दिल्ली की द्वारका पुलिस साइबर सेल ने ऑनलाइन धोखाधड़ी में शामिल इंदौर के एक गैर-कानूनी साइबर कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। इसमें इंदौर से 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। छापेमारी के दौरान पुलिस ने 28 कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए हैं। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच से पता चलता है कि यह रैकेट बड़े पैमाने पर साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का हिस्सा था जो अनजान लोगों को अपना शिकार बनाता था। वित्तीय लेन-देन का पता लगाने और इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य साथियों की पहचान करने के लिए आगे की जांच चल रही है।
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इंदौर पुलिस को जानकारी नहीं
इंदौर पुलिस को हालांकि इस छापे की कोई जानकारी नहीं मिली है। एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने कहा कि दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई की हमें कोई जानकारी नहीं दी गई है। इस तरह साइबर अपराध करने वाले गैंग देशभर में सक्रिय हैं। अन्य राज्यों की पुलिस अपने स्तर पर जानकारी पुख्ता करने के बाद उन्हें गिरफ्त में लेती है।
डिजिटल अरेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश
हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम के खिलाफ उपायों को मजबूत करने के लिए देश भर में कई निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को 4 सप्ताह के भीतर एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाने का निर्देश दिया और देश भर में साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायतों के समाधान के सिस्टम को तेजी से लागू करने को कहा। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर द्वारा दायर स्टेटस रिपोर्ट पर गौर करने के बाद ये निर्देश जारी किए।
राज्यों और अदालतों के लिए जरूरी आदेश
बेंच ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे गृह मंत्रालय के 2 जनवरी के SOP के तहत शुरू किए गए शिकायत निवारण मॉड्यूल और मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल को जल्द से जल्द चालू करें। यह SOP नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और साइबर RMS से संबंधित है। राज्यों से यह भी कहा गया कि वे डिजिटल अरेस्ट स्कैम और उपलब्ध रिपोर्टिंग व शिकायत निवारण सिस्टम के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाएं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह SOP हर हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरलों को निर्देश दिया गया कि वे बैंक खाते फ्रीज करने के मामलों से निपटने वाली अदालतों और अधिकारियों को इन शिकायत निवारण सिस्टम के बारे में जानकारी दें, ताकि प्रभावित लोग अपने कानूनी या संवैधानिक अधिकारों पर असर डाले बिना पहले इन उपायों का लाभ उठा सकें।
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