सुनवाई के दौरान एएसआइ के संपत्ति पर मालिकाना हक और अधिकार को लेकर उन्होंने कोर्ट में ये बात भी कही कि एएसआइ भोजशाला का स्वामी नहीं, अभिभावक है। समय-समय पर एएसआइ इसका रखरखाव करती है। जैन ने मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी, काजी जकुल्ला सहित अन्य की आपत्तियों का बिंदुवार जवाब दिया। उन्होंने इसे प्राचीन इमारत बताते हुए कहा कि, भोजशाला राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहर है। 1904 में इसकी विधिवत घोषणा एएसआइ ने की थी। उन्होंने बताया, मुस्लिम राजाओं ने मंदिर को मस्जिद में बदला था, जबकि मूल रूप से यह सरस्वती देवी का मंदिर ही है। एएसआइ की ओर से मंगलवार को भी तर्क रखे जाएंगे।
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