इंदौर के राजनगर में गुड़ खिलाने आए युवक की हाथी के हमले में मौत के पांच दिन बाद हाथी उज्जैन पहुंच गया है। फिलहाल उसे उज्जैन के निर्मोही अखाड़े में रखा गया है। वन विभाग ने हाथी को सुपुर्दगी नामे पर उसके महावत को सौंपा है, लेकिन स्पष्ट किया है कि विभाग की अनुमति के बिना हाथी को इंदौर और उज्जैन के अलावा किसी दूसरे शहर में नहीं ले जाया जा सकेगा। जरूरत पड़ने पर वन विभाग के बुलावे पर हाथी को इंदौर ले जाना होगा।
हाथी की देखरेख कर रहे महावत अमित गोस्वामी और महेंद्र महाराज ने बताया कि फिलहाल हाथी की स्थिति सामान्य है। वह पहले की तरह घास और फल खा रहा है। हालांकि, घटना के बाद उसके व्यवहार को लेकर लोग उसके पास जाने से बच रहे हैं। हाथी किसी तरह आक्रोशित न हो, इसके लिए उसके पैरों में बेड़ियां डाली गई हैं।
वन विभाग की टीम प्रतिदिन हाथी की गतिविधियों पर नजर रख रही है। उसके स्वास्थ्य और व्यवहार से संबंधित कुछ जांच भी कराई गई हैं, जिनकी रिपोर्ट अभी आना बाकी है।
हाथी के महावत और साधुओं पर केस
इंदौर के राजनगर में ऑटो चालक विजय राव की हाथी के हमले में हुई मौत के मामले में पुलिस और वन विभाग की कार्रवाई जारी है। घटना के बाद चंदन नगर पुलिस ने हाथी के महावत और उसके साथ मौजूद अन्य साधुओं के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया था। आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
वहीं, वन विभाग ने हाथी की सुरक्षा और देखरेख के लिए विशेष व्यवस्था की है। विभाग ने हाथी की सुपुर्दगी उसके महावत और उसके साथ पिछले आठ वर्षों से रह रहे संतों को दी है, लेकिन निगरानी की जिम्मेदारी वन विभाग के पास रहेगी।
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वन विभाग की रेंजर संगीता ठाकुर ने बताया कि पिछले आठ वर्षों से हाथी जिन संतों के साथ है, उन्हीं को सुपुर्दगी नामे पर हाथी सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि वन विभाग की अनुमति के बिना हाथी को इंदौर और उज्जैन के अलावा किसी अन्य शहर में नहीं ले जाया जा सकता। हाथी के खान-पान, स्वास्थ्य और व्यवहार पर लगातार नजर रखी जा रही है।
इंदौर और उज्जैन से बाहर नही जा पाएगा हाथी
इस मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर में एक चालान पेश किया गया था, जिसमे कोर्ट के अंतिम निर्णय तक हाथी को इंदौर के बाहर ले जाने पर इंदौर के बाहर नहीं ले जाने की बात कही गई थी। वहीं, इसके साथ ही हाथी को सार्वजनिक स्थानों पर ले जाने पर भी रोक लगाई गई थी। बताया जाता है कि हाथी को इंदौर से बाहर ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन उसे उज्जैन भेज दिया गया है।
जंजीरों में जकड़ा विजय लक्ष्मी हाथी

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