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पर्यावरण दिवस : इंदौर शहर में विकास के नाम पर बढ़ रहा कांक्रीट का जंगल, घट रही हरियाली

पर्यावरण दिवस : इंदौर शहर में विकास के नाम पर बढ़ रहा कांक्रीट का जंगल, घट रही हरियाली

मास्टर प्लान के मुताबिक इंदौर में कम से कम 21 प्रतिशत हरियाली होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में यह घटकर केवल 7 से 9 प्रतिशत के बीच रह गई है। कुछ वर्षों पह …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 05 Jun 2026 09:58:29 AM (IST)Updated Date: Fri, 05 Jun 2026 09:58:29 AM (IST)

शहर के कई इलाकों में इस तरह इमारतों के बीच सिमट गई है हरियाली। (नईदुनिया प्रतिनिधि्)

HighLights

  1. महज 13 फीसद हरित क्षेत्र बचा, इंदौर वनमंडल का जंगल भी लगा सिमटने
  2. मास्टर प्लान के मुताबिक इंदौर में कम से कम 21 प्रतिशत हरियाली होना चाहिए
  3. वर्तमान में हरित क्षेत्र घटकर केवल 7 से 9 प्रतिशत के बीच रह गई है

कपिल नीले, नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में विकास की रफ्तार तेज हुई है, लेकिन इसकी बड़ी कीमत शहर को हरियाली से चुकाना पड़ रही है।

मेट्रो परियोजना, फ्लाईओवर, सड़क चौड़ीकरण और स्मार्ट सिटी के अन्य विकास परियोजनाओं के लिए हजारों पेड़ काटे गए। इसके चलते शहर का हरित क्षेत्र लगातार सिमटता जा रहा है। मास्टर प्लान के मुताबिक इंदौर में कम से कम 21 प्रतिशत हरियाली होना चाहिए, लेकिन वर्तमान में यह घटकर केवल 7 से 9 प्रतिशत के बीच रह गई है। कुछ वर्षों पहले तक यह आंकड़ा लगभग 13 प्रतिशत था।

ऐसी ही स्थिति वनक्षेत्र में देखने को मिल रही है। जहां कई स्थानों पर दशकों पुराने पेड़ों की बलि देकर सड़कें, रेलवे लाइनें और रिंग रोड बनाई गईं। इसका असर सिर्फ हरियाली पर ही नहीं पड़ रहा है। बल्कि पर्यावरण और जल संसाधनों पर भी दिखाई देने लगा है। लगातार पेड़ों की कटाई की वजह से शहर में तापमान बढ़ने लगा है। यहां तक कि इस साल जल संकट भी देखा गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार शहर में जो जल संकट की स्थिति बनी है। वह लगातार भू-जल स्तर कम होने के संकेत है।

घटा जंगल का दायरा

वन क्षेत्रों की स्थिति भी अधिक चिंताजनक है। इंदौर वनमंडल में जंगलों के दायरे में लगभग 0.27 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। प्रदेशभर में सटीक वनक्षेत्र की परिभाषा, राजस्व व रिकार्ड भूमि में अंतर है। इसके कारण जंगल के दायरे में कमी के आंकड़े अलग-अलग मिलते हैं। वनों की स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में लगभग 612 वर्ग किलोमीटर (जो कि इंदौर शहर के कुल क्षेत्रफल से भी अधिक है) का वन आवरण कम हुआ है, जिसमें इंदौर संभाग के जंगल भी शामिल हैं। सड़क निर्माण, ट्रांसमिशन लाइनें और अतिक्रमण इसके प्रमुख कारण हैं। पेड़ों की कटाई के बदले क्षतिपूरक पौधारोपण इंदौर से करीब 200 किलोमीटर दूर अलीराजपुर, झाबुआ और धार के वन क्षेत्रों में किया गया, लेकिन इससे शहर को खोई हुई हरियाली वापस नहीं मिल सकी।

ऐसे कम हुई हरियाली

  • इंदौर-खंडवा राजमार्ग के लिए इंदौर-बड़वाह वनमंडल के अंतर्गत आने वाले 82 हेक्टेयर जंगल से सड़क निकाली जा रही है। 9640 पेड़ काटे गए है। यहां तक कि हाइटेंशन लाइन और टावर को शिफ्ट करने को लेकर अतिरिक्त 17 हेक्टेयर वनक्षेत्र को जोड़ा गया है। एक हजार पेड़ कटेंगे।
  • महू-खंडवा ब्राडगेज के लिए इंदौर-बड़वाह और खंडवा का 454 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ है। यहां से पटरियां निकालने के लिए 1 लाख 51 हजार पेड़ों को चिन्हित किया गया, लेकिन 1 लाख 34 हजार पेड़ों को काटा जाएगा। सुरंग बनाने से रेलवे ने लगभग 17 हजार पेड़ों को बचाया गया है।
  • आउट रिंगरोड के लिए इंदौर-धार वनमंडल की 50 हेक्टेयर वनभूमि ली गई है। यहां लगे पांच हजार से ज्यादा पेड़ काटे जा रहे है। इसमें पश्चिमी और पूर्वी रिंगरोड दोनों शामिल है।
  • इंदौर-बुधनी रेल लाइन के लिए भी सर्वे किया गया है। यहां से 35 प्रजातियों के 277 से 300 पेड़ कटेंगे।
  • जंगल में अतिक्रमण भी बड़ी समस्या है। इसके चलते विभिन्न प्रजातियों के पेड काटे गए है।
  • ऐसे बढ़ाएंगे भू-जल स्तर

    • 2020 से प्रदेश में 94 नगर वन और नगर वाटिकाओं को मंजूरी मिली। वन विभाग ने 20 हजार देवगुराडिया और 24 हजार दांतोनिया में पौधे लगाकर नगर वन बनाया। अब देवगुराडिया में नगर वन के दूसरे चरण का काम होगा। 8 हजार पौधे रोपेंगे। साथ ही छोटे तालाबों से भू-जल स्तर बढ़ाएंगे।
    • भू-जल पर काम करने वाला है। इंदौर वनमंडल के अंतर्गत इंदौर-चोरल, महू और मानपुर के 20 वनक्षेत्रों में में 2 लाख 81 हजार पौधे रोपेंगे। छोटे तालाब के अलावा चेकडेम और कंटूर निर्माण किया जाएगा। साथ ही नष्ट हो चुके 84 हजार पौधों को भी बदला जाएगा।

    आज आर्मी वार कॉलेज में लगेंगे पौधे

    पर्यावरण दिवस के मौके पर इंदौर वनमंडल ने महू रेंज में आने वाले आर्मी वार कॉलेज में शुक्रवार को पौधे लगाएं जाएंगे। प्रदेश में विलुप्त होते पौधों को रोपा जाएगा। इसमें 50 विभिन्न प्रजातियों के एक हजार पौधे लगाएंगे।

    जल संरचना पर करेंगे काम

    पर्यावरण के लिए हरियाली बेहद जरूरी है। मगर इन दिनों जल संकट को लेकर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इसके लिए वन विभाग ने जल संरचना को बढ़ाने की दिशा में काम किया है। इसका फायदा भू-जल स्तर में वृद्धि करना है। इंदौर वनमंडल के बीस वनक्षेत्रों में पौधों के साथ ही पानी के लिए छोटे तालाब बनाएंगे। -लाल सुधाकर सिंह, वनमंडलाधिकारी, इंदौर वनमंडल

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