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इंदौर में फौती नामांतरण में एफआईआर पर राजस्व अधिकारियों का विरोध, नियम बनाने की रखी मांग

इंदौर में फौती नामांतरण में एफआईआर पर राजस्व अधिकारियों का विरोध, नियम बनाने की रखी मांग

विधि और प्रक्रिया का पालन करने के बावजूद अधिकारियों को गलत तरीके से एफआइआर में आरोपी बनाया जा रहा है, जिससे पूरे राजस्व अमले में असंतोष है। …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 27 May 2026 08:35:26 AM (IST)Updated Date: Wed, 27 May 2026 08:35:26 AM (IST)

राजस्व अधिकारी कर रहे हैं विरोध। (एआई जनरेट)

HighLights

  1. 45 दिन में नहीं हुआ समाधान, तो फौती नामांतरण नहीं करेंगे राजस्व अधिकारी
  2. अधिकारियों को गलत तरीके से एफआइआर में आरोपी बनाया जा रहा है
  3. अधिकारियों ने आवश्यक दस्तावेजों को लेकर नियम स्पष्ट करते हुए परिपत्र जारी करने की मांग की है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदाैर। मध्य प्रदेश राजस्व अधिकारी (कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा) संघ ने फौती नामांतरण प्रकरणों में राजस्व अधिकारियों पर दर्ज हो रही आपराधिक कार्रवाई को लेकर विरोध जताया है।

संघ ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि विधि और प्रक्रिया का पालन करने के बावजूद अधिकारियों को गलत तरीके से एफआइआर में आरोपी बनाया जा रहा है, जिससे पूरे राजस्व अमले में असंतोष है। संघ ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ दर्ज अपराध समाप्त करने और फौती नामांतरण में वारिसों की जांच प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों को लेकर नियम स्पष्ट करते हुए परिपत्र जारी करने की मांग की।

राजस्व अधिकारियों पर कार्रवाई का विरोध

संघ ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर फौती नामांतरण प्रकरण में राजस्व अधिकारियों पर कार्रवाई का विरोध किया है। संघ के प्रांताध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि हाल ही में ईडब्लयू द्वारा रामपुरा के तत्कालीन तहसीलदार बालकृष्ण मकवाना को फौती नामांतरण प्रकरण में आरोपित बनाया गया है, जबकि नामांतरण नियमों के अनुसार तसहीलदार आवेदक द्वारा प्रस्तुत पारिवारिक वंशावली, पटवारी प्रतिवेदन, शपथपत्र और ग्राम पंचायत के प्रमाणीकरण के आधार पर ही कार्रवाई करते हैं।

वारिसों की अलग से जांच का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है

नियमों में वारिसों की अलग से जांच का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। फौती नामांतरण में सार्वजनिक सूचना देने की प्रक्रिया नियमों के तहत तहसील कार्यालय और ग्राम पंचायत स्तर पर की जाती है, जिसका पालन संबंधित प्रकरण में किया गया था। संघ ने यह तर्क भी रखा कि तहसीलदारों के पास स्थानीय पूछताछ और पटवारी रिपोर्ट के अलावा जानकारी जुटाने का कोई अन्य माध्यम नहीं होता।

मांगे नहीं मानी तो फौती नामांतरण नहीं करेंगे

प्रांताध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि संघ ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ दर्ज अपराध समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू करने। साथ ही फौती नामातरण में वारिसों की जांच प्रक्रिया स्पष्ट करने और दस्तावेजों के संबंध में नियम और परिपत्र जारी करने की मांग की है।राजस्व अधिकारियों पर एफआइआर से पूर्व राजस्व विभाग से परिक्षण की व्यवस्था शुरू करने की मांग भी रखी।संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 45 दिनों में मांगे पूरी नहीं हुई तो 16 जुलाई से प्रदेशभर के राजस्व अधिकारी फौती नामांतरण प्रकरणों में आदेश पारित करने से विरत होने का विकल्प चुनेंगे।

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