नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। स्कूली शिक्षा विभाग के इंदौर विकासखंड (ब्लाक) शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय में हुए गबन में शामिल भ्रष्टाचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। कलेक्टर शिवम वर्मा ने जिला शिक्षा अधिकारी शांता स्वामी को एफआईआर दर्ज करवाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा गबन की राशि 2.86 करोड़ रुपये की वसूली भी की जाएगी।
बता दें कि भोपाल स्थित आईटी सेल द्वारा गबन के मामले को पकड़ा गया था। जानकारी अनुसार इस मामले में क्लर्क, भृत्य और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है जबकि गबन में बड़े अधिकारियों की भूमिका होने की भी शंका है। जो गबन के दौरान इंदौर विकासखंड कार्यालय में पदस्थ रहे है।
कलेक्टर ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जिन कर्मचारियों की संलिप्तता पाई गई थी, उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था। उनके खातों को फ्रीज भी किया गया था। तत्कालीन बीईओ सहित अन्य अधिकारियों की भूमिकाओं की भी जांच की जा रही है।
जिला शिक्षा अधिकारी की भूमिका भी संदिग्ध
इंदौर विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आने वाली छात्रवृत्ति, जीपीएफ और अन्य मद की राशि का गबन लंबे समय से किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि 2018 से राशि को गलत तरीके से परिचितों और रिश्तेदारों के खातों में डाला जा रहा था। बाद में इस राशि को निकाल लिया जाता था।
भोपाल में ऑडिट के दौरान यह गडबड़ी सामने आई है। गबन अवधि के दौरान इंदौर कार्यालय में पदस्थ रहे अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे है। करोड़ों का गबन हो गया और अधिकारी अनजान बने रहे। जानकारी अनुसार इसमें वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी शांता स्वामी की भूमिका भी संदिग्ध है।
पांच पूर्व शिक्षा अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि 2018 से दिसंबर 2025 तक बीईओ इंदौर पद पर रहे पांच अधिकारियों के ओटीपी से ट्रांजेक्शन होने की पुष्टि हुई है। बताया जा रहा है कि इन्हीं अधिकारियों ने संबंधित भृत्य को कंप्यूटर ऑपरेटर का काम सौंपा था और लॉगिन आईडी-पासवर्ड तक उपलब्ध कराए थे।
इसके बावजूद अब तक उनके खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस मामले में पूर्व में अकाउंटेंट दिनेश पवार, मेघना चार्ल्स, भृत्य सिद्धार्थ जोशी, राहुल अहिरे एवं अतुल त्रिवेदी को निलंबित किया गया था।
- 2.86 करोड़ रुपये की राशि का गबन
- 2018 से किया जा रहा था फर्जीवाड़ा
- जिला शिक्षा अधिकारी की भूमिका भी संदिग्ध
- पांच कर्मचारियों को किया जा चुका है निलंबित
फर्जी डिग्री से नौकरी करने वालों पर निर्देश के बाद भी एफआईआर नहीं
सरकारी स्कूलों में फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी हासिल करने वाले 74 संदिग्ध शिक्षकों को लोकायुक्त ने तलब किया है। आशंका है कि इन फर्जी डीएड और बीएड की अंकसूचियां लगाकर नौकरी हासिल की थीं। जांच में सामने आया कि शिक्षकों ने वर्ष 2006-07 में हुई संविदा शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति पाई थी।
यह सभी नियुक्तियां सांवेर जनपद पंचायत के माध्यम से की गई थीं। इनमें अधिकांश शिक्षक प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में पदस्थ हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर सितंबर 2024 में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी ने उत्कृष्ट उमावि सांवेर, कन्या उमावि सांवेर, उमावि चंद्रावतीगंज, उमावि डकाच्या, उमावि मांगल्या, उमावि धरमपुरी और उमावि अजनोद संकुल के प्राचार्यों को संबंधित शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई।
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