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Indore News: नाले में गिरी थार, घरों-दुकानों में घुसा पानी, दोपहर से रात तक गिरा पानी

Indore News: नाले में गिरी थार, घरों-दुकानों में घुसा पानी, दोपहर से रात तक गिरा पानी

इंदौर में बीते कुछ दिनों से थमा हुआ मानसून एक बार फिर पूरी रफ्तार पकड़ चुका है। बुधवार की सुबह हालांकि मौसम पूरी तरह साफ रहा और तेज धूप के कारण दिनभर लोग गर्मी और भारी उमस से हलाकान होते रहे लेकिन शाम होते-होते अचानक मौसम ने करवट ली और आसमान में काले बादलों का डेरा जमा हो गया। इसके बाद शहर के विभिन्न हिस्सों में तेज बौछारों के साथ मूसलाधार बारिश का सिलसिला शुरू हो गया।

2 इंच पानी गिरा

इस अचानक हुई तेज बारिश के कारण नगर निगम के दावों की पोल खुल गई और शहर के वार्ड क्रमांक 80 में जलभराव की स्थिति निर्मित हो गई, जहां कई दुकानों के भीतर बारिश का पानी घुस जाने से व्यापारियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही शहर के कई प्रमुख मार्गों और रिहाइशी इलाकों की सड़कें पूरी तरह से जलमग्न नजर आईं। मौसम विभाग के मुताबिक आज दिनभर में इंदौर में 2 इंच से ज्यादा पानी गिरा है। 

थार गाड़ी नाले में गिरी, स्थानीय निवासियों ने बचाई पूरे परिवार की जान

इस झमाझम बारिश के दौरान शहर में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। चंदन नगर थाने से लकड़ी पीठे की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर बाढ़ जैसी स्थिति के कारण एक थार गाड़ी अनियंत्रित होकर गहरे नाले में जा गिरी। जिस समय यह हादसा हुआ, उस वक्त गाड़ी के भीतर एक पूरा परिवार सवार था जो पानी के तेज बहाव में फंस गया। गनीमत यह रही कि दुर्घटना को देखते ही आस-पास की बस्ती के लोग तुरंत मदद के लिए आगे आए और उन्होंने अपनी सूझबूझ व भारी मशक्कत के बाद गाड़ी में फंसे पूरे परिवार को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इसके अलावा शहर के जोन 22 के अंतर्गत आने वाले निर्माणाधीन निपानिया मुख्य मार्ग पर भी अव्यवस्था का आलम देखने को मिला, जहां महज 100 मीटर की दूरी के भीतर दो कारें कीचड़ और पानी में फंस गईं। इन गाड़ियों में बैठे परिवार काफी देर तक मूसलाधार बारिश के बीच प्रशासन या किसी मददगार के आने का इंतजार करते हुए दिखाई दिए।

मौसम विभाग की चेतावनी, जुलाई और अगस्त के महीनों पर टिकी उम्मीदें

मौसम वैज्ञानिकों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में अगले एक से दो दिनों तक मौसम का यही रुख बने रहने की पूरी संभावना है। इससे पहले जून का आखिरी सप्ताह मानसून की उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा था और इस दौरान शहर में केवल कहीं-कहीं बूंदाबांदी, रिमझिम या हल्की वर्षा ही दर्ज की गई थी। आंकड़ों की बात करें तो इस साल जून महीने में इंदौर में कुल साढ़े चार इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि सामान्य तौर पर जून का औसत पांच इंच के आसपास रहता है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में अच्छी और संतोषजनक बारिश के लिए जुलाई और अगस्त के महीने सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि पूरे मानसून सत्र की कुल वर्षा का लगभग आधा हिस्सा इन्हीं दो महीनों के दौरान दर्ज किया जाता है।

उमस से मिली बड़ी राहत, ठंडी हवाओं ने घोली फिजा में घुली ठंडक

बुधवार की शाम को जैसे ही आसमान में घने बादल घिरे, वैसे ही शहर के तापमान में तेजी से गिरावट दर्ज की गई। शाम को करीब 6.30 बजे विशेष रूप से पश्चिमी क्षेत्र में तेज बारिश का दौर शुरू हुआ, जिसके साथ ही बादलों की तेज गड़गड़ाहट भी सुनाई दी। जुलाई महीने की इस शुरुआती बारिश ने इंदौर वासियों को पिछले कई दिनों से परेशान कर रही उमस और चुभती गर्मी से एक झटके में बड़ी राहत पहुंचा दी। बारिश के साथ ही शहर में चली ठंडी हवाओं ने वातावरण को बेहद खुशनुमा और ठंडा बना दिया, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली।

इंदौर में जुलाई का महीना सबसे अहम

अगर इंदौर में बारिश के पुराने ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां 24 घंटे की अवधि में सर्वाधिक 11.5 इंच बारिश होने का एक अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है, जो आज से कई दशक पहले 27 जुलाई 1913 को बना था। इसके अलावा वर्ष 1973 में पूरे जुलाई महीने के दौरान रिकॉर्डतोड़ 30.5 इंच पानी गिरा था। इंदौर में सामान्य तौर पर जुलाई महीने की औसत बारिश 12 इंच मानी जाती है और इस दौरान औसतन 13 दिनों तक पानी बरसता है। इस बार भी मानसूनी बारिश के सक्रिय होने से तापमान में कमी आई है, जिससे आने वाले दिनों में मौसम के और सुहावना होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि सड़कों पर पानी बहने और कई कॉलोनियों में भारी जलभराव होने से जनजीवन पर भी असर पड़ा है।

 

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