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इंदौर में अब तक सिर्फ 15 इंच बारिश, मानसून के 65 दिन बीते, प्रदेश के 50 जिले प्यासे

इंदौर में अब तक सिर्फ 15 इंच बारिश, मानसून के 65 दिन बीते, प्रदेश के 50 जिले प्यासे

Monsoon Update : मानसून का आधे से ज्यादा सफर पूरा हो चुका है, लेकिन इंदौर अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहा है। 65 दिन में शहर में सिर्फ 15 इंच बारिश…और पढ़ें

Publish Date: Wed, 05 Aug 2026 09:49:42 AM (IST)Updated Date: Wed, 05 Aug 2026 09:49:42 AM (IST)

इंदौर में बादल तो छा रहे हैं, लेकिन बरस नहीं रहे हैं। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. दशक का सबसे सूखा सीजन, बड़ी आबादी अभी भी टैंकर के भरोसे
  2. मानसून का आधे से ज्यादा सफर पूरा हो चुका है, लेकिन इंदौर अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहा है
  3. मानसून के 65 दिन में शहर में सिर्फ 15 इंच बारिश दर्ज हुई है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। मानसून का आधे से ज्यादा सफर पूरा हो चुका है, लेकिन इंदौर अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहा है। 65 दिन में शहर में सिर्फ 15 इंच बारिश दर्ज हुई है। पिछले 10 वर्षों में पहली बार इस अवधि में इतनी कम बारिश हुई है।

पूरे सीजन में केवल 5 जुलाई को ही ऐसा दिन रहा, जब शहर के लगभग सभी हिस्सों में एक जैसी बारिश हुई । इसके बाद कोई मजबूत मानसूनी सिस्टम इंदौर तक नहीं पहुंचा। इसका असर अब जलाशयों, पेयजल और खेती की चिंता के रूप में दिखने लगा है। वहीं प्रदेश के 55 में से 50 जिले सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में पहुंच चुके हैं।

शहर में बारिश भी असमान रही

एयरपोर्ट, राजबाड़ा, राजेंद्र नगर, महू नाका और रीगल क्षेत्र में अपेक्षाकृत ज्यादा पानी बरसा, जबकि पूर्वी इंदौर करीब 13 इंच बारिश तक ही सिमट गया। जुलाई से अब तक चार मजबूत सिस्टम बने, लेकिन कोई भी इंदौर में प्रभावी नहीं हो सका। आखिरी सिस्टम 25-26 जुलाई को बुरहानपुर, खरगोन और बड़वानी तक सीमित रह गया। वहां एक दिन में 5 से 7 इंच बारिश हुई, जबकि इंदौर में सिर्फ 4 .5 मिमी पानी गिरा।

तालाब सूखे, मई-जून जैसी स्थिति

कम वर्षा का असर जलाशयों पर दिख रहा है। 34 फीट क्षमता वाला बड़ा बिलावली तालाब मई-जून जैसी स्थिति में है। छोटा बिलावली सूख चुका है। 19 फीट क्षमता वाले यशवंत सागर का जलस्तर 12 फीट रह गया है।

प्रदेश में बारिश 18% कम

दूसरी ओर मप्र में 16.03 इंच बारिश हुई है, जबकि सामान्य 19.50 इंच होनी चाहिए थी। यानी वर्षा 18% कम है। इसका असर अब खेतों तक पहुंचने लगा है। विशेषज्ञों के अनुसार सोयाबीन, धान, मक्का और उड़द की फसलों की बढ़त प्रभावित होने लगी है। देवास सामान्य से 1 8% अधिक बारिश वाले चुनिंदा जिलों में शामिल है।

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