नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा डिजिटल उपवास यानी कुछ समय के लिए मोबाइल और डिजिटल उपकरणों से दूरी बनाने की अपील की गई है, क्योंकि लोग डिजिटल उपकरणों की लत के शिकार होते जा रहे हैं।
लोग सुबह से लेकर देर रात तक इनका बेवजह उपयोग करते रहते हैं। जो लोग डिजिटल उपवास अपना रहे हैं, उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं। मोबाइल से दूरी बनाकर लोग अपने मन, विचार और ध्यान को नियंत्रित कर रहे हैं।
क्या है डिजिटल उपवास और इसके लाभ?
विशेषज्ञों के मुताबिक, डिजिटल उपवास में व्यक्ति कुछ समय के लिए डिजिटल उपकरणों से दूरी बनाकर अपने मन, विचार और ध्यान को नियंत्रित करने का अभ्यास करता है। जिस तरह धार्मिक उपवास में व्यक्ति किसी चीज का त्याग कर आत्मशुद्धि की कोशिश करता है, उसी तरह डिजिटल उपवास में मोबाइल, सोशल मीडिया और इंटरनेट से दूरी बनाकर मानसिक शुद्धता और फोकस बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।
यही नहीं, डिजिटल उपकरणों से दूरी शारीरिक व्यायाम की ओर भी ले जाती है जो शरीर के लिए बेहतर है। डिजिटल उपवास के दौरान समय को खाली न छोड़ें; किताब पढ़ें, बातचीत करें, ध्यान (मेडिटेशन) करें या कोई रचनात्मक काम करें।
इंदौर में बढ़ता डिजिटल ब्रेक का चलन
तेजी से बदलती डिजिटल लाइफस्टाइल में लोग दिनभर मोबाइल, सोशल मीडिया और स्क्रीन पर निर्भर हो गए हैं। लगातार नोटिफिकेशन सहित अन्य जानकारी की अधिकता ने मानसिक थकान और तनाव को बढ़ा दिया है।
हमारा मस्तिष्क एक ‘रिवॉर्ड मैकेनिज्म’ पर काम करता है, जहां हर नोटिफिकेशन या नया कंटेंट हमें थोड़ी खुशी देता है। लेकिन यह आदत धीरे-धीरे ध्यान भटकाने, बेचैनी और बर्नआउट का कारण बन जाती है। इसी वजह से अब इंदौर में लोग समझने लगे हैं कि समय-समय पर डिजिटल ब्रेक लेना जरूरी है, ताकि मानसिक स्वास्थ्य संतुलित रह सके।
डिजिटल उपवास करने के प्रभावी तरीके
डिजिटल उपवास को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं-
- शुरुआत में दो घंटे, आधा दिन या पूरा दिन डिजिटल ब्रेक लें।
- एक समय सीमा तय करें, जैसे केवल कॉल के लिए मोबाइल का उपयोग।
- घर में ‘नो फोन जोन’ बनाएं, खासकर डाइनिंग टेबल पर।
- सुबह उठने के बाद एक घंटे तक मोबाइल का उपयोग न करें।
- खाने और वॉक के दौरान मोबाइल से दूरी रखें।
- सोशल मीडिया एप्स की संख्या सीमित करें।
- मोबाइल अलार्म की जगह पारंपरिक घड़ी का उपयोग करें।
मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को फायदे
डिजिटल उपवास के कई लाभ हैं। इससे मानसिक शांति मिलती है और लगातार स्क्रीन से दूरी बनाने से दिमाग को आराम मिलता है। एकाग्रता बेहतर होती है और ध्यान भटकने की समस्या कम होती है। साथ ही, सोशल मीडिया की तुलना और दबाव से राहत मिलने के कारण भावनात्मक नियंत्रण बढ़ता है।
परिवार और दोस्तों के साथ वास्तविक संवाद बढ़ने से रिश्तों में सुधार आता है और मानसिक थकान या बर्नआउट से बचाव होता है। बेहतर स्वास्थ्य के लिहाज से देखें तो डिजिटल उपकरण का ज्यादा उपयोग नहीं करने से सर्वाइकल और आंखों की समस्या भी नहीं होती।
युवाओं का ‘संडे डिजिटल उपवास’ और सफलता की कहानी
शहर के कुछ युवा ‘संडे डिजिटल उपवास’ कर रहे हैं। हर रविवार वे तय करते हैं कि 6 से 8 घंटे तक मोबाइल का उपयोग नहीं करेंगे। इस समय में वे वॉक, परिवार के साथ समय बिताने या किताब पढ़ने जैसी गतिविधियां करते हैं। उनका कहना है कि इससे तनाव कम हुआ और नींद की गुणवत्ता बेहतर हुई है।
मनोचिकित्सक डॉ. कौस्तुभ बागुल के अनुसार, डिजिटल उपवास का मतलब मोबाइल पूरी तरह बंद करना नहीं, बल्कि सप्ताह में एक ऐसा समय निकालना है जब हम फोन से दूर रहें।
इसका एक बड़ा उदाहरण शासकीय कन्या उमा विद्यालय राजेंद्र नगर की छात्रा कृष्णा खाजेकर हैं, जिन्होंने 10वीं में 98.2% अंक प्राप्त कर जिले में पहला स्थान हासिल किया। कृष्णा ने बताया कि उन्होंने मोबाइल का उपयोग बंद नहीं किया था, लेकिन सिर्फ जरूरी ऐप्स तक खुद को सीमित रखा। उनका मानना है कि मोबाइल से दूरी बनाकर ही पढ़ाई में सही ध्यान लगाया जा सकता है।
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