मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके रिश्तेदारों पर जमीन खरीदी के आरोपों पर मंत्री तुलसी सिलावट ने कांग्रेस पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश में कई क्षेत्रों में नवाचार किए हैं। उनकी लोकप्रियता से डरकर कांग्रेस कुप्रचार कर रही है।
सिलावट ने कहा कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार व रिश्तेदारों की जमीन खरीदी-बिक्री को लेकर भ्रम पैदा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की कृषि भूमि में कोई इजाफा नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री के नाम 17 एकड़ जमीन थी, जिसका हलफनामा विधानसभा चुनाव के दौरान दिया गया था; उसमें भी उतनी ही भूमि का उल्लेख है। उनकी पत्नी सीमा यादव के पास वर्ष 2023 में 12 एकड़ कृषि भूमि थी, जो वर्ष 2026 में भी उतनी ही है। मोहन यादव द्वारा अधिकांश जमीनें मुख्यमंत्री बनने से पहले खरीदी गई थीं। 2008 से लेकर 2019 के बीच उन्होंने ये जमीनें खरीदी थीं।
मंत्री सिलावट ने कहा कि सिद्धि विनायक देवकान प्राइवेट लिमिटेड को लेकर भी भ्रम फैलाया जा रहा है। यह कंपनी वर्ष 2008 में कृषि कार्यों के लिए बनी थी। मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनकी पत्नी सीमा यादव कंपनी के निदेशक (डायरेक्टर) पद से अलग हो चुके हैं और उनके शेयर भी अब कंपनी में नहीं हैं। कंपनी के पास नवंबर में 68 एकड़ भूमि थी, जो जून 2026 में घटकर 65 एकड़ जमीन रह गई है। उनके पुत्र वैभव यादव ने भी मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने से पहले जमीन खरीदी थी। उन्होंने ग्राम सावरखेड़ी में वर्ष 2019 से 2023 के बीच 16 एकड़ कृषि भूमि खरीदी थी। पुत्रवधू शालिनी यादव द्वारा खरीदी गई जमीन उज्जैन मास्टर प्लान क्षेत्र के बाहर की है, जो वर्ष 2025 में खरीदी गई थी।
मुख्यमंत्री के रिश्तेदार अपने व्यवसाय व आर्थिक गतिविधियां स्वतंत्र रूप से संचालित करते हैं। उनके व्यवसाय को मुख्यमंत्री से जोड़ना बिल्कुल गलत है। उज्जैन का मास्टर प्लान भी मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने से पहले लागू किया गया है। मास्टर प्लान वर्ष 2023 से प्रभावशील है, जबकि मोहन यादव ने 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी। मुख्यमंत्री ने अपने पद का कोई दुरुपयोग नहीं किया है।
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