इंदौर में राहगीरों को शुद्ध-ठंडा पानी उपलब्ध कराने के लिए स्मार्ट सिटी योजना के तहत 3.5 करोड़ रुपये की लागत से लगाई गई आरओ मशीनें गायब हो गई हैं। …और पढ़ें
HighLights
- 3.5 करोड़ के वाटर प्लांट लगे, फिर अचानक गायब
- हाईकोर्ट ने निगम से मांगा जवाब, 15 जून को अगली सुनवाई
- भीषण गर्मी में पानी का इंतजाम नहीं, जनता के पैसे बर्बाद
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। राहगीरों को पीने का ठंडा और शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के नाम पर नगर निगम ने स्मार्ट सिटी योजना के तहत कुछ वर्ष पहले आधुनिक प्याऊ लगाए थे। इस व्यवस्था पर साढ़े तीन करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। कंपनी को दस वर्ष तक मशीनों का रखरखाव भी करना था। वर्तमान में ये सारी मशीनें गायब हो गई हैं। कहां गईं, इसकी जानकारी किसी को नहीं है।
ये तर्क शुक्रवार को याचिकाकर्ता महेश गर्ग की ओर से प्रस्तुत जनहित याचिका में एडवोकेट मनीष यादव ने रखे। कोर्ट ने तर्क सुनने के बाद नगर निगम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में कहा है कि स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत निगम की पूर्व परिषद ने साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से शहर के विभिन्न क्षेत्रों के जनता की सुविधा के लिए पेयजल के लिए वाटर प्लांट लगाए थे।
पीने के लिए पानी का कोई इंतजाम नहीं
टेंडर शर्तों के अनुसार मशीनों का रखरखाव और समय-समय पर जांच इन्हें लगाने वाली कंपनी और स्मार्ट सिटी को करनी थी। ये मशीनें स्थापित करने के कुछ दिन तक तो प्रमुख चौराहे और मार्गों पर दिखीं, लेकिन इसके बाद अचानक गायब हो गईं। इनका क्या हुआ, किसी को नहीं पता। वर्तमान में भीषण गर्मी का दौर है, लेकिन राहगीरों के लिए पीने के पानी का कोई इंतजाम नहीं है।
मशीनें कहां गईं, इसका भी कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है। जनता के साढ़े तीन करोड़ पानी में बह गए। राहगीर पानी खरीदने को मजबूर हैं। कोर्ट ने मुख्य सचिव नगरीय प्रशासन विभाग, निगमायुक्त, कार्यपालन यंत्री नर्मदा जल वितरण विभाग, अधीक्षण यंत्री से चार सप्ताह में जवाब देने के लिए कहा है। अगली सुनवाई 15 जून को होगी।
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