कोर्ट ने दोनों के नाम याचिका में से हटाने के लिए प्रस्तुत आवेदन स्वीकारते हुए कहा कि आयोग की जांच में नाम सामने आया तो दोनों को दोबारा प्रतिवादी बनाया …और पढ़ें
HighLights
- तत्कालीन अपर आयुक्त, जल समिति प्रभारी को सशर्त राहत।
- कोर्ट ने कहा जांच में नाम सामने आया तो प्रतिवादी बनाएंगे।
- जांच आयोग को 20 जुलाई तक रिपोर्ट पेश करने को कहा।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से हुई 36 मौत के मामले को लेकर चल रही जनहित याचिकाओं में शुक्रवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने निगम के तत्कालीन अपर आयुक्त आइएएस रोहित सिसोनिया और नगर निगम जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा (बबलू) को सशर्त राहत दे दी।
कोर्ट ने दोनों के नाम याचिका में से हटाने के लिए प्रस्तुत आवेदन स्वीकारते हुए कहा कि आयोग की जांच में नाम सामने आया तो दोनों को दोबारा प्रतिवादी बनाया जा सकेगा। शुक्रवार को न्यायिक आयोग की रिपोर्ट होना थी, लेकिन नहीं हुई। कोर्ट ने आयोग को 20 जुलाई तक रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।
भागीरथपुरा दूषित पानी कांड को लेकर प्रस्तुत आधा दर्जन जनहित याचिकाओं में से एक में जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू, तत्कालीन अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया, पूर्व कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव, पार्षद कमल वाघेला को पक्षकार बनाया गया है।
सिसोनिया और शर्मा ने अपना नाम याचिका में से हटाने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। उनका कहना था कि वे न्यायिक आयोग के समक्ष अपने बयान दर्ज करवा चुके हैं। ऐसे में उनके नाम याचिका में रखने का कोई मतलब नहीं है। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आवेदन स्वीकार कर लिए। कोर्ट ने याचिका में सात दिन के भीतर संशोधन करने के लिए भी कहा है।
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