रामलक्ष्मणः मैंने प्यार किया, हम आपके हैं कौन जैसी फिल्मों के संगीतकार, हिट गानों से दुनिया को बनाया अपना दीवाना
“मैंने प्यार किया”, “हम आपके हैं कौन”, और “हम साथ साथ हैं” जैसी फिल्मों में अपने शानदार संगीत के लिए पहचाने जाने वाले दिग्गज संगीतकार रामलक्ष्मण का 22 मई 2021 को निधन हुआ था। रामलक्ष्मण का असली नाम विजय काशीनाथ पाटिल था। उन्होंने हिंदी, भोजपुरी और मराठी की करीब 150 से ज्यादा फिल्मों में म्यूजिक दिया। उनको राजश्री प्रोडक्शन की फिल्मों में खास पहचान मिली।
रामलक्ष्मण नाम एक संगीतकार जोड़ी का प्रतीक है, जिसने 80-90 के दशक में रोमांटिक और पारिवारिक फिल्मों में संगीत दिया। रामलक्ष्मण की जोड़ी मुख्य रूप से लक्ष्मण, यानी विजय पाटिल की मेहनत और प्रतिभा से जानी जाती है। उनकी धुनें आज भी कई लोगों के दिलों में गूंजती हैं। इस जोड़ी के राम, सुरेंद्र थे।
विजय पाटिल का जन्म 16 सितंबर 1942 को नागपुर में हुआ था। बचपन से ही संगीत के प्रति गहरा लगाव रखने वाले विजय ने पारंपरिक प्रशिक्षण लिया और विभिन्न वाद्यों जैसे पियानो, अकॉर्डियन और ड्रम्स पर बजाना सीखा। दादा कोंडके ने रामलक्ष्मण को मराठी फिल्मों से काम की शुरुआत कराई थी। इसके बाद रामलक्ष्मण ने दादा कोंडके की कई हिंदी फिल्मों में भी संगीत दिया। इस जोड़ी की 1977 में हिंदी सिनेमा में एंट्री ‘एजेंट विनोद’ फिल्म से हुई।
हालांकि इस जोड़ी के राम यानी सुरेंद्र की जल्द ही मृत्यु हो गई। इसके बाद विजय पाटिल यानी ‘लक्ष्मण’ ने रामलक्ष्मण ब्रांड को जीवित रखा। वर्ष 1989 में सूरज बड़जात्या की फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ ने रामलक्ष्मण को रातोंरात स्टार बना दिया। सलमान खान और भाग्यश्री के अभिनय में बनी इस फिल्म के गाने युवा पीढ़ी के होठों पर चढ़ने लगे। “दिल दीवाना,” “कबूतर जा जा जा,” “आजा शाम होने आई,” “मैंने प्यार किया” और “मेरे सवालों का” जैसे गाने आज भी शादियों और पार्टियों में गूंजते हैं। इस फिल्म के सभी 11 गाने हिट रहे।
इसके बाद वर्ष 1994 में ‘हम आपके हैं कौन..!’ फिल्म आई। इस फिल्म के “दीदी तेरा देवर दीवाना,” “मई नी मई,” “जूते दो पैसा लो,” “हम आपके हैं कौन,” और “वाह वाह राम जी” जैसे गाने पूरे देश में छा गए। इसके बाद वर्ष 1999 में ‘हम साथ-साथ हैं’ फिल्म ने भी रामलक्ष्मण का एक और लोहा मनवाया।
रामलक्ष्मण ने लता मंगेशकर, आशा भोसले, किशोर कुमार, उदित नारायण, अलका याग्निक और कुमार सानू जैसे दिग्गज गायकों के साथ काम किया। ‘100 डेज’, ‘पत्थर के फूल’, ‘पुलिस पब्लिक’, ‘मुस्कुराहट’ जैसी फिल्मों में भी उनके संगीत ने चार चांद लगा दिए। विजय पाटिल कम चर्चा में रहना पसंद करते थे। वे संगीत को ही अपनी पहचान मानते थे। 22 मई 2021 को 79 वर्ष की आयु में उन्होंने आखिरी सांस ली। उनके निधन की खबर से हर तरफ शोक का माहौल छा गया था।
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![बीच परफॉर्मेंस बैकस्टेज जाकर दिया बच्चे को जन्म, पत्थर के नाल काटकर फिर स्टेज पर आकर किया डांस श्रद्धा कपूर बॉलीवुड की एक जानी-मानी अभिनेत्री है और इस समय वह अपनी आने वाली फिल्म ‘ईठा’ को लेकर काफी चर्चा में बनी हुई है। इस फिल्म में उन्होंने महाराष्ट्र की मशहूर लावणी और तमाशा कलाकार विठाबाई भाऊ मंग नारायणगांवकर का किरदार निभाया है। हाल ही में इस फिल्म का टीजर रिलीज हुआ जिसके बाद में फंस की एक्साइटमेंट और ज्यादा बढ़ गई कि आखिरकार विठाबाई कौन है। जिन्होंने अपनी जिंदगी संघर्ष और कला को समर्पित कर दी। कौन है विठाबाई? आज हम विठाबाई के बारे में आपको बताने वाले हैं। उनका जन्म 1 जुलाई 1935 में महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के पंढरपुर में एक ऐसे परिवार में हुआ जहां पर तमाशा सिर्फ एक कला नहीं थी बल्कि जीवन का एक हिस्सा हुआ करता था। विठाबाई के दादा नारायण खुडे ने तमाशा मंडली की स्थापना की थी। उनके पिता भाऊ बापू नारायणगांवकर ने भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाया और इसीलिए बचपन से ही विठाबाई भी मंच और लोक कला के माहौल में ही बड़ी हुई थी। 10 साल की उम्र से शुरू किया परफॉर्म करना बताया जाता है कि विठाबाई ने एक्टिंग की कोई भी ट्रेनिंग नहीं ली थी। बचपन से ही वह कल के प्रति काफी झुकाव रखती थी। बेहद कम उम्र में ही उन्होंने लावणी, गवलन और भेदिक जैसे लोकगीतों और निर्दोषों को सीखना भी शुरू कर दिया था। जब उनकी पारिवारिक मंडली को आर्थिक तंगी और शोज न मिलने की समस्या होने लगी तो विठाबाई ने सिर्फ 10 साल की उम्र में ही स्टेज पर डांस करना शुरू कर दिया था। मंच पर ही दिया बच्चे को जन्म विठाबाई की जिंदगी का सबसे मशहूर किस्सा यह था कि एक बार वह 9 महीने की गर्भवती होने के बावजूद भी मंच पर परफॉर्म कर रही थी। तभी उनको प्रसव पीड़ा होने लग गई थी। इसके बाद वह मंच के पीछे जाकर बच्चों को जन्म देकर कुछ देर बाद ही दोबारा मंच पर लौटने की तैयारी करने लग गई। हालांकि उन्हें आराम करने की सलाह दी गई थी और कार्यक्रम को रोक दिया गया था। यह घटना आज भी उनके कला समर्पण की सबसे बड़ी मिसाल कही जाती है। [embed]https://www.youtube.com/watch?v=wP4IJ11n_as[/embed] राज कपूर का ठुकराया था फ़िल्म ऑफर विठाबाई की पापुलैरिटी बढ़ाने के बाद में उन्हें कई सारी फिल्मों के ऑफर भी मिलने लग गए थे। कुछ मीडिया खबरों की माने तो उन्हें शोमैन राज कपूर की तरफ से फिल्म का ऑफर दिया गया था। लेकिन उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में आने के बजाय तमाशा को ही अपना जीवन समर्पित कर दिया था। उनका मानना था कि अगर वह तमाशा छोड़ देती है तो उनकी मंडली से जुड़े हुए कलाकारों और उनके परिवारों का सहारा पूरी तरीके से छिन जाएगा। बीच परफॉर्मेंस बैकस्टेज जाकर दिया बच्चे को जन्म, पत्थर के नाल काटकर फिर स्टेज पर आकर किया डांस श्रद्धा कपूर बॉलीवुड की एक जानी-मानी अभिनेत्री है और इस समय वह अपनी आने वाली फिल्म ‘ईठा’ को लेकर काफी चर्चा में बनी हुई है। इस फिल्म में उन्होंने महाराष्ट्र की मशहूर लावणी और तमाशा कलाकार विठाबाई भाऊ मंग नारायणगांवकर का किरदार निभाया है। हाल ही में इस फिल्म का टीजर रिलीज हुआ जिसके बाद में फंस की एक्साइटमेंट और ज्यादा बढ़ गई कि आखिरकार विठाबाई कौन है। जिन्होंने अपनी जिंदगी संघर्ष और कला को समर्पित कर दी। कौन है विठाबाई? आज हम विठाबाई के बारे में आपको बताने वाले हैं। उनका जन्म 1 जुलाई 1935 में महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के पंढरपुर में एक ऐसे परिवार में हुआ जहां पर तमाशा सिर्फ एक कला नहीं थी बल्कि जीवन का एक हिस्सा हुआ करता था। विठाबाई के दादा नारायण खुडे ने तमाशा मंडली की स्थापना की थी। उनके पिता भाऊ बापू नारायणगांवकर ने भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाया और इसीलिए बचपन से ही विठाबाई भी मंच और लोक कला के माहौल में ही बड़ी हुई थी। 10 साल की उम्र से शुरू किया परफॉर्म करना बताया जाता है कि विठाबाई ने एक्टिंग की कोई भी ट्रेनिंग नहीं ली थी। बचपन से ही वह कल के प्रति काफी झुकाव रखती थी। बेहद कम उम्र में ही उन्होंने लावणी, गवलन और भेदिक जैसे लोकगीतों और निर्दोषों को सीखना भी शुरू कर दिया था। जब उनकी पारिवारिक मंडली को आर्थिक तंगी और शोज न मिलने की समस्या होने लगी तो विठाबाई ने सिर्फ 10 साल की उम्र में ही स्टेज पर डांस करना शुरू कर दिया था। मंच पर ही दिया बच्चे को जन्म विठाबाई की जिंदगी का सबसे मशहूर किस्सा यह था कि एक बार वह 9 महीने की गर्भवती होने के बावजूद भी मंच पर परफॉर्म कर रही थी। तभी उनको प्रसव पीड़ा होने लग गई थी। इसके बाद वह मंच के पीछे जाकर बच्चों को जन्म देकर कुछ देर बाद ही दोबारा मंच पर लौटने की तैयारी करने लग गई। हालांकि उन्हें आराम करने की सलाह दी गई थी और कार्यक्रम को रोक दिया गया था। यह घटना आज भी उनके कला समर्पण की सबसे बड़ी मिसाल कही जाती है। [embed]https://www.youtube.com/watch?v=wP4IJ11n_as[/embed] राज कपूर का ठुकराया था फ़िल्म ऑफर विठाबाई की पापुलैरिटी बढ़ाने के बाद में उन्हें कई सारी फिल्मों के ऑफर भी मिलने लग गए थे। कुछ मीडिया खबरों की माने तो उन्हें शोमैन राज कपूर की तरफ से फिल्म का ऑफर दिया गया था। लेकिन उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में आने के बजाय तमाशा को ही अपना जीवन समर्पित कर दिया था। उनका मानना था कि अगर वह तमाशा छोड़ देती है तो उनकी मंडली से जुड़े हुए कलाकारों और उनके परिवारों का सहारा पूरी तरीके से छिन जाएगा।](https://images.filmibeat.com/hi/img/2026/07/newproject70-1783001941.jpg)



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