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भूत बावड़ी, जिसका नाम सुन डरते थे लोग; अब वहां पर हुआ जश्न-ए-इंदौर

भूत बावड़ी, जिसका नाम सुन डरते थे लोग; अब वहां पर हुआ जश्न-ए-इंदौर

इंदौर नगर निगम ने सदर बाजार स्थित होलकरकालीन ऐतिहासिक भूत बावड़ी का संरक्षण, रंग-रोगन, संरचनात्मक सुधार और रेलिंग कार्य कराया। …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 11 Jun 2026 11:26:56 AM (IST)Updated Date: Thu, 11 Jun 2026 11:29:25 AM (IST)

बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन में शामिल हुए।

HighLights

  1. बावड़ी के पुनरुद्धार बाद जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत ‘जश्न-ए-इंदौर’ सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ
  2. कभी नाम से डरने वाली बावड़ी में अब शास्त्रीय संगीत, कथक, कविता गूंजी
  3. इतिहासकार जफर अंसारी, नृत्यांगना वंशिका-तान्या, कवि पलाश ने प्रस्तुति दी

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। शहर की ऐतिहासिक बावड़ियों एवं कुओं के संरक्षण, पुनरुद्धार एवं सुंदरीकरण के क्रम में नगर निगम ने सदर बाजार स्थित होलकरकालीन ऐतिहासिक भूत बावड़ी की साफ-सफाई, रंग-रोगन, संरचनात्मक सुधार तथा सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक रेलिंग कार्य कराया। पुनरुद्धार पूर्ण होने के बाद बावड़ी परिसर को सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ते हुए यहां विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।

जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत भूत बावड़ी परिसर में ‘जश्न-ए-इंदौर’ नामक सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ। आयोजन का उद्देश्य शहर की ऐतिहासिक धरोहरों को जनसामान्य से जोड़ना, जल संरचनाओं के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा इंदौर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना था।

सामाजिक मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया

कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से कलाकारों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध किया। इतिहासकार जफर अंसारी ने भूत बावड़ी एवं इंदौर की ऐतिहासिक धरोहरों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों एवं इतिहास की जानकारी साझा की।

कथक नृत्यांगना वंशिका एवं तान्या ने प्रस्तुतियों से भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सुंदरता का प्रदर्शन किया। कवि पलाश ने कविताओं के माध्यम से इंदौर की संस्कृति, विरासत और सामाजिक मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

किसी समय नाम से घबराते थे, अब हो रहे आयोजन

किसी समय भूत बावड़ी के नाम से लोग घबराते थे, लेकिन अब इसी बावड़ी में सांस्कृतिक आयोजन हो रहे हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और साहित्यिक अभिव्यक्तियां यहां गूंज सुनाई दे रही हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिकों, युवाओं, कला प्रेमियों एवं इतिहास में रुचि रखने वालों ने सहभागिता की।

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