इंदौर के शासकीय अष्टांग आयुर्वेद अस्पताल ने गंभीर घावों के इलाज के लिए रेड लाइट थेरेपी यानी फोटो बायो मॉड्यूलेशन शुरू की है। …और पढ़ें
HighLights
- बिना दर्द-सर्जरी के भरेगा घाव, माइटोकॉन्ड्रिया होगा सक्रिय
- मधुमेह, जलने और सर्जरी के पुराने घावों में फायदेमंद
- त्वचा पुनर्निर्माण में भी मददगार, पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शासकीय अष्टांग आयुर्वेद अस्पताल ने गंभीर घावों के इलाज के लिए आधुनिक तकनीक की शुरुआत की है। अस्पताल में अब रेड लाइट थेरेपी (फोटो बायो माड्यूलेशन) की सुविधा शुरू हो गई है। इसकी मदद से अब बिना सर्जरी और दवाइयों के मरीजों के घाव भर सकेंगे। इसके लिए अस्पताल में विशेष इन्फ्रारेड लाइट यूनिट स्थापित की गई है, जो मरीजों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विशेषज्ञों के मुताबिक रेड लाइट थेरेपी में लाल रोशनी और नियर इन्फ्रारेड लाइट का उपयोग किया जाता है। यह रोशनी शरीर के अंदर तक पहुंचकर कोशिकाओं पर असर डालती है। खासतौर पर यह कोशिकाओं के माइटोकान्ड्रिया (जो ऊर्जा बनाने का केंद्र होता है) को सक्रिय करती है।
जब माइटोकान्ड्रिया सक्रिय होते हैं, तो शरीर में ऊर्जा का उत्पादन बढ़ जाता है, जिससे घाव जल्दी भरने लगते हैं। इस थेरेपी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पूरी तरह से सुरक्षित और बिना दर्द वाली प्रक्रिया है। इसमें किसी तरह की सर्जरी या दवाओं के अधिक इस्तेमाल की जरूरत नहीं होती। मरीज को सिर्फ कुछ समय तक इस विशेष रोशनी के संपर्क में रखा जाता है।
इन मरीजों को मिलेगा लाभ
रेड लाइट थेरेपी खासकर उन मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है, जिनके घाव लंबे समय से नहीं भर रहे हैं। जैसे कि मधुमेह के मरीजों के घाव, जलने के निशान या सर्जरी के बाद के घाव। यह सूजन को कम करने, दर्द में राहत देने और त्वचा के पुनर्निर्माण में भी मदद करती है। बता दें कि यह मशीन अस्पताल को दान में मिली है। शुभारंभ कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. अजीतपाल सिंह चौहान, अधीक्षक डॉ. एसके दास, अधिकारी, डॉ. अखलेश भार्गव, गौतम राहुल मारवाल आदि मौजूद रहे।
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