महापौर पुष्यमित्र भार्गव के नेतृत्व वाली नगर सरकार 5 अगस्त को अपने कार्यकाल के चार साल पूरे कर रही है। इन चार सालों में नगर निगम ने एक तरफ ग्रीन बांड …और पढ़ें
HighLights
- महापौर पुष्यमित्र भार्गव के नेतृत्व वाली नगर सरकार 5 अगस्त को अपने कार्यकाल के चार साल पूरे कर रही है
- नगर निगम ने एक तरफ ग्रीन बांड जारी कर देशभर में वाहवाही लूटी
- वहीं भागीरथपुरा दूषित पानी कांड ने माथे पर ऐसा कलंक लगाया कि हमारे शहर का सिर शर्म से झुक गया
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : महापौर पुष्यमित्र भार्गव के नेतृत्व वाली नगर सरकार बुधवार 5 अगस्त को अपने कार्यकाल के चार साल पूरे कर रही है। इन चार सालों में कई उतार-चढ़ाव शहर ने देखे। नगर निगम ने एक तरफ ग्रीन बांड जारी कर देशभर में वाहवाही लूटी तो दूसरी तरफ भागीरथपुरा दूषित पानी कांड ने माथे पर ऐसा कलंक लगाया कि आठ साल से स्वच्छता में सिरमौर हमारे शहर का सिर शर्म से झुक गया।
इन चार सालों में ऐसे कई विकास कार्य भी हुए जो सालों से लंबित थे। मास्टर प्लान की 23 सड़कों के लिए केंद्र से 468 करोड़ रुपये की राशि निगम के खाते में पहुंची तो आने वाले 25 सालों के लिए पानी का इंतजाम करते हुए नर्मदा के चौथे चरण का काम भी शुरू हुआ। डिजिटलाइज की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 90 लाख दस्तावेजों का डिजिटलाइजेशन शुरू हुआ तो दूसरी तरफ 354 फर्जी नामांतरण का दाग भी दामन पर लगा।
इन्हीं चार सालों में बगैर काम 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान होने की घटना भी हुई तो काम के बावजूद भुगतान नहीं होने से नाराज ठेकेदारों ने नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी भी की। महापौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मंगलवार को मीडिया से चर्चा में परिषद की उपलब्धियां गिनाईं।
ये हुए काम
- ग्रीन बांड जारी कर जुटाए 244 करोड़ – नगर निगम ने ग्रीन बांड जारी कर 244 करोड़ रुपये जुटाए। इस राशि से जलूद में 60 मेगावाट क्षमता का सोलर पार्क विकसित किया गया। इससे निगम को प्रतिमाह चार करोड़ रुपये की बचत हो रही है।
ये अधूरे काम जिससे बिगड़ी नगर निगम की छवि
- भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में 36 लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे देश में इंदौर की छवि को धूमिल किया। शहर में गंदे पानी की समस्या आज भी पूरी तरह से हल नहीं हो सकी। कई क्षेत्रों में आज भी दूषित पानी आता है।
- ड्रेनेज विभाग में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के फर्जी बिल भुगतान घोटाला सामने आया। देशभर में छवि बिगड़ी।
- राजस्व विभाग में संपत्ति नामांतरण घोटाला सामने आया। रातों रात 354 संपत्तियों के नामांतरण हो गए।
- नगर निगम सीमा में शामिल हुए 29 गांवों में आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
- स्मार्ट सिटी क्षेत्र में नक्शे की फीस को लेकर अब तक स्थिति अस्पष्ट है।
- यातायात को लेकर कई प्लान चार साल में बने, लेकिन व्यवस्था नहीं बन सकी। राजवाड़ा पर अहिल्या लोक, गांधी हॉल को निजी हाथों में सौंपना, राजवाड़ा को ई-रिक्शा मुक्त करना, 56 पर कार पार्किंग का निर्णय वापस लेना पड़ा।
- हर साल पैचवर्क के नाम पर 50 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद शहर की सड़कों को गड्ढा मुक्त नहीं बना सके।
- नगर निगम का भवन आज भी अधूरा है।
- करोड़ों खर्च करने के बावजूद कान्ह नदी साफ नहीं हो सकी। नाला टेपिंग के बावजूद आज भी कई जगह सीवर नदी में मिल रहा है।
- मास्टर प्लान की सड़कों के निर्माण की गति अत्यंत धीमी है।
- मधुमिलन चौराहा और नेहरू स्टेडियम जीर्णोद्धार का काम आज भी अधूरा है।
विकास का नया मानक स्थापित किया है
आगामी वर्षों में नगर निगम का फोकस सीवर मुक्त इंदौर, अमृत-2.0, नमामि गंगे, सिंहस्थ-2028, नई जल प्रदाय परियोजनाएं, आधुनिक सड़क नेटवर्क, डिजिटल गवर्नेंस, पर्यावरण संरक्षण, उपचारित जल के पुनः उपयोग, जलवायु अनुकूल विकास तथा नागरिक सहभागिता आधारित शहरी प्रबंधन पर रहेगा। पिछले चार वर्षों में इंदौर ने स्वच्छता की उपलब्धियों को आधार बनाकर जल, सड़क, सीवरेज, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, डिजिटल नवाचार, वित्तीय अनुशासन और सुशासन के क्षेत्र में विकास का नया मानक स्थापित किया है। यह विकास यात्रा आने वाले वर्षों में इंदौर को देश के सबसे आधुनिक, सतत, आत्मनिर्भर और नागरिक-अनुकूल महानगरों की अग्रिम पंक्ति में स्थापित करेगी। -पुष्यमित्र भार्गव, महापौर इंदौर
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