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SIR : 34 लाख लोग नहीं डाल पाएंगे वोट, SC का अंतरिम अधिकार देने से इनकार, पश्चिम बंगाल चुनाव क्या पड़ेगा असर
	
		
	सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लोगों को अंतरिम मतदान अधिकार देने से इनकार कर दिया है, जिनकी अपीलें अभी अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 34 लाख मतदाताओं को वोट डालने के लिए अंतरिम अधिकार देने से इनकार कर दिया है। यह फैसला राज्य के चुनावी परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। एक्सपर्ट्‍स का मानना है कि ऐसा होने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में कमी आएगी और लोगों में चुनावी प्रक्रिया के प्रति असंतोष बढ़ेगा।
	
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	मतदान का अधिकार हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इसे तत्काल प्रभाव से नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ, जिसमें सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची शामिल थे, उन मतदाताओं द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिनकी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ अपीलें अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित हैं।

	 

	कोर्ट ने कहा कि लगभग 30 से 34 लाख अपीलें लंबित हैं, जिनमें से प्रत्येक न्यायाधिकरण एक लाख से अधिक मामलों की सुनवाई कर रहा है। न्‍यायालय  ने इस बात पर जोर दिया कि उचित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि इस स्तर पर न्यायिक हस्तक्षेप चुनावी प्रक्रिया को बाधित कर सकता है। न्‍यायालय ने कहा कि मतदान का अधिकार संवैधानिक और लोकतांत्रिक भागीदारी के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन मतदाताओं के बड़े पैमाने पर बहिष्करण से प्रक्रिया पर जब तक गंभीर प्रभाव न पड़े, तब तक चुनाव नहीं रोका जा सकता।
	
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	इस बीच कलकत्ता हाईकोर्ट की देखरेख में गठित 19 न्यायाधिकरणों ने अपीलों की सुनवाई शुरू कर दी है। राज्य में मतदान दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होगा, और मतगणना अगले महीने की 4 तारीख को निर्धारित है। याचिकाकर्ताओं ने मतदाता सूची को फ्रीज करने की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की है। उनका तर्क है कि यदि उनकी अपीलें स्वीकार हो जाती हैं तो उन्हें आगामी विधानसभा चुनावों में मतदान करने की अनुमति दी जानी चाहिए।  Edited by : Sudhir Sharma

SIR : 34 लाख लोग नहीं डाल पाएंगे वोट, SC का अंतरिम अधिकार देने से इनकार, पश्चिम बंगाल चुनाव क्या पड़ेगा असर

SIR : 34 लाख लोग नहीं डाल पाएंगे वोट, SC का अंतरिम अधिकार देने से इनकार, पश्चिम बंगाल चुनाव क्या पड़ेगा असर
	
		
	सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लोगों को अंतरिम मतदान अधिकार देने से इनकार कर दिया है, जिनकी अपीलें अभी अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 34 लाख मतदाताओं को वोट डालने के लिए अंतरिम अधिकार देने से इनकार कर दिया है। यह फैसला राज्य के चुनावी परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। एक्सपर्ट्‍स का मानना है कि ऐसा होने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में कमी आएगी और लोगों में चुनावी प्रक्रिया के प्रति असंतोष बढ़ेगा।
	
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	मतदान का अधिकार हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इसे तत्काल प्रभाव से नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ, जिसमें सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची शामिल थे, उन मतदाताओं द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिनकी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ अपीलें अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित हैं।

	 

	कोर्ट ने कहा कि लगभग 30 से 34 लाख अपीलें लंबित हैं, जिनमें से प्रत्येक न्यायाधिकरण एक लाख से अधिक मामलों की सुनवाई कर रहा है। न्‍यायालय  ने इस बात पर जोर दिया कि उचित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि इस स्तर पर न्यायिक हस्तक्षेप चुनावी प्रक्रिया को बाधित कर सकता है। न्‍यायालय ने कहा कि मतदान का अधिकार संवैधानिक और लोकतांत्रिक भागीदारी के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन मतदाताओं के बड़े पैमाने पर बहिष्करण से प्रक्रिया पर जब तक गंभीर प्रभाव न पड़े, तब तक चुनाव नहीं रोका जा सकता।
	
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	इस बीच कलकत्ता हाईकोर्ट की देखरेख में गठित 19 न्यायाधिकरणों ने अपीलों की सुनवाई शुरू कर दी है। राज्य में मतदान दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होगा, और मतगणना अगले महीने की 4 तारीख को निर्धारित है। याचिकाकर्ताओं ने मतदाता सूची को फ्रीज करने की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की है। उनका तर्क है कि यदि उनकी अपीलें स्वीकार हो जाती हैं तो उन्हें आगामी विधानसभा चुनावों में मतदान करने की अनुमति दी जानी चाहिए।  Edited by : Sudhir Sharma

सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लोगों को अंतरिम मतदान अधिकार देने से इनकार कर दिया है, जिनकी अपीलें अभी अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 34 लाख मतदाताओं को वोट डालने के लिए अंतरिम अधिकार देने से इनकार कर दिया है। यह फैसला राज्य के चुनावी परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। एक्सपर्ट्‍स का मानना है कि ऐसा होने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में कमी आएगी और लोगों में चुनावी प्रक्रिया के प्रति असंतोष बढ़ेगा।

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मतदान का अधिकार हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इसे तत्काल प्रभाव से नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ, जिसमें सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची शामिल थे, उन मतदाताओं द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिनकी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ अपीलें अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित हैं।

 

कोर्ट ने कहा कि लगभग 30 से 34 लाख अपीलें लंबित हैं, जिनमें से प्रत्येक न्यायाधिकरण एक लाख से अधिक मामलों की सुनवाई कर रहा है। न्‍यायालय  ने इस बात पर जोर दिया कि उचित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि इस स्तर पर न्यायिक हस्तक्षेप चुनावी प्रक्रिया को बाधित कर सकता है। न्‍यायालय ने कहा कि मतदान का अधिकार संवैधानिक और लोकतांत्रिक भागीदारी के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन मतदाताओं के बड़े पैमाने पर बहिष्करण से प्रक्रिया पर जब तक गंभीर प्रभाव न पड़े, तब तक चुनाव नहीं रोका जा सकता।

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इस बीच कलकत्ता हाईकोर्ट की देखरेख में गठित 19 न्यायाधिकरणों ने अपीलों की सुनवाई शुरू कर दी है। राज्य में मतदान दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होगा, और मतगणना अगले महीने की 4 तारीख को निर्धारित है। याचिकाकर्ताओं ने मतदाता सूची को फ्रीज करने की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की है। उनका तर्क है कि यदि उनकी अपीलें स्वीकार हो जाती हैं तो उन्हें आगामी विधानसभा चुनावों में मतदान करने की अनुमति दी जानी चाहिए।  Edited by : Sudhir Sharma

सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लोगों को अंतरिम मतदान अधिकार देने से इनकार कर दिया है, जिनकी अपीलें अभी अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 34 लाख मतदाताओं को वोट डालने के लिए अंतरिम अधिकार देने से इनकार कर दिया है। यह फैसला राज्य के चुनावी परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। एक्सपर्ट्‍स का मानना है कि ऐसा होने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में कमी आएगी और लोगों में चुनावी प्रक्रिया के प्रति असंतोष बढ़ेगा।

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मतदान का अधिकार हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इसे तत्काल प्रभाव से नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ, जिसमें सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची शामिल थे, उन मतदाताओं द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिनकी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ अपीलें अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित हैं।

 

कोर्ट ने कहा कि लगभग 30 से 34 लाख अपीलें लंबित हैं, जिनमें से प्रत्येक न्यायाधिकरण एक लाख से अधिक मामलों की सुनवाई कर रहा है। न्‍यायालय  ने इस बात पर जोर दिया कि उचित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि इस स्तर पर न्यायिक हस्तक्षेप चुनावी प्रक्रिया को बाधित कर सकता है। न्‍यायालय ने कहा कि मतदान का अधिकार संवैधानिक और लोकतांत्रिक भागीदारी के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन मतदाताओं के बड़े पैमाने पर बहिष्करण से प्रक्रिया पर जब तक गंभीर प्रभाव न पड़े, तब तक चुनाव नहीं रोका जा सकता।

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इस बीच कलकत्ता हाईकोर्ट की देखरेख में गठित 19 न्यायाधिकरणों ने अपीलों की सुनवाई शुरू कर दी है। राज्य में मतदान दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होगा, और मतगणना अगले महीने की 4 तारीख को निर्धारित है। याचिकाकर्ताओं ने मतदाता सूची को फ्रीज करने की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की है। उनका तर्क है कि यदि उनकी अपीलें स्वीकार हो जाती हैं तो उन्हें आगामी विधानसभा चुनावों में मतदान करने की अनुमति दी जानी चाहिए।  Edited by : Sudhir Sharma

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Deadspin | Sabres seeking two more wins, starting with Blackhawks Monday <div id=""><section id="0" class=" w-full"><div class="xl:container mx-0 !px-4 py-0 pb-4 !mx-0 !px-0"><img src="https://images.deadspin.com/tr:w-900/28695879.jpg" srcset="https://images.deadspin.com/tr:w-900/28695879.jpg" alt="NHL: Columbus Blue Jackets at Buffalo Sabres" class="w-full" fetchpriority="high" loading="eager"/><span class="text-0.8 leading-tight">Apr 9, 2026; Buffalo, New York, USA; Buffalo Sabres right wing Josh Doan (91) celebrates his second goal of the game with teammates during the third period against the Columbus Blue Jackets at KeyBank Center. Mandatory Credit: Timothy T. Ludwig-Imagn Images<!-- --> <!-- --> </span></div></section><section id="section-1"> <p>With two games remaining in the regular season, the playoff-bound Buffalo Sabres can finish anywhere from first to third in a stacked Atlantic Division.</p> </section><section id="section-2"> <p>Fortunately for the Sabres, they control the equation entering Monday’s visit to the slumping Chicago Blackhawks.</p> </section><section id="section-3"> <p>With three points this week, Buffalo (49-23-8, 106 points) wins the division. With two, it’s home-ice advantage in the first round.</p> </section><section id="section-4"> <p>“We’ve talked about where we wanted to be, and this is where we wanna be,” Sabres coach Lindy Ruff said. “We know how hard it’s been, and we know how hard it’s gonna continue to be. So, it’s not taking anything for granted. We’d love to win these last two games. We focus in on Chicago and go from there.”</p> </section><section id="section-5"> <p>Buffalo will be well-rested when it meets a Blackhawks team that has lost three straight and eight of nine.</p> </section><section id="section-6"> <p>The Sabres have been idle since Thursday’s 5-0 home rout of Columbus. Josh Doan scored twice in the third period, giving him a team-leading five multi-goal games this season.</p> </section><section id="section-7"> <p>Channeling a resilience that has helped the franchise stop an NHL-record 14-season playoff drought, the Sabres also relied on a 37-save shutout from rookie goaltender Colten Ellis.</p> </section><section id="section-8"> <p>Ellis was back with Buffalo after netminder Alex Lyon sustained a lower-body injury. Lyon has shared starting duties with Ukko-Pekka Luukkonen, who earned the victory when Buffalo blitzed visiting Chicago 9-3 on Nov. 21.</p> </section><br/><section id="section-9"> <p>Luukkonen is 7-2-1 in his past 10 appearances.</p> </section> <section id="section-10"> <p>“He’s still in a situation, you know, where his game is growing,” Ruff said. “And I think since he’s been healthy, he’s put together a really good run, and he’s what we expected he could be, and he’s having fun playing the game.”</p> </section><section id="section-11"> <p>Chicago (28-38-14, 70 points) is seeking a spark of its own. While the Blackhawks were eliminated from postseason contention for the sixth straight season weeks ago, the stretch run has proven especially difficult.</p> </section><section id="section-12"> <p>The Blackhawks have lost the first two games of a four-game homestand to close the regular season, the latest coming Saturday in a 5-3 setback to St. Louis. Ilya Mikheyev scored twice for the Blackhawks.</p> </section><section id="section-13"> <p>“I would say there’s probably a fragility to our team right now, more than even fatigue,” Blackhawks coach Jeff Blashill said. “I think some guys are starting to really probably struggle a little bit. The issue with where we’re at is we don’t have guys to lean on to pick you up a little bit when you’re struggling. We’re kind of all struggling together. So, we’re grinding through it. These are hard, hard, hard lessons, man, but it’s also life isn’t easy. You never have the opportunity to learn from it if you don’t go through it.”</p> </section><section id="section-14"> <p>Forwards Frank Nazar and Andrew Mangiapane left Saturday’s game with injuries. With blueliner Ethan Del Mastro a late scratch due to injury, Chicago shifted forward Sam Lafferty to defense.</p> </section><section id="section-15"> <p>Blashill said Del Mastro and Mangiapane are day-to-day. He added that Nazar, who took a deflected puck to the face, “will be all right.”</p> </section><section id="section-16"> <p>Mikheyev notched his 200th career point with his second goal.</p> </section><section id="section-17"> <p>–Field Level Media</p> </section></div> #Deadspin #Sabres #seeking #wins #starting #Blackhawks #Monday

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Who is Sakib Hussain, Bihar pacer who is set to make his debut against Rajasthan Royals? <div id="content-body-70857866" itemprop="articleBody"><p>Bihar pacer Sakib Hussain is set to make his debut for Sunrisers Hyderabad against Rajasthan Royals at the Rajiv Gandhi International Stadium in Hyderabad on Monday.</p><p>Sakib was bought by SRH for Rs. 30 lakh at the IPL auction. He was first signed by Kolkata Knight Riders in the auction ahead of the IPL 2024 season, but did not get the opportunity to play that season.</p><p>The 21-year-old right arm pacer made his T20 debut for Bihar in the 2022-23 Syed Mushtaq Ali Trophy. At the age of just 17, Sakib registered figures of four for 20 runs in just his second game.</p><p><b>FOLLOW THE IPL 2026 LIVE: <a href="https://sportstar.thehindu.com/cricket/ipl/srh-vs-rr-live-score-sunrisers-hyderabad-rajasthan-royals-ipl-2026-match-live-updates/article70856579.ece" target="_blank" rel="nofollow">SRH vs RR IPL 2026, Live Score: Jaiswal-Suryavanshi and Head-Abhishek in focus as Rajasthan Royals visits Sunrisers Hyderabad; team news, toss at 7:00PM IST</a></b></p><p>Sakib picked his maiden five-for in the 2025-26 edition of the Ranji Trophy- 6/41 against Arunachal Pradesh.</p><p>After spending a year on the sidelines with KKR in the 2024 season, Sakib gets his chance tonight for Sunrisers Hyderabad against Rajasthan Royals.</p><p class="publish-time" id="end-of-article">Published on Apr 13, 2026</p></div> #Sakib #Hussain #Bihar #pacer #set #debut #Rajasthan #Royals

भारत का चीन को कड़ा मैसेज, अरुणाचल प्रदेश के नाम बदलने की कोशिश खारिज, बोला-  काल्पनिक नामों से नहीं बदलेगा सच
	
		
			
	
	अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने की चीन की कोशिश पर भारत ने कड़ा विरोध जताया है। विदेश मंत्रालय ने इसे 'शरारती प्रयास' बताते हुए खारिज किया और साफ कहा कि काल्पनिक नामों से हकीकत नहीं बदलेगी। भारत ने दो टूक कहा कि अरुणाचल प्रदेश उसका अभिन्न हिस्सा है और रहेगा, साथ ही ऐसे कदमों से दोनों देशों के संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ने की चेतावनी भी दी। भारत ने पिछले साल मई में और अप्रैल 2024 में चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों के नाम बदलने पर कड़ा रुख अपनाया था।

	
		ALSO READ: US-Iran के बीच 'महानायक' बनेंगे व्लादिमीर पुतिन? शहबाज शरीफ रहे नाकाम, अब रूस कराएगा अमेरिका-ईरान का समझौता


	चीन ने बदले कुछ जगहों के नाम

	पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद 2020 में दोनों देशों के संबंधों में भारी गिरावट आई। पिछले डेढ़ वर्षों में, दोनों पक्षों ने संबंधों को फिर से मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। हाल ही में जारी की गई एक नई सूची में, चीन ने भारतीय क्षेत्र के कुछ स्थानों के नाम बदल दिए हैं। चीनी नागरिक मामलों के मंत्रालय ने 2017 में ज़ांगनान में छह स्थानों के मानकीकृत नामों की पहली सूची जारी की, जबकि 15 स्थानों की दूसरी सूची 2021 में जारी की गई, जिसके बाद 2023 में 11 स्थानों के नामों वाली एक और सूची जारी की गई। जांगनान अरुणाचल प्रदेश का चीनी नाम है। चीन, अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता है। 

	
		ALSO READ: Tata Consultancy Services नासिक में बड़ा विवाद, यौन शोषण और जबरन धर्मांतरण के आरोप, 6 गिरफ्तार, कई कर्मचारी निलंबित


	भारत ने रविवार को कहा कि चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र को ‘ काल्पनिक नाम’ देना और ‘ निराधार विमर्श’  गढ़ना वास्तविकता को नहीं बदल सकता, लेकिन इससे द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों पर असर जरूर पड़ सकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नई दिल्ली भारतीय क्षेत्र के स्थानों को ऐसे नाम देने के चीनी पक्ष के किसी भी 'शरारती प्रयास' को “स्पष्ट रूप से खारिज” करती है। जायसवाल ने कहा कि भारत, चीन द्वारा भारत की भूमि के अंतर्गत आने वाले स्थानों को मनगढ़ंत नाम देने के किसी भी शरारती प्रयास को स्पष्ट रूप से खारिज करता है।”

	
		ALSO READ: बंगाल चुनाव में गरजे योगी आदित्यनाथ : सोनामुखी रैली में TMC-वाम पर हमला, बोले- 'खेला खत्म, अब विकास शुरू'


	उन्होंने कहा कि चीन द्वारा झूठे दावे पेश करने और निराधार विमर्श गढ़ने के ऐसे प्रयास इस निर्विवाद वास्तविकता को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश सहित ये स्थान और क्षेत्र भारत का अभिन्न एवं अविभाज्य हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे।
	
		ALSO READ: होर्मुज में न कोई जहाज घुसेगा, न निकलेगा, Donald Trump ने दी ईरान को धमकी
	जायसवाल ने कहा कि चीनी पक्ष के ऐसे प्रयास 'भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने की कवायद से ध्यान भटकाती हैं। उन्होंने कहा कि चीन को ऐसे कार्यों से बचना चाहिए, जो संबंधों में नकारात्मकता पैदा करते हैं और बेहतर समझ बनाने के प्रयासों को कमजोर करते हैं। Edited by : Sudhir Sharma 

अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने की चीन की कोशिश पर भारत ने कड़ा विरोध जताया है। विदेश मंत्रालय ने इसे 'शरारती प्रयास' बताते हुए खारिज किया और साफ कहा कि काल्पनिक नामों से हकीकत नहीं बदलेगी। भारत ने दो टूक कहा कि अरुणाचल प्रदेश उसका अभिन्न हिस्सा है और रहेगा, साथ ही ऐसे कदमों से दोनों देशों के संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ने की चेतावनी भी दी। भारत ने पिछले साल मई में और अप्रैल 2024 में चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों के नाम बदलने पर कड़ा रुख अपनाया था।

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चीन ने बदले कुछ जगहों के नाम

पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद 2020 में दोनों देशों के संबंधों में भारी गिरावट आई। पिछले डेढ़ वर्षों में, दोनों पक्षों ने संबंधों को फिर से मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। हाल ही में जारी की गई एक नई सूची में, चीन ने भारतीय क्षेत्र के कुछ स्थानों के नाम बदल दिए हैं। चीनी नागरिक मामलों के मंत्रालय ने 2017 में ज़ांगनान में छह स्थानों के मानकीकृत नामों की पहली सूची जारी की, जबकि 15 स्थानों की दूसरी सूची 2021 में जारी की गई, जिसके बाद 2023 में 11 स्थानों के नामों वाली एक और सूची जारी की गई। जांगनान अरुणाचल प्रदेश का चीनी नाम है। चीन, अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता है। 

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भारत ने रविवार को कहा कि चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र को ‘ काल्पनिक नाम’ देना और ‘ निराधार विमर्श’  गढ़ना वास्तविकता को नहीं बदल सकता, लेकिन इससे द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों पर असर जरूर पड़ सकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नई दिल्ली भारतीय क्षेत्र के स्थानों को ऐसे नाम देने के चीनी पक्ष के किसी भी 'शरारती प्रयास' को “स्पष्ट रूप से खारिज” करती है। जायसवाल ने कहा कि भारत, चीन द्वारा भारत की भूमि के अंतर्गत आने वाले स्थानों को मनगढ़ंत नाम देने के किसी भी शरारती प्रयास को स्पष्ट रूप से खारिज करता है।”

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उन्होंने कहा कि चीन द्वारा झूठे दावे पेश करने और निराधार विमर्श गढ़ने के ऐसे प्रयास इस निर्विवाद वास्तविकता को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश सहित ये स्थान और क्षेत्र भारत का अभिन्न एवं अविभाज्य हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे।

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जायसवाल ने कहा कि चीनी पक्ष के ऐसे प्रयास 'भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने की कवायद से ध्यान भटकाती हैं। उन्होंने कहा कि चीन को ऐसे कार्यों से बचना चाहिए, जो संबंधों में नकारात्मकता पैदा करते हैं और बेहतर समझ बनाने के प्रयासों को कमजोर करते हैं। Edited by : Sudhir Sharma 


">भारत का चीन को कड़ा मैसेज, अरुणाचल प्रदेश के नाम बदलने की कोशिश खारिज, बोला-  काल्पनिक नामों से नहीं बदलेगा सच
	
		
			
	
	अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने की चीन की कोशिश पर भारत ने कड़ा विरोध जताया है। विदेश मंत्रालय ने इसे 'शरारती प्रयास' बताते हुए खारिज किया और साफ कहा कि काल्पनिक नामों से हकीकत नहीं बदलेगी। भारत ने दो टूक कहा कि अरुणाचल प्रदेश उसका अभिन्न हिस्सा है और रहेगा, साथ ही ऐसे कदमों से दोनों देशों के संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ने की चेतावनी भी दी। भारत ने पिछले साल मई में और अप्रैल 2024 में चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों के नाम बदलने पर कड़ा रुख अपनाया था।

	
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	चीन ने बदले कुछ जगहों के नाम

	पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद 2020 में दोनों देशों के संबंधों में भारी गिरावट आई। पिछले डेढ़ वर्षों में, दोनों पक्षों ने संबंधों को फिर से मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। हाल ही में जारी की गई एक नई सूची में, चीन ने भारतीय क्षेत्र के कुछ स्थानों के नाम बदल दिए हैं। चीनी नागरिक मामलों के मंत्रालय ने 2017 में ज़ांगनान में छह स्थानों के मानकीकृत नामों की पहली सूची जारी की, जबकि 15 स्थानों की दूसरी सूची 2021 में जारी की गई, जिसके बाद 2023 में 11 स्थानों के नामों वाली एक और सूची जारी की गई। जांगनान अरुणाचल प्रदेश का चीनी नाम है। चीन, अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता है। 

	
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	भारत ने रविवार को कहा कि चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र को ‘ काल्पनिक नाम’ देना और ‘ निराधार विमर्श’  गढ़ना वास्तविकता को नहीं बदल सकता, लेकिन इससे द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों पर असर जरूर पड़ सकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नई दिल्ली भारतीय क्षेत्र के स्थानों को ऐसे नाम देने के चीनी पक्ष के किसी भी 'शरारती प्रयास' को “स्पष्ट रूप से खारिज” करती है। जायसवाल ने कहा कि भारत, चीन द्वारा भारत की भूमि के अंतर्गत आने वाले स्थानों को मनगढ़ंत नाम देने के किसी भी शरारती प्रयास को स्पष्ट रूप से खारिज करता है।”

	
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	उन्होंने कहा कि चीन द्वारा झूठे दावे पेश करने और निराधार विमर्श गढ़ने के ऐसे प्रयास इस निर्विवाद वास्तविकता को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश सहित ये स्थान और क्षेत्र भारत का अभिन्न एवं अविभाज्य हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे।
	
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	जायसवाल ने कहा कि चीनी पक्ष के ऐसे प्रयास 'भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने की कवायद से ध्यान भटकाती हैं। उन्होंने कहा कि चीन को ऐसे कार्यों से बचना चाहिए, जो संबंधों में नकारात्मकता पैदा करते हैं और बेहतर समझ बनाने के प्रयासों को कमजोर करते हैं। Edited by : Sudhir Sharma 

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चीन ने बदले कुछ जगहों के नाम

पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद 2020 में दोनों देशों के संबंधों में भारी गिरावट आई। पिछले डेढ़ वर्षों में, दोनों पक्षों ने संबंधों को फिर से मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। हाल ही में जारी की गई एक नई सूची में, चीन ने भारतीय क्षेत्र के कुछ स्थानों के नाम बदल दिए हैं। चीनी नागरिक मामलों के मंत्रालय ने 2017 में ज़ांगनान में छह स्थानों के मानकीकृत नामों की पहली सूची जारी की, जबकि 15 स्थानों की दूसरी सूची 2021 में जारी की गई, जिसके बाद 2023 में 11 स्थानों के नामों वाली एक और सूची जारी की गई। जांगनान अरुणाचल प्रदेश का चीनी नाम है। चीन, अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता है। 

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भारत ने रविवार को कहा कि चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र को ‘ काल्पनिक नाम’ देना और ‘ निराधार विमर्श’  गढ़ना वास्तविकता को नहीं बदल सकता, लेकिन इससे द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों पर असर जरूर पड़ सकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नई दिल्ली भारतीय क्षेत्र के स्थानों को ऐसे नाम देने के चीनी पक्ष के किसी भी 'शरारती प्रयास' को “स्पष्ट रूप से खारिज” करती है। जायसवाल ने कहा कि भारत, चीन द्वारा भारत की भूमि के अंतर्गत आने वाले स्थानों को मनगढ़ंत नाम देने के किसी भी शरारती प्रयास को स्पष्ट रूप से खारिज करता है।”

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उन्होंने कहा कि चीन द्वारा झूठे दावे पेश करने और निराधार विमर्श गढ़ने के ऐसे प्रयास इस निर्विवाद वास्तविकता को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश सहित ये स्थान और क्षेत्र भारत का अभिन्न एवं अविभाज्य हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे।

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जायसवाल ने कहा कि चीनी पक्ष के ऐसे प्रयास 'भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने की कवायद से ध्यान भटकाती हैं। उन्होंने कहा कि चीन को ऐसे कार्यों से बचना चाहिए, जो संबंधों में नकारात्मकता पैदा करते हैं और बेहतर समझ बनाने के प्रयासों को कमजोर करते हैं। Edited by : Sudhir Sharma 


">भारत का चीन को कड़ा मैसेज, अरुणाचल प्रदेश के नाम बदलने की कोशिश खारिज, बोला- काल्पनिक नामों से नहीं बदलेगा सच

भारत का चीन को कड़ा मैसेज, अरुणाचल प्रदेश के नाम बदलने की कोशिश खारिज, बोला-  काल्पनिक नामों से नहीं बदलेगा सच
	
		
			
	
	अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने की चीन की कोशिश पर भारत ने कड़ा विरोध जताया है। विदेश मंत्रालय ने इसे 'शरारती प्रयास' बताते हुए खारिज किया और साफ कहा कि काल्पनिक नामों से हकीकत नहीं बदलेगी। भारत ने दो टूक कहा कि अरुणाचल प्रदेश उसका अभिन्न हिस्सा है और रहेगा, साथ ही ऐसे कदमों से दोनों देशों के संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ने की चेतावनी भी दी। भारत ने पिछले साल मई में और अप्रैल 2024 में चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों के नाम बदलने पर कड़ा रुख अपनाया था।

	
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	चीन ने बदले कुछ जगहों के नाम

	पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद 2020 में दोनों देशों के संबंधों में भारी गिरावट आई। पिछले डेढ़ वर्षों में, दोनों पक्षों ने संबंधों को फिर से मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। हाल ही में जारी की गई एक नई सूची में, चीन ने भारतीय क्षेत्र के कुछ स्थानों के नाम बदल दिए हैं। चीनी नागरिक मामलों के मंत्रालय ने 2017 में ज़ांगनान में छह स्थानों के मानकीकृत नामों की पहली सूची जारी की, जबकि 15 स्थानों की दूसरी सूची 2021 में जारी की गई, जिसके बाद 2023 में 11 स्थानों के नामों वाली एक और सूची जारी की गई। जांगनान अरुणाचल प्रदेश का चीनी नाम है। चीन, अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता है। 

	
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	भारत ने रविवार को कहा कि चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र को ‘ काल्पनिक नाम’ देना और ‘ निराधार विमर्श’  गढ़ना वास्तविकता को नहीं बदल सकता, लेकिन इससे द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों पर असर जरूर पड़ सकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नई दिल्ली भारतीय क्षेत्र के स्थानों को ऐसे नाम देने के चीनी पक्ष के किसी भी 'शरारती प्रयास' को “स्पष्ट रूप से खारिज” करती है। जायसवाल ने कहा कि भारत, चीन द्वारा भारत की भूमि के अंतर्गत आने वाले स्थानों को मनगढ़ंत नाम देने के किसी भी शरारती प्रयास को स्पष्ट रूप से खारिज करता है।”

	
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	उन्होंने कहा कि चीन द्वारा झूठे दावे पेश करने और निराधार विमर्श गढ़ने के ऐसे प्रयास इस निर्विवाद वास्तविकता को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश सहित ये स्थान और क्षेत्र भारत का अभिन्न एवं अविभाज्य हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे।
	
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	जायसवाल ने कहा कि चीनी पक्ष के ऐसे प्रयास 'भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने की कवायद से ध्यान भटकाती हैं। उन्होंने कहा कि चीन को ऐसे कार्यों से बचना चाहिए, जो संबंधों में नकारात्मकता पैदा करते हैं और बेहतर समझ बनाने के प्रयासों को कमजोर करते हैं। Edited by : Sudhir Sharma 

अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने की चीन की कोशिश पर भारत ने कड़ा विरोध जताया है। विदेश मंत्रालय ने इसे 'शरारती प्रयास' बताते हुए खारिज किया और साफ कहा कि काल्पनिक नामों से हकीकत नहीं बदलेगी। भारत ने दो टूक कहा कि अरुणाचल प्रदेश उसका अभिन्न हिस्सा है और रहेगा, साथ ही ऐसे कदमों से दोनों देशों के संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ने की चेतावनी भी दी। भारत ने पिछले साल मई में और अप्रैल 2024 में चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के कुछ स्थानों के नाम बदलने पर कड़ा रुख अपनाया था।

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चीन ने बदले कुछ जगहों के नाम

पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद 2020 में दोनों देशों के संबंधों में भारी गिरावट आई। पिछले डेढ़ वर्षों में, दोनों पक्षों ने संबंधों को फिर से मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। हाल ही में जारी की गई एक नई सूची में, चीन ने भारतीय क्षेत्र के कुछ स्थानों के नाम बदल दिए हैं। चीनी नागरिक मामलों के मंत्रालय ने 2017 में ज़ांगनान में छह स्थानों के मानकीकृत नामों की पहली सूची जारी की, जबकि 15 स्थानों की दूसरी सूची 2021 में जारी की गई, जिसके बाद 2023 में 11 स्थानों के नामों वाली एक और सूची जारी की गई। जांगनान अरुणाचल प्रदेश का चीनी नाम है। चीन, अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता है। 

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भारत ने रविवार को कहा कि चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र को ‘ काल्पनिक नाम’ देना और ‘ निराधार विमर्श’  गढ़ना वास्तविकता को नहीं बदल सकता, लेकिन इससे द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों पर असर जरूर पड़ सकता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नई दिल्ली भारतीय क्षेत्र के स्थानों को ऐसे नाम देने के चीनी पक्ष के किसी भी 'शरारती प्रयास' को “स्पष्ट रूप से खारिज” करती है। जायसवाल ने कहा कि भारत, चीन द्वारा भारत की भूमि के अंतर्गत आने वाले स्थानों को मनगढ़ंत नाम देने के किसी भी शरारती प्रयास को स्पष्ट रूप से खारिज करता है।”

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जायसवाल ने कहा कि चीनी पक्ष के ऐसे प्रयास 'भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने की कवायद से ध्यान भटकाती हैं। उन्होंने कहा कि चीन को ऐसे कार्यों से बचना चाहिए, जो संबंधों में नकारात्मकता पैदा करते हैं और बेहतर समझ बनाने के प्रयासों को कमजोर करते हैं। Edited by : Sudhir Sharma 


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