काम नहीं मिलेगा। इंडस्ट्री के लोग ऐसा बर्ताव करने लगते हैं, इसलिए मैंने किसी से कुछ नहीं बताया।’

इसके बाद आए मुश्किल दिनों के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि गुजर-बसर करने के लिए उन्हें अपने गहने और कार तक बेचनी पड़ी, हालांकि उन्होंने अपना घर नहीं बिकने दिया। आज भी वह अपने काम और अस्पताल आने-जाने के लिए ऑटो-रिक्शा से सफर करने में बिल्कुल नहीं हिचकिचातीं।

अपनी सेविंग्स पर शगुफ्ता ने कहा, ‘2017 के बाद जब मेरी दिक्कतें बढ़ीं, तो लोग मुझसे पूछने लगे- क्या तुम्हारे पास कोई सेविंग्स नहीं थीं? अरे, बिल्कुल थीं। मेरे पास अच्छी-खासी बचत थी और इतने सालों तक मैंने उसी से अपना घर चलाया। लेकिन मैं कोई अंबानी, टाटा या अडानी तो हूं नहीं कि मेरा पैसा कभी खत्म ही न हो।

उन्होंने आगे कहा, ‘एक टीवी एक्टर के पास भला कितनी सेविंग्स हो सकती हैं? मैं अपने घर में अकेली कमाने वाली थी। उसी बचत से बीमारियां झेलीं, रोज के खर्चे चलाए, राशन खरीदा और परिवार की देखभाल की।’

शगुफ्ता अली ने बताया कि उन्हें सबसे ज्यादा तकलीफ इस बात से हुई कि लोग उनकी बचत को लेकर सवाल क्यों उठा रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना पैसा नाइट क्लब्स, शराब पीने, अय्याशी या पार्टियों में नहीं उड़ाया। अस्पताल के भारी-भरकम बिलों में उनका सारा पैसा खर्च हो गया और उन्हें इस बात से चिढ़ होती थी कि लोग उनसे उनके पैसों का हिसाब मांगते थे।

">ब्रेंस्ट कैंसर और घर चलाने में खत्म हो गए शगुफ्ता अली के सारे पैसे, काम ना मिलने के डर से छुपाई बीमारी की बात Shagufta Ali Cancer: बॉलीवुड अभिनेत्री शगुफ्ता अली हर किसी के जेहर में एक जाना पहचाना चेहरा हैं। शगुफ्ता अली ने हाल ही में अपनी लाइफ के सबसे मुश्किल दौर के बारे में बात कर हर किसी को अंदर तक हिला दिया है। शगुफ्ता अली ने बताया है कि कैसे स्टेज 3 ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जंग लड़ने के साथ साथ उन्होंने बीमार पिता का भी साथ साथ इलाज कराया जिसमें उनकी सारी की सारी सेविंग्स खत्म हो गई थी, लेकिन इतने पर भी उन्होंने हार नहीं मानी।           शगुफ्ता ने बताया कि वो एक से एक पैसे के लिए मोहताज हो गई थीं फिर उन्होंने बिना किसी के मदद के अपनी सारी जिम्मेदारियां निभाईं। इसके साथ ही शगुफ्ता ने इस बात से पर्दा उठाया कि आखिर उन्होंने क्या अभी तक ब्रेस्ट कैंसर की बात छुपा कर रखी थी।    सिद्धार्थ कन्नन को दिए इंटरव्यू में शगुफ्ता अली ने बताया कि जब उन्हें स्टेज 3 ब्रेस्ट कैंसर का पता चला, तो उन्होंने इसे सभी से छुपा कर क्यों रखा? जब शगुफ्ता से पूछा गया कि उन्होंने अपनी इस बीमारी के बारे में किसी को क्यों नहीं बताया, तो उन्होंने कहा, ‘उस जमाने में इस चीज को लेकर यही कहा जाता था कि नहीं, नहीं, बिल्कुल नहीं बताना। एकदम चुप रहो, बात मत करो। वरना काम मिलना बंद हो जाएगा। डरा दिया गया कि काम नहीं मिलेगा। इंडस्ट्री के लोग ऐसा बर्ताव करने लगते हैं, इसलिए मैंने किसी से कुछ नहीं बताया।’   इसके बाद आए मुश्किल दिनों के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि गुजर-बसर करने के लिए उन्हें अपने गहने और कार तक बेचनी पड़ी, हालांकि उन्होंने अपना घर नहीं बिकने दिया। आज भी वह अपने काम और अस्पताल आने-जाने के लिए ऑटो-रिक्शा से सफर करने में बिल्कुल नहीं हिचकिचातीं। अपनी सेविंग्स पर शगुफ्ता ने कहा, ‘2017 के बाद जब मेरी दिक्कतें बढ़ीं, तो लोग मुझसे पूछने लगे- क्या तुम्हारे पास कोई सेविंग्स नहीं थीं? अरे, बिल्कुल थीं। मेरे पास अच्छी-खासी बचत थी और इतने सालों तक मैंने उसी से अपना घर चलाया। लेकिन मैं कोई अंबानी, टाटा या अडानी तो हूं नहीं कि मेरा पैसा कभी खत्म ही न हो।   उन्होंने आगे कहा, ‘एक टीवी एक्टर के पास भला कितनी सेविंग्स हो सकती हैं? मैं अपने घर में अकेली कमाने वाली थी। उसी बचत से बीमारियां झेलीं, रोज के खर्चे चलाए, राशन खरीदा और परिवार की देखभाल की।’ शगुफ्ता अली ने बताया कि उन्हें सबसे ज्यादा तकलीफ इस बात से हुई कि लोग उनकी बचत को लेकर सवाल क्यों उठा रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना पैसा नाइट क्लब्स, शराब पीने, अय्याशी या पार्टियों में नहीं उड़ाया। अस्पताल के भारी-भरकम बिलों में उनका सारा पैसा खर्च हो गया और उन्हें इस बात से चिढ़ होती थी कि लोग उनसे उनके पैसों का हिसाब मांगते थे।

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