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Indore: बंगाल में मिली पिछली हार लाई थी विजयवर्गीय की राजनीति ने टर्निंग पाइंट

Indore: बंगाल में मिली पिछली हार लाई थी विजयवर्गीय की राजनीति ने टर्निंग पाइंट

बंगाल में भाजपा की जीत का जश्न इंदौर में धूमधाम से मना, लेकिन नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की  आंखों में आंसू थे और बंगाल से पांच साल तक रही उनकी दूरी का दर्द भी उनकी बातों में झलका।

 

दरअसल, छह साल पहले विजयवर्गीय राजनीति के जिस मुकाम पर थे, वहाँ से आगे बढ़ने का उन्होंने सोच रखा था। यदि पांच साल पहले ही बंगाल में भाजपा जीत जाती, तो फिर संगठन में उनका राजनीतिक कद बढ़ना तय था, लेकिन हार के बाद बंगाल में विजयवर्गीय की दूरी लगातार बढ़ती गई।

बंगाल में काम करने के दौरान उनके खिलाफ दर्ज हुए 30 से ज्यादा केसों ने उनकी राह और मुश्किल कर दी। रतलाम दौरे के दौरान उन्होंने खुद यह बात पत्रकारों से कही थी कि पार्टी के नेता उन्हें इसलिए बंगाल नहीं भेज रहे हैं क्योंकि वहां पर उनके खिलाफ फर्जी प्रकरण दर्ज हैं।जब बंगाल में भाजपा की जीत हुई तो विजयवर्गीय की आंखों में आंसू निकल आए और उन्होंने कहा कि यह आंसू उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि अन्याय पर जीत की खुशी है।

 

बंगाल की हार के बाद लौटे थे प्रदेश की राजनीति में

वर्ष 2014 में हरियाणा विधानसभा चुनाव में कैलाश विजयवर्गीय को चुनाव प्रभारी बनाया गया था। उन्होंने खुद को साबित किया और हरियाणा में भाजपा की सरकार बन गई। इसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अगले ही साल उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव बना दिया।

इसके बाद उन्हें बंगाल का प्रभारी भी बनाया गया। इसके बाद उन्होंने जमीनी स्तर पर भाजपा को मजबूत करने का काम किया और पिछले विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी, लेकिन भाजपा सरकार नहीं बना पाई।2023 में जब मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव हुए, तो पार्टी ने उन्हें इंदौर की एक नंबर विधानसभा से टिकट दे दिया और चुनाव जीतने के बाद वे सरकार में कैबिनेट मंत्री बने।

1999 में भाजपा का बंगाल में खुला था खाता

कांग्रेस से नाता तोड़ने के बाद ममता बनर्जी ने टीएमसी की नींव रखी। तब विधानसभा चुनाव में भाजपा से गठबंधन कर चुनाव लड़ा। वर्ष 1999 में टीएमसी के समर्थन से भाजपा का पहला विधायक बना। वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव में बंगाल में भाजपा के तीन उम्मीदवार जीते थे। बंगाल में भाजपा की जड़ें काफी कमजोर थीं।

अमित शाह ने मैदानी स्तर पर भाजपा को मजबूत करने की जिम्मेदारी कैलाश विजयवर्गीय को दी थी। विजयवर्गीय खुद कई बार कह चुके हैं कि जब उन्होंने बंगाल में काम करना शुरू किया तो वार्ड स्तर तक भी भाजपा का विस्तार नहीं हुआ था। धीरे-धीरे कार्यकर्ताओं को जोड़ा गया और वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 77 सीटें जीतीं। टीएमसी की झोली में 213 सीटें आईं।

प्रभारी के तौर पर विजयवर्गीय ने टीएमसी के कई विधायकों और सांसदों को अपनी पार्टी में शामिल कराया था, हालांकि उनमें से ज्यादातर फिर टीएमसी में चले गए थे। शुभेंदु अधिकारी को भाजपा में लाने में विजयवर्गीय की भूमिका रही थी।

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